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समाज, प्रबंधन एवं लेखाशास्त्र

प्रबंधन की अवधारणा एवं प्रकृति

सामान्य प्रबंधन: अवधारणा, कौशल, स्तर, कार्य, लक्ष्य-आधारित प्रबंधन, निर्णय-निर्माण

पेपर I · इकाई 3 अनुभाग 3 / 11 PYQ-शैली 22 मिनट

सार्वजनिक अनुभाग पूर्वावलोकन

प्रबंधन की अवधारणा एवं प्रकृति

2.1 परिभाषाएँ

Koontz और O'Donnell: "प्रबंधन, औपचारिक रूप से समूहों में संगठित लोगों के माध्यम से और उनके साथ कार्य करवाने की प्रक्रिया है।"

हेनरी फेयोल: "प्रबंध करने का अर्थ है — पूर्वानुमान लगाना और योजना बनाना, संगठित करना, आदेश देना, समन्वय करना और नियंत्रण करना।"

Mary Parker Follett: "प्रबंधन लोगों के माध्यम से कार्य करवाने की कला है।"

पीटर ड्रकर: "प्रबंधन संस्थाओं का अंग है, वह अंग जो भीड़ को संगठन में और मानवीय प्रयासों को निष्पादन में परिवर्तित करता है।"

2.2 प्रबंधन की प्रकृति एवं विशेषताएँ

विशेषता स्पष्टीकरण
लक्ष्योन्मुखी सभी प्रबंधन गतिविधियाँ निर्धारित उद्देश्यों की प्राप्ति का लक्ष्य रखती हैं
सार्वभौमिक प्रबंधन सिद्धांत सभी संगठनों पर लागू होते हैं (व्यापार, सरकार, NGO, अस्पताल, विद्यालय)
निरंतर प्रबंधन एक चल-प्रक्रिया है — एक बार की गतिविधि नहीं
गतिशील प्रबंधन बदलते आंतरिक और बाह्य वातावरण के साथ अनुकूलन करता है
सामाजिक प्रक्रिया लोगों के साथ और उनके माध्यम से कार्य करना सम्मिलित है
विज्ञान और कला व्यवस्थित ज्ञान का समूह (विज्ञान); रचनात्मक अनुप्रयोग और निर्णय की आवश्यकता (कला)
व्यवसाय ज्ञान का समूह, औपचारिक प्रशिक्षण, नैतिक मानक हैं — लेकिन पूर्णतः व्यवसाय है या नहीं, इस पर बहस है
बहु-अनुशासनात्मक अर्थशास्त्र, मनोविज्ञान, समाजशास्त्र, गणित, राजनीतिशास्त्र से ग्रहण करता है

2.3 दक्षता बनाम प्रभावशीलता

अवधारणा अर्थ केंद्र बिंदु
दक्षता कार्य को सही तरीके से करना — दिए गए उत्पादन के लिए न्यूनतम निवेश साधन (निवेश-उत्पादन अनुपात)
प्रभावशीलता सही कार्य करना — अभीष्ट परिणाम प्राप्त करना उद्देश्य (लक्ष्य प्राप्ति)

अच्छे प्रबंधन के लिए दोनों आवश्यक हैं — पीटर ड्रकर का प्रसिद्ध कथन: "दक्षता कार्य को सही तरीके से करना है; प्रभावशीलता सही कार्य करना है।"