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संभावित प्रश्न एवं आदर्श उत्तर
प्रश्न 1 (5 अंक — 50 शब्द): कृष्णा नदी की कोई भी आठ सहायक नदियों के नाम लिखिए।
आदर्श उत्तर:
कृष्णा नदी (1,400 km; महाबलेश्वर, महाराष्ट्र से उद्गम) की प्रमुख सहायक नदियाँ: (1) भीमा (861 km, दाहिनी); (2) तुंगभद्रा (दाहिनी — हम्पी); (3) घटप्रभा (दाहिनी); (4) मालप्रभा (दाहिनी); (5) मूसी (दाहिनी — हैदराबाद से); (6) कोयना (बाईं — कोयना बाँध); (7) येर्ला (बाईं); (8) मुनेरू (बाईं)। तुंगभद्रा इसकी सबसे बड़ी सहायक है।
प्रश्न 2 (5 अंक — 50 शब्द): नर्मदा और तापी अन्य प्रायद्वीपीय नदियों के विपरीत पश्चिम की ओर क्यों बहती हैं?
आदर्श उत्तर:
अन्य पूर्व-प्रवाही प्रायद्वीपीय नदियों (गोदावरी, कृष्णा, कावेरी) के विपरीत, नर्मदा और तापी पश्चिम की ओर अरब सागर में बहती हैं क्योंकि ये भ्रंश घाटियों (ग्रैबेन) से होकर बहती हैं — ये विवर्तनिक भ्रंश अवनमन हैं जो दक्कन ट्रैप बेसाल्ट में भ्रंश रेखाओं के साथ टूटने से बने। नर्मदा विंध्य और सतपुड़ा के बीच; तापी सतपुड़ा और अजंता के बीच बहती है। यह भ्रंश इन्हें दक्कन पठार की सामान्य पूर्वी ढाल का अनुसरण करने से रोकता है।
प्रश्न 3 (5 अंक — 50 शब्द): पूर्ववर्ती अपवाह क्या है? भारत से दो उदाहरण दीजिए।
आदर्श उत्तर:
पूर्ववर्ती अपवाह उन नदियों को कहते हैं जो अपने द्वारा पार किए जाने वाले पर्वतों से पुरानी हैं — इन्होंने विवर्तनिक उत्थान के कारण पर्वतों के उभरते समय नीचे की ओर अपरदन कर अपना मूल मार्ग बनाए रखा। इससे वहाँ शानदार कण्ड बनते हैं जहाँ नदियाँ पर्वतों को काटती हैं। भारत से उदाहरण: (1) सिंधु नदी — काराकोरम/हिमालय को 5,200 m गहरे कण्ड के माध्यम से काटती है; (2) ब्रह्मपुत्र (त्सांगपो) — नामचा बरवा (7,782 m) के चारों ओर मुड़ती है, जहाँ विश्व का सबसे गहरा कण्ड बनता है।
प्रश्न 4 (5 अंक — 50 शब्द): सिंधु जल संधि क्या है? इसके प्रमुख प्रावधान बताइए।
आदर्श उत्तर:
सिंधु जल संधि (1960) भारत और पाकिस्तान के बीच विश्व बैंक की मध्यस्थता से हुई। इसमें तीन पूर्वी नदियाँ (रावी, ब्यास, सतलज — ~41 BCM) विशेष रूप से भारत को और तीन पश्चिमी नदियाँ (सिंधु, झेलम, चिनाब — ~168 BCM) पाकिस्तान को आवंटित की गईं। भारत पश्चिमी नदियों का गैर-उपभोग्य उपयोग (रन-ऑफ-रिवर जलविद्युत, निर्धारित सिंचाई) कर सकता है। यह संधि तीन भारत-पाकिस्तान युद्धों में भी बनी रही किंतु आज दबाव में है।
प्रश्न 5 (10 अंक — 150 शब्द): गंगा नदी तंत्र का वर्णन कीजिए — उद्गम, सहायक नदियाँ और आर्थिक महत्त्व।
आदर्श उत्तर:
गंगा (2,525 km) भारत की सबसे लंबी, सबसे पवित्र और आर्थिक दृष्टि से सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण नदी है। इसका उद्गम उत्तराखंड में गंगोत्री हिमनद (गौमुख) से 3,892 m पर होता है। भागीरथी, अलकनंदा से देवप्रयाग में मिलकर गंगा का निर्माण करती है। यह उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल से होकर बंगाल की खाड़ी में सुंदरबन डेल्टा (विश्व का सबसे बड़ा मैंग्रोव वन, 10,200 वर्ग km) बनाती है।
दाहिनी सहायक: यमुना (1,376 km — प्रयागराज में मिलती है); सोन (784 km; MP-बिहार)।
बाईं सहायक: रामगंगा, घाघरा/कर्णाली (1,080 km), गंडक, कोसी (720 km — "बिहार का शोक"; बारंबार धारा परिवर्तन, बाढ़)।
आर्थिक महत्त्व:
कृषि: गंगा बेसिन (8.6 लाख वर्ग km — भारत का 26%) UP/पंजाब में गेहूँ, बिहार/पश्चिम बंगाल में चावल, UP में गन्ना उगाता है; उपजाऊ खादर में गहन खरीफ-रबी कृषि।
उद्योग: गंगा के तट पर प्रमुख औद्योगिक नगर — कानपुर (चर्मशोधन), वाराणसी (वस्त्र/हथकरघा), इलाहाबाद, पटना, कोलकाता (जूट, इंजीनियरिंग)।
जलमार्ग: गंगा और सहायक नदियाँ 1,600 km नौगम्य जलमार्ग (राष्ट्रीय जलमार्ग 1 — इलाहाबाद से हल्दिया)।
धर्म: 1 अरब हिंदुओं के लिए आध्यात्मिक केंद्र; हरिद्वार, ऋषिकेश, वाराणसी, प्रयागराज की तीर्थाटन अर्थव्यवस्था।
चुनौतियाँ: औद्योगिक अपशिष्ट, सीवेज, धार्मिक सामग्री प्रदूषण का कारण; नमामि गंगे मिशन (₹20,000 करोड़) STP, नदी तट विकास और जैव विविधता संरक्षण के माध्यम से इसे दूर करता है।
प्रश्न 6 (10 अंक — 150 शब्द): ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र की व्याख्या कीजिए। यह असम में बारंबार बाढ़ क्यों लाती है?
आदर्श उत्तर:
ब्रह्मपुत्र का उद्गम तिब्बत में त्सांगपो (चेमायुंगडुंग हिमनद, 5,150 m) के रूप में होता है। यह ~1,625 km तक तिब्बत में पूर्व की ओर बहती है, फिर नामचा बरवा (7,782 m) के चारों ओर शानदार हेयरपिन मोड़ लेती है — विश्व का सबसे गहरा कण्ड (यारलुंग त्सांगपो कैनियन, 5,382 m गहरा) काटते हुए — और दिहांग के रूप में अरुणाचल प्रदेश में प्रवेश करती है। असम में ब्रह्मपुत्र; बांग्लादेश में जमुना कहलाती है। कुल लंबाई: ~2,900 km; भारत में: 918 km।
भारत में प्रमुख सहायक: लोहित, दिबांग, सुबनसिरी, मानस (दाहिनी — पूर्वी हिमालय से); बराक, संकोश (बाईं)।
असम में बारंबार बाढ़ के कारण:
- विशाल जलनिर्वहन: वार्षिक जलनिर्वहन ~585 BCM — एशिया में तीसरा; मानसून-काल में प्रवाह अत्यधिक।
- भूकंपीय रूप से सक्रिय क्षेत्र: असम जोन V (सर्वोच्च भूकंप जोखिम) में; भूकंप (विशेषतः 1950, M8.6) भूस्खलन से नदीतल संकीर्ण करते हैं, बाढ़ ऊँची होती है।
- भारी तलछट भार: प्रति सेकंड ~2.2 लाख kg वहन; तेज अवसादन से नदीतल ऊँचा होता, चैनल क्षमता घटती है।
- चौड़ी गुंफित चैनल: ब्रह्मपुत्र अत्यंत चौड़े बाढ़-मैदान में गुंफित नदी (अनेक परस्पर जुड़ी धाराएँ) है — जल आसानी से फैलता है।
- माजुली द्वीप: विश्व का सबसे बड़ा नदी द्वीप (880 वर्ग km) तेजी से घट रहा है — 1,246 वर्ग km (1950) से ~880 वर्ग km हो गया।
- हिमनद पिघलाव: जलवायु परिवर्तन से हिमालयी हिमनद पिघलाव तेज, आधार प्रवाह बढ़ता है।
शमन: तटबंध (किंतु विवादास्पद — टूटने पर बाढ़ और भयंकर); पूर्व चेतावनी तंत्र; BRBM अधिनियम 1980 के तहत बेसिन प्रबंधन हेतु ब्रह्मपुत्र बोर्ड।
