मुख्य बिंदु

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    मूल्य-संस्कार वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से नैतिक, सामाजिक और नागरिक मूल्य पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरित होते हैं। तीन प्रमुख कारक: (a) परिवार — प्रथम एवं स्थायी; (b) समाज — साथी, समुदाय, मीडिया; (c) शैक्षणिक संस्थाएँ — औपचारिक एवं व्यवस्थित।

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    परिवार नैतिक शिक्षा की प्रथम पाठशाला है — बच्चे अमूर्त तर्क से पहले ही अवलोकन, अनुकरण और भावनात्मक जुड़ाव द्वारा मूल्यों को आत्मसात करते हैं; माता-पिता का व्यवहार (केवल शब्द नहीं) सबसे शक्तिशाली मूल्य-शिक्षक है।

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    महात्मा गांधी ने कहा: "यदि हमें संसार में वास्तविक शांति चाहिए तो हमें बच्चों से शुरुआत करनी होगी" — गृह-वातावरण और माता-पिता के उदाहरण सीधे उस नैतिक चरित्र को आकार देते हैं जो प्रशासक बाद में सार्वजनिक सेवा में लेकर आते हैं।

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    समाज (साथी समूह, सामुदायिक संस्थाएँ, सांस्कृतिक परंपराएँ, नागरिक समाज, मीडिया) सामाजिक मानदंडों, आदर्शों, नायकों के सम्मान और सामूहिक स्मृति के माध्यम से मूल्यों को आकार देता है।

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    शैक्षणिक संस्थाएँ पाठ्यक्रम, सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों, शिक्षक-छात्र संबंधों और संस्थागत संस्कृति (विद्यालय मूल्य-वातावरण) के माध्यम से मूल्य-संस्कार को औपचारिक रूप देती हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में नैतिक शिक्षा को मूल अनिवार्यता के रूप में शामिल किया गया है।

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    लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के चरण बताते हैं कि बच्चे पूर्व-पारंपरिक (स्व-हित) → पारंपरिक (सामाजिक अनुरूपता) → उत्तर-पारंपरिक (सार्वभौमिक सिद्धांत) से गुजरते हैं; परिवार पहले दो को आकार देता है; शिक्षा तीसरे को तेज कर सकती है।

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    साथी समूह (किशोर समाज) मूल्य-निर्माण में अक्सर परिवार जितने प्रभावशाली होते हैं — साझा मानदंड, सामाजिक दबाव और समूह पहचान यह निर्धारित करती है कि युवा नागरिक, प्रतिस्पर्धी या असामाजिक मूल्यों को आत्मसात करते हैं।

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    विवेकानंद का शिक्षा आदर्श — "जीवन-निर्माण, मानव-निर्माण, चरित्र-निर्माण" — केवल व्यावसायिक दृष्टिकोण को चुनौती देता है; केवल संज्ञानात्मक कौशल विकसित करने वाले विद्यालय तकनीकी रूप से सक्षम किंतु नैतिक रूप से खोखले प्रशासक तैयार करते हैं।

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    मीडिया और डिजिटल समाज अनौपचारिक मूल्य-निर्माण में शक्तिशाली बन गए हैं — सोशल मीडिया भ्रष्टाचार, लैंगिक समानता, नागरिक भागीदारी के बारे में मानदंडों को प्रभावित करता है; जिम्मेदार मीडिया नैतिक नागरिक संस्कृति को बढ़ावा देता है।

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    उच्च शिक्षा संस्थाएँ भविष्य के प्रशासकों के लिए विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण हैं; शैक्षणिक सत्यनिष्ठा, नागरिक सहभागिता कार्यक्रम और लोक प्रशासन प्रशिक्षण में नीतिशास्त्र पाठ्यक्रम भावी सिविल सेवकों की नैतिक दिशा को आकार देते हैं।

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    सिविल सेवा प्रशिक्षण में लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी औपचारिक नीतिशास्त्र शिक्षा को व्यावहारिक क्षेत्र-अनुभव से जोड़ती है। मूल पाठ्यक्रम में भारत-दर्शन के माध्यम से ग्रामीण संपर्क, समाज-सुधारकों से संवाद और केस-स्टडी आधारित नीतिशास्त्र प्रशिक्षण शामिल है। इस प्रकार प्रवेश स्तर पर ही मूल्य-संस्कार को संस्थागत रूप दिया जाता है।

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    NEP 2020 का मूल्य ढाँचा: (i) संवैधानिक मूल्य; (ii) भारतीय सांस्कृतिक मूल्य; (iii) पर्यावरण नीतिशास्त्र; (iv) वैश्विक नागरिकता।

संभावित RAS प्रश्न

PYQ रुझान और 2026 पाठ्यक्रम विश्लेषण पर आधारित

1 5M नैतिक मूल्यों के संस्कार में परिवार की भूमिका का वर्णन कीजिए। 5 अंक · 50 शब्द

आदर्श उत्तर

परिवार मूल्यों की प्राथमिक पाठशाला है — बच्चे औपचारिक शिक्षा से पहले ही माता-पिता के अनुकरण से ईमानदारी, करुणा सीखते हैं। तरीके: (1) अनुकरण — बच्चे माता-पिता का व्यवहार नकलते हैं; (2) नैतिक कथाएँ (पंचतंत्र, महाकाव्य); (3) अनुष्ठान — सद्गुण की आदत; (4) स्नेहपूर्ण अनुशासन — परिणाम सिखाता है। प्राथमिक समाजीकरण के मूल्य सबसे स्थायी होते हैं।

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