मुख्य बिंदु

  1. 1

    राजस्थान में 81 प्रकार के खनिजों के भंडार हैं, जिनमें से 58 का सक्रिय खनन होता है।

  2. 2

    राजस्थान भारत में सीसा-जस्ता अयस्क, सेलेनाइट और वोलेस्टोनाइट का एकमात्र उत्पादक है।

  3. 3

    राज्य चांदी, कैल्साइट, जिप्सम, बॉल क्ले, फॉस्फोराइट, गेरू, स्टीटाइट और फेल्सपार उत्पादन में भारत में अग्रणी है।

  4. 4

    खान एवं भूविज्ञान विभाग का 2024-25 राजस्व लक्ष्य ₹9,500 करोड़; दिसंबर 2024 तक ₹6,340.85 करोड़ संग्रह।

  5. 5

    राज्य में 145 प्रमुख खनिज पट्टे, 16,962 लघु खनिज पट्टे और 17,185 खदान लाइसेंस हैं।

  6. 6

    RSMML ने दिसंबर 2024 तक ₹2,125.46 करोड़ का सकल राजस्व अर्जित किया।

  7. 7

    जामरकोटरा (उदयपुर) — ~200 मिलियन टन भंडार के साथ भारत की सबसे बड़ी रॉक फॉस्फेट खदान।

  8. 8

    ज़ावर खदान (उदयपुर) — भारत की एकमात्र प्राथमिक सीसा-जस्ता खदान, HZL/वेदांता द्वारा संचालित।

  9. 9

    सिंदेसर खुर्द (राजसमंद) — भारत की सबसे बड़ी प्राथमिक चांदी की खदान।

  10. 10

    राजस्थान भारत के ~90–95% गार्नेट उत्पादन में योगदान देता है।

  11. 11

    राजस्थान खनिज नीति 2024 का लक्ष्य 2047 तक 70 खनिजों का खनन और 1 करोड़ लोगों को रोजगार देना है।

  12. 12

    DMFT ने खनन प्रभावित क्षेत्रों में कल्याण कार्यों के लिए ₹7,952.74 करोड़ स्वीकृत किए हैं।

  13. 13

    राजस्थान की अरावली श्रृंखला प्राथमिक धातुकर्मी पट्टी है — जस्ता, सीसा, तांबा, चांदी और लौह अयस्क का स्रोत।

  14. 14

    मकराना (नागौर) का संगमरमर — ताजमहल में प्रयुक्त — प्रीमियम डोलोमिटिक संगमरमर है; राजस्थान भारत का शीर्ष संगमरमर उत्पादक है।

  15. 15

    राजस्थान बाड़मेर-सांचोर बेसिन से भारत के कच्चे तेल उत्पादन में ~14.95% (4.39 MMTPA) का योगदान करता है।

संभावित RAS प्रश्न

PYQ रुझान और 2026 पाठ्यक्रम विश्लेषण पर आधारित

1 5M राजस्थान को भारत का खनिज भंडार क्यों कहा जाता है? चार खनिजों के नाम लिखिए जिनका यह एकमात्र या प्रमुख उत्पादक है। 5 अंक · 50 शब्द

आदर्श उत्तर

राजस्थान 81 प्रकार के खनिज उत्पन्न करता है और भारत के कुल खनिज राजस्व में लगभग 22% योगदान देता है। यह सीसा-जस्ता (जावर, उदयपुर), सेलेनाइट और वोलेस्टोनाइट का एकमात्र उत्पादक है। चांदी, जिप्सम (नागौर), रॉक फॉस्फेट (झामरकोटड़ा) और संगमरमर (मकराना) उत्पादन में यह राष्ट्रीय अग्रणी है। इसी खनिज विविधता के कारण इसे भारत का खनिज भंडार कहा जाता है।

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