मुख्य बिंदु

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    सामाजिक न्याय का अर्थ है समाज के सभी सदस्यों में अधिकारों, अवसरों, संसाधनों और बोझों का न्यायसंगत वितरण — विशेष रूप से वंचित समूहों की ऐतिहासिक असुविधा को संबोधित करना; यह भारत के कल्याणकारी राज्य का नैतिक आधार है।

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    रॉल्स का न्याय सिद्धांत (1971): न्यायपूर्ण संस्थाएँ वे हैं जो "अज्ञानता के पर्दे" के पीछे डिज़ाइन की जाएँ। दो सिद्धांत: (1) सभी के लिए समान मूलभूत स्वतंत्रताएँ; (2) असमानता केवल तभी उचित जब वह सबसे वंचित को लाभ दे (अंतर सिद्धांत)।

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    अमर्त्य सेन का क्षमता दृष्टिकोण — सामाजिक न्याय के लिए प्रत्येक व्यक्ति को वास्तविक स्वतंत्रताएँ (क्षमताएँ) होनी चाहिए: स्वास्थ्य, शिक्षा, राजनीतिक भागीदारी। गरीबी केवल आय का अभाव नहीं, क्षमता का अभाव है।

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    मानवीय चिंताएँ प्रशासन में उस अनिवार्यता को कहती हैं जिसके अनुसार हर मानव को — विशेष रूप से संकट में — गरिमा और करुणा के साथ व्यवहार किया जाए; जाति, धर्म या राजनीतिक संबद्धता निर्विचार।

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    जवाबदेही सार्वजनिक प्रशासन में अधिकारियों का वह दायित्व है जिसके तहत वे शक्ति, संसाधन और प्राधिकार के उपयोग का उत्तर दें — विधायिका को (राजनीतिक), न्यायालयों को (कानूनी), नागरिकों को (सामाजिक) और विवेक को (नैतिक)।

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    जवाबदेही के चार प्रकार: राजनीतिक (निर्वाचित प्रतिनिधियों को), प्रशासनिक (वरिष्ठ अधिकारियों को), कानूनी (न्यायालयों को), सामाजिक (नागरिक समाज, मीडिया, RTI को)।

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    मैक्स वेबर का भेद ज़्वेक-तर्कसंगतता (साधन-तर्कसंगतता) और वेर्ट-तर्कसंगतता (मूल्य-तर्कसंगतता) के बीच: नौकरशाही साधन-तर्कसंगत (नियम, प्रक्रिया) ढंग से काम करती है, पर नैतिक प्रशासन का आधार मूल्य-तर्कसंगतता (न्याय, गरिमा) होनी चाहिए।

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    साधन-तर्कसंगतता प्रशासन में दक्षता और नियम-पालन को प्राथमिकता देती है। जब अधिकारी परिणामों पर नैतिक विचार किए बिना यांत्रिक रूप से नियम पालन करते हैं, तब यह हन्ना आरेंट की "बुराई की सामान्यता" बन जाती है।

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    मूल्य-तर्कसंगतता का अर्थ है मौलिक नैतिक मूल्यों — न्याय, समता, करुणा, गरिमा — के आधार पर कार्य करना, भले ही वे मूल्य प्रक्रियागत दक्षता से टकराएँ। यह सीटी बजाने, विवेकपूर्ण आपत्ति और मानवीय प्रतिक्रिया का आधार है।

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    मानवीय जवाबदेही: अंतर्राष्ट्रीय मानवीय कानून और UN प्रणाली नागरिकों, शरणार्थियों के न्यूनतम उपचार मानक तय करते हैं; राजस्थान जैसे आपदा-प्रवण राज्यों के प्रशासकों पर समान मानवीय मानदंडों का नैतिक दायित्व है।

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    सामाजिक न्याय बनाम कानून का शासन तनाव: कभी-कभी कड़ा नियम-पालन अन्यायपूर्ण परिणाम देता है (जैसे कोर्ट आदेश पर सूखाग्रस्त आदिवासी परिवार को वन भूमि से बेदखल करना)। नैतिक प्रशासन को विवेक से वैधता और समता में संतुलन बनाना चाहिए।

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    वितरणात्मक न्याय (अरस्तू) के अनुसार समान लोगों के साथ समान और असमान लोगों के साथ उनके अंतर के अनुपात में भिन्न व्यवहार — यह आरक्षण, प्रगतिशील कराधान और लक्षित कल्याण का दार्शनिक आधार है।

संभावित RAS प्रश्न

PYQ रुझान और 2026 पाठ्यक्रम विश्लेषण पर आधारित

1 5M रॉल्स के न्याय सिद्धांत में "अंतर सिद्धांत" क्या है? भारत की कल्याण प्रशासन में यह कैसे लागू होता है? 5 अंक · 50 शब्द

आदर्श उत्तर

रॉल्स का अंतर सिद्धांत कहता है कि सामाजिक-आर्थिक असमानताएँ न्यायपूर्ण केवल तभी हैं जब वे सबसे वंचित को लाभ पहुँचाएँ। भारत की कल्याण प्रशासन में: PM-KISAN, MNREGA, और चिरंजीवी योजना नैतिक रूप से उचित हैं क्योंकि वे संसाधन सबसे गरीब — आदिवासी, दलित, कृषि मजदूर — तक पहुँचाती हैं।

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