90. राजस्थान में यूनेस्को भू-उद्यान एवं भू-विरासत स्थलों की संभावनाएँ — पूर्ण नोट्स
UNESCO Geo-parks and Geo-heritage Sites: Potential of Rajasthanपूरा पढ़ने के लिए मुफ़्त में साइन अप करें
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मूल मुख्य बिंदु
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यूनेस्को वैश्विक भू-उद्यान कार्यक्रम 2015 में स्थापित; 2024 तक 48 देशों में 213 भू-उद्यान; भारत का अभी तक कोई स्थल मान्यता प्राप्त नहीं।
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जैसलमेर का अकाल काष्ठ जीवाश्म उद्यान — 25 जीवाश्म वृक्ष-स्कंध, ~18 करोड़ वर्ष पुराने (जुरासिक); 1974 से GSI राष्ट्रीय भूवैज्ञानिक स्मारक।
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बाड़मेर बेसिन — क्रेटेशियस काल के डायनासोर अवशेष और काष्ठ जीवाश्म; पश्चिमी भारत में सर्वाधिक समृद्ध कशेरुकी पुरा-जीव विज्ञान क्षेत्रों में से एक।
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जैसलमेर बेसिन — एमोनाइट, बेलेम्नाइट, इचिनोइड और पेट्रीकृत लकड़ी सहित जुरासिक समुद्री जीवाश्म।
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जोधपुर का मंडोर — GSI सर्वेक्षणों द्वारा जुरासिक डायनासोर जीवाश्म स्थलों की पुष्टि।
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बूंदी की स्ट्रोमेटोलाइट — प्रीकैम्ब्रियन काल की जीवाश्म संरचनाएँ (जीवन का प्राचीनतम साक्ष्य), 160-180 करोड़ वर्ष पुरानी।
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अरावली पर्वतमाला — बैंडेड नाइसिक कॉम्प्लेक्स (BGC) आधार ~3,500 Ma (आर्कियन), जबकि अरावली सुपरग्रुप वलन घटना ~2,500 Ma (प्रोटेरोज़ोइक)।
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GSI ने भारत में 34 राष्ट्रीय भूवैज्ञानिक स्मारक घोषित किए हैं; राजस्थान अकाल जीवाश्म उद्यान और बर्र (पाली) सहित सबसे महत्त्वपूर्ण में से कुछ की मेजबानी करता है।
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थार मरुस्थल — वायु-निर्मित स्थलरूप, अवशिष्ट बालुका स्तूप और जीवाश्म नदी चैनल भू-उद्यान की प्रबल संभावना प्रस्तुत करते हैं।
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चंबल खड्ड — विंध्यन बलुआ पत्थरों के त्वरित अपरदन से निर्मित बीहड़ भू-आकृति; भू-विरासत क्षेत्र के रूप में संभावना।
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भारत का पहला यूनेस्को भू-उद्यान प्रस्ताव लमहेटा घाट (मध्य प्रदेश) — अभी मूल्यांकन के अधीन (2024)।
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2024 तक राजस्थान में समर्पित भू-विरासत संरक्षण अधिनियम नहीं; GSI का राष्ट्रीय भूवैज्ञानिक स्मारक ढाँचा ही प्राथमिक कानूनी सुरक्षा तंत्र।
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RPSC 2021 ने इस विषय पर 10 अंकों का प्रश्न पूछा था — एकमात्र PYQ उपस्थिति।
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भू-पर्यटन — भूवैज्ञानिक स्थलों पर केंद्रित पर्यटन — थार और चंबल क्षेत्रों में वैकल्पिक आजीविका सृजित कर सकता है।
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पाली जिले का बर्र — प्रीकैम्ब्रियन आधार शैलों का अनूठा भूवैज्ञानिक उद्भेदन; GSI राष्ट्रीय भूवैज्ञानिक स्मारक।
संभावित संभावित RAS प्रश्न
PYQ रुझान और 2026 पाठ्यक्रम विश्लेषण पर आधारित
1 5M यूनेस्को वैश्विक भू-उद्यान क्या है? भारत को अभी तक यह मान्यता क्यों नहीं मिली?
आदर्श उत्तर
यूनेस्को वैश्विक भू-उद्यान एक संरक्षित क्षेत्र है जिसमें अंतरराष्ट्रीय महत्व के भूवैज्ञानिक स्थल होते हैं और जिसका प्रबंधन संरक्षण, शिक्षा और सतत भू-पर्यटन के लिए किया जाता है। 2015 में स्थापित यह कार्यक्रम 48 देशों में 213 भू-उद्यानों को कवर करता है। भारत में समर्पित भू-विरासत कानून की अनुपस्थिति, अवसंरचना की कमी और अंतर-मंत्रालयी अधिकार क्षेत्र की अस्पष्टता के कारण मान्यता नहीं मिली है।
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