सार्वजनिक अनुभाग पूर्वावलोकन
मुख्य बिंदु
- फासीवाद — इटली में जन्म (1919)
- बेनिटो मुसोलिनी ने 1919 में फासी दि कॉम्बैटिमेंटो (लड़ाकू लीग) की स्थापना की
- नाम फासेस से लिया गया — छड़ियों का बंडल, प्राचीन रोमन शक्ति-प्रतीक
- मुसोलिनी 28 अक्टूबर 1922 को रोम पर मार्च के बाद इटली के प्रधानमंत्री बने
- राजा विक्टर इमैनुएल III ने गृहयुद्ध के जोखिम के बजाय झुकना स्वीकार किया
- हिटलर का प्रारंभिक कैरियर और NSDAP
- एडोल्फ हिटलर (1889–1945) 1919 में जर्मन वर्कर्स पार्टी में शामिल हुए
- 1920 में इसका नाम बदलकर नेशनल सोशलिस्ट जर्मन वर्कर्स पार्टी (NSDAP/नाज़ी पार्टी) रखा
- म्यूनिख बियर हॉल पुट्श (8–9 नवम्बर 1923) का प्रयास किया — असफल, जेल भेजे गए
- जेल में मेन कैम्पफ (1925) लिखी — आत्मकथात्मक घोषणापत्र जिसमें नस्लीय विचारधारा प्रस्तुत की
- वर्साय की संधि (1919) — प्रमुख शिकायत
- "युद्ध-अपराध" खंड (अनुच्छेद 231) और 132 अरब गोल्ड मार्क का हर्जाना थोपा
- जर्मनी ने अपना 13% क्षेत्र खोया (अल्सेस-लोरेन; राइनलैंड असैनिकीकृत)
- सेना घटाकर 1,00,000 की गई; सभी उपनिवेश छीन लिए गए
- जर्मनों ने इसे डिक्टाट (थोपी गई शांति) कहा — अपमान जिसने उग्र राष्ट्रवाद को हवा दी
- महामंदी (1929–33) — आर्थिक उत्प्रेरक
- जनवरी 1932 तक जर्मनी में बेरोज़गारी 60 लाख (श्रमबल का 30%) तक पहुँच गई
- अति-मुद्रास्फीति पहले ही बचत को तबाह कर चुकी थी — 1923 में एक अमेरिकी डॉलर = 4.2 खरब मार्क
- आर्थिक तबाही ने वाइमर गणराज्य में विश्वास नष्ट कर दिया
- हताश मतदाता हिटलर के राष्ट्रीय पुनर्जागरण के वादों की ओर मुड़े
- नाज़ी विचारधारा — छह स्तंभ
- नस्लीय श्रेष्ठता: आर्यन मास्टर रेस बनाम यहूदी, स्लाव, रोमा — "उप-मानव" (उंटरमेन्शेन)
- यहूदी-विरोध और साम्यवाद-विरोध — मूल घृणाएँ
- उग्र राष्ट्रवाद और फोल्क्सगेमाइनशाफ़्ट (जनसमुदाय)
- फ्यूहरर प्रिंज़िप — नेता सिद्धांत: हिटलर के प्रति पूर्ण आज्ञाकारिता
- लेबेंसराउम — जीवन-स्थान: "निम्न" स्लावों की कीमत पर पूर्वी दिशा में जर्मन विस्तार
- हिटलर का वैध सत्ता-ग्रहण (1933–34)
- 30 जनवरी 1933 को चांसलर नियुक्त — रूढ़िवादियों ने सोचा था कि वे उसे नियंत्रित कर लेंगे
- रैखस्टाग अग्निकांड (27 फरवरी 1933) — साम्यवादियों पर आरोप; नागरिक स्वतंत्रताएँ डिक्री द्वारा निलंबित
- सक्षम अधिनियम (23 मार्च 1933) ने हिटलर को 4 वर्षों के लिए तानाशाही शक्ति दी — मत 444 बनाम 84
- हिंडनबर्ग की मृत्यु (अगस्त 1934) के बाद हिटलर ने दोनों पदों को मिलाकर फ्यूहरर उन्ड राइखस्कांज़लर बनाया
- होलोकॉस्ट (शोआह) — सुनियोजित नरसंहार
- नाज़ी जर्मनी ने लगभग 60 लाख यहूदियों (यूरोपीय यहूदियों के दो-तिहाई) की हत्या की
- इसके अलावा 50–60 लाख अन्य: रोमा, विकलांग, सोवियत POW, पोलिश नागरिक, समलैंगिक
- स्थल: विनाश शिविर — ऑशविट्ज़, ट्रेब्लिंका, सोबिबोर, बेलज़ेक — कब्जे वाले पोलैंड में
- नूर्नबर्ग कानून (1935) ने पहले यहूदियों की नागरिकता छीनी; वान्नसी सम्मेलन (1942) ने "अंतिम समाधान" का समन्वय किया
- मुसोलिनी के अधीन इतालवी फासीवाद (इल दूचे)
- राज्य, कर्म और हिंसा का महिमामंडन; लोकतंत्र और साम्यवाद दोनों का निषेध
- आक्रामक राष्ट्रवाद और साम्राज्यिक विस्तार — इथियोपिया पर आक्रमण (1935)
- भूमध्यसागर पर प्रभुत्व वाले नए रोमन साम्राज्य का मिथक
- मुसोलिनी ने स्वयं "फासीवाद" शब्द और पूँजीवाद व साम्यवाद के बीच "तीसरा मार्ग" गढ़ा
- वाइमर गणराज्य (1919–33) — कमज़ोर किया गया लोकतंत्र
- जर्मनी का पहला लोकतांत्रिक प्रयोग — पराजय में जन्मा, राष्ट्रीय अपमान से जुड़ा
- "पीठ में छुरा" मिथक (डोल्खश्टोस्लेगेंडे) ने WWI पराजय का दोष यहूदी समाजवादियों पर डाला
- अति-मुद्रास्फीति (1923) और महामंदी (1929–33) झेले, परन्तु सेना, न्यायपालिका और रूढ़िवादी अभिजात-वर्ग ने इसे कभी स्वीकार नहीं किया
- उन्हीं रूढ़िवादी अभिजातों ने अंततः सत्ता हिटलर को सौंप दी — एक घातक भूल
- लंबे चाकुओं की रात और क्रिस्टालनाख्ट
- लंबे चाकुओं की रात (30 जून 1934): हिटलर ने सेना को प्रसन्न करने के लिए SA नेता अर्न्स्ट रोहम और 200+ की हत्या करवाई
- इसने हिटलर की आंतरिक शक्ति को सुदृढ़ किया और SA पर SS को वरीयता दी
- क्रिस्टालनाख्ट (9–10 नवम्बर 1938): नाज़ी पोग्रोम — 7,500 दुकानें तोड़ी गईं, 1,400 आराधनालय जलाए गए, 30,000 यहूदी गिरफ़्तार
- क्रिस्टालनाख्ट नरसंहार की ओर निर्णायक मोड़-बिंदु था
- धुरी गठबंधन और WWII का मार्ग
- इटली और जर्मनी ने रोम-बर्लिन धुरी (अक्टूबर 1936) बनाई; जापान त्रिपक्षीय संधि (सितम्बर 1940) से जुड़ा
- हिटलर के क्षेत्रीय विलय: ऑस्ट्रिया/आंश्लुस (मार्च 1938) और चेकोस्लोवाकिया (1938–39)
- पोलैंड पर आक्रमण (1 सितम्बर 1939) ने WWII को भड़का दिया
- इस आक्रामक धुरी गठबंधन ने वैश्विक युद्ध को अपरिहार्य बना दिया
