86. राजस्थान के मृदा संसाधन — पूर्ण नोट्स
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मूल मुख्य बिंदु
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राजस्थान में 7 प्रमुख मृदा प्रकार हैं: मरुस्थलीय/शुष्क, जलोढ़, लाल, लैटेराइट, काली (रेगुर), भूरी/वनीय और लवणीय-क्षारीय।
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मरुस्थलीय/शुष्क मिट्टी (वायु-निर्मित) राजस्थान के कुल क्षेत्रफल के ~61% पर फैली है।
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पूर्वी राजस्थान की जलोढ़ मिट्टी चंबल, बनास, गंभीर और बाणगंगा नदियों के साथ-साथ फैली है।
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लाल मिट्टी (लौहमय) दक्षिण-पूर्वी आदिवासी बेल्ट — डूंगरपुर और बांसवाड़ा — में पाई जाती है।
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काली मिट्टी (रेगुर) कोटा, बूंदी, झालावाड़ और चित्तौड़गढ़ में मिलती है; यह नम होने पर फूलती और सूखने पर दरारें डालती है।
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लैटेराइट मिट्टी उदयपुर, सिरोही और प्रतापगढ़ की पहाड़ी पट्टी तक सीमित है।
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लवणीय-क्षारीय मिट्टी सांभर, डीडवाना, डेगाना और उत्तरी राजस्थान में IGNP क्षेत्र में पाई जाती है।
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ICAR वर्गीकरण में राजस्थान की मिट्टी 8 ऑर्डर में विभाजित है।
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प्रमुख मृदा समस्याओं में पवन अपरदन, जलभराव, लवणता/क्षारता और सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी शामिल हैं।
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मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना फरवरी 2015 में शुरू हुई; राजस्थान ने पहले दो चक्रों में 72.66 लाख कार्ड जारी किए।
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राजस्थान में कृषि विभाग के अधीन 27 मृदा परीक्षण प्रयोगशालाएँ हैं जो सभी 50 जिलों की सेवा करती हैं।
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सक्रिय थार मरुस्थल क्षेत्रों में पवन अपरदन प्रति हेक्टेयर प्रति वर्ष ~60-100 टन ऊपरी मृदा हटा देता है।
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IGNP ने ~7.9 लाख हेक्टेयर मरुस्थल को सींचने योग्य बनाया, लेकिन ~1.54 लाख हेक्टेयर में द्वितीयक लवणता उत्पन्न हो गई है।
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पूर्वी राजस्थान की पहाड़ी पट्टी में समोच्च बंधन, सीढ़ीदार खेती और चेक डैम प्रमुख यांत्रिक संरक्षण उपाय हैं।
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NMSA के अंतर्गत राजस्थान के 18 शुष्क और अर्ध-शुष्क जिलों में मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन लागू किया गया है।
संभावित संभावित RAS प्रश्न
PYQ रुझान और 2026 पाठ्यक्रम विश्लेषण पर आधारित
1 5M राजस्थान के प्रमुख मृदा प्रकारों के नाम बताइए और उनके भौगोलिक वितरण का उल्लेख कीजिए।
आदर्श उत्तर
राजस्थान में पाँच प्रमुख मृदा प्रकार हैं: (1) रेतीली मृदा (एरिडिसोल) — पश्चिमी थार, जैसलमेर-बाड़मेर; (2) लाल-पीली मृदा — दक्षिण-पूर्वी उदयपुर, डूँगरपुर; (3) काली मृदा (वर्टिसोल/रेगुर) — हाड़ोती क्षेत्र, कोटा-बूँदी-बारां-झालावाड़; (4) जलोढ़ मृदा — चम्बल-बनास के पूर्वी मैदान, गंगानगर; (5) लवणीय/क्षारीय मृदा — साम्भर झील बेसिन और IGNP कमांड क्षेत्र। जलोढ़ मृदा सर्वाधिक गहन कृषि का समर्थन करती है।
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