मुख्य बिंदु

  1. 1

    जलवायु परिवर्तन: वैश्विक तापमान पूर्व-औद्योगिक स्तर से 1.1°C ऊपर (2024)। CO₂: 425 ppm (2024) बनाम 280 ppm (पूर्व-औद्योगिक)। 2023 — रिकॉर्ड सबसे गर्म वर्ष। पेरिस समझौता (2015): 1.5°C/2°C सीमा।

  2. 2

    ओज़ोन परत क्षरण — पीवाईक्यू 2023 (10 अंक): ओज़ोन परत समतापमंडल में 15–35 किमी ऊँचाई पर स्थित है और सूर्य के हानिकारक पराबैंगनी-बी तथा पराबैंगनी-सी विकिरण का 97–99% अवशोषित करती है। ओज़ोन-क्षयकारी पदार्थों में क्लोरोफ्लोरोकार्बन, हाइड्रोक्लोरोफ्लोरोकार्बन, हेलोन और कार्बन टेट्राक्लोराइड आते हैं; इनके मुख्य स्रोत रेफ्रिजरेंट, एरोसोल और अग्निशामक रहे हैं। अंटार्कटिक ओज़ोन छिद्र 1985 में ब्रिटिश अंटार्कटिक सर्वे ने खोजा। मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल (1987) को सबसे सफल अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण समझौता कहा जाता है, क्योंकि इसने ओज़ोन-क्षयकारी पदार्थों में 99% कमी कराई।

  3. 3

    जैव विविधता क्षति: पृथ्वी 6वाँ महाविलोपन — वर्तमान विलोपन दर 100–1,000× प्राकृतिक दर। IUCN रेड लिस्ट (2024): 44,016 प्रजातियाँ संकटग्रस्त (28%)। प्रमुख कारण: आवास नाश, अत्यधिक दोहन, आक्रामक प्रजातियाँ।

  4. 4

    मरुस्थलीकरण: शुष्क भूमि का मानव-जनित/जलवायु परिवर्तन से क्षरण — पृथ्वी की 40% भूमि प्रभावित; 3.2 अरब लोगUNCCD (1994)। राजस्थान: पश्चिमी क्षेत्र में रेत के टीले 0.5–1.5 किमी/वर्ष आगे।

  5. 5

    प्लास्टिक प्रदूषण: 400 मिलियन टन/वर्ष उत्पादन; केवल 9% पुनर्चक्रित। माइक्रोप्लास्टिक मारियाना ट्रेंच, आर्कटिक, मानव रक्त में पाए गए। वैश्विक प्लास्टिक संधि (2024) — UN वार्ता।

  6. 6

    वनोन्मूलन: वार्षिक 4.7 मिलियन हेक्टेयर वन हानि (शुद्ध)। अमेज़न का 18–20% नष्ट — टिपिंग प्वाइंट (~25%) का खतरा। REDD+ — UN वन संरक्षण तंत्र।

  7. 7

    महासागर अम्लीकरण: महासागर 30% CO₂ अवशोषित करते हैं → H₂CO₃ → pH 8.2 से 8.1 (26% अधिक अम्लीय)। मूँगा भित्तियाँ (CaCO₃) घुलती हैं — विरंजन एवं मृत्यु।

  8. 8

    समुद्र स्तर वृद्धि: 1900 से ~20 सेमी वृद्धि; 3.7 मिमी/वर्ष। कारण: तापीय विस्तार (60–70%), हिमखंड पिघलाव। तुवालू, किरिबाती, मालदीव अस्तित्व संकट में।

  9. 9

    हिमनद अपसरण: वैश्विक ~31 अरब टन/वर्ष हिम हानि। गंगोत्री हिमनद ~22 मी/वर्ष पीछे। UN 2025 — हिमनद संरक्षण अंतरराष्ट्रीय वर्ष।

  10. 10

    वायु प्रदूषण: PM2.5 — सबसे घातक; ~70 लाख मृत्यु/वर्ष। भारत का NCAP: 2026 तक PM2.5 में 40% कटौती। दिल्ली AQI शीतकाल में 400+ (खतरनाक: 300+)।

  11. 11

    प्रमुख अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण समझौते: स्टॉकहोम 1972, मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल 1987, क्योटो प्रोटोकॉल 1997, पेरिस समझौता 2015, CBD 1992, कुनमिंग-मॉन्ट्रियल 2022।

  12. 12

    भारत की पर्यावरण प्रतिबद्धताएँ: पेरिस NDC — 2070 तक नेट जीरो; 2030 तक 50% बिजली गैर-जीवाश्म स्रोतों से; NAPCC 2008 — 8 मिशन।

संभावित RAS प्रश्न

PYQ रुझान और 2026 पाठ्यक्रम विश्लेषण पर आधारित

1 5M ओज़ोन परत क्या है? इसके क्षरण के कारण बताइए। 5 अंक · 50 शब्द

आदर्श उत्तर

ओज़ोन परत (समतापमंडल, 15–35 किमी) UV-B/C का 97–99% अवशोषण करती है। क्षरण के कारण: (1) CFCs (रेफ्रिजरेंट, एरोसोल — 1 Cl परमाणु 1,00,000 O₃ अणुओं का उत्प्रेरक नाश); (2) हेलोन (अग्निशामक); (3) CCl₄; (4) N₂O (उर्वरक — अनियंत्रित सबसे महत्त्वपूर्ण ODS)। अंटार्कटिक ध्रुवीय भँवर बसंत में क्षरण बढ़ाता है।

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