मुख्य बिंदु

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    सिंधु घाटी सभ्यता (लगभग 2600–1900 ई.पू.)

    • भारत की प्रारंभिक नगरीय कला का उद्गम
    • मोहनजोदड़ो की "नृत्यांगना" कांस्य मूर्ति — खोया-मोम तकनीक से निर्मित
    • "पुरोहित-राजा" की स्टेटाइट मूर्ति — 17.5 सेमी, त्रिपत्र अलंकृत वस्त्र
    • हड़प्पा की ज्यामितीय चित्रित मिट्टी के बर्तन — सर्वाधिक संख्या में प्राप्त
    • 4,500 साल पुरानी परिष्कृत शिल्प परंपरा के प्रमाण
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    मौर्य कला (322–185 ई.पू.)

    • एकाश्म अशोक स्तंभ — 12–15 मीटर ऊँचे, घंटाकार शीर्ष
    • सारनाथ का सिंह शीर्ष (लगभग 250 ई.पू.) — अब भारत का राष्ट्रीय प्रतीक
    • "मौर्य पॉलिश" — रेत से पत्थर पर दर्पण जैसी चमक
    • बराबर पहाड़ियों (बिहार) में शैल-कट गुहा स्थापत्य (आजीविक भिक्षुओं को अर्पित)
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    गुप्त काल (320–550 ई.) — "स्वर्ण युग"

    • शास्त्रीय संस्कृत साहित्य का शिखर: कालिदास का अभिज्ञानशाकुन्तलम्, रघुवंश, मेघदूत
    • विशाखदत्त का मुद्राराक्षस — चंद्रगुप्त के उत्थान का राजनीतिक नाटक
    • अजंता चित्रकला का उत्कर्ष (गुफा 1: बोधिसत्त्व पद्मपाणि, लगभग 475 ई.)
    • नागर मंदिर शैली का स्थायित्व — देवगढ़ का दशावतार मंदिर (लगभग 500 ई.)
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    दो शास्त्रीय मंदिर शैलियाँ

    • नागर (उत्तर भारत) — वक्र शिखर; जैसे कंदारिया महादेव, खजुराहो (1025 ई.)
    • द्रविड़ (दक्षिण भारत) — पिरामिडनुमा विमान-गोपुरम; जैसे बृहदेश्वर मंदिर, तंजावुर (1010 ई.)
    • दक्कन में संकर वेसर शैली — चालुक्य, होयसल
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    बौद्ध कला — तीन चरण

    • प्रारंभिक अनिकोनिक: बुद्ध का चरण-चिह्न, छत्र, बोधि वृक्ष — सांची स्तूप, तीसरी शती ई.पू.
    • संक्रमणकालीन: ग्रीको-रोमन प्रभाव वाला गांधार स्कूल, 1–3 शती ई.
    • प्रतिमामूलक: शुद्ध भारतीय मथुरा स्कूल, लाल बलुआ पत्थर
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    अजंता गुफाएँ (2री शती ई.पू.–7वीं शती ई.)

    • औरंगाबाद (महाराष्ट्र) में 30 शैलकृत बौद्ध गुफा मंदिर
    • खनिज रंजकों से सूखे प्लास्टर पर जातक कथाओं के भित्तिचित्र
    • 1983 में UNESCO विश्व धरोहर स्थल घोषित
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    मुगल स्थापत्य (1526–1857)

    • फारसी, मध्य एशियाई और भारतीय शैलियों का संश्लेषण
    • हुमायूँ का मकबरा, दिल्ली (1572) — भारत का प्रथम बाग-मकबरा
    • ताजमहल, आगरा (1653) — शाहजहाँ ने मुमताज महल की स्मृति में बनवाया; UNESCO 1983
    • लाल किला, दिल्ली (1648); फतेहपुर सीकरी (1585, 14 वर्षों तक अकबर की राजधानी)
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    8 शास्त्रीय नृत्य शैलियाँ (संगीत नाटक अकादमी)

    • भरतनाट्यम (तमिलनाडु), कथक (उत्तर भारत), ओडिसी (ओडिशा), कुचिपुड़ी (आंध्र प्रदेश)
    • मणिपुरी (मणिपुर), मोहिनीअट्टम (केरल), सत्त्रिया (असम), कथकली (केरल)
    • सभी नाट्यशास्त्र (भरत मुनि, 2री ई.पू.–2री ई.) पर आधारित
    • नाट्यशास्त्र में नव रस संहिताबद्ध — प्रदर्शन कला के 9 भावनात्मक सार
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    संगम साहित्य (लगभग 3री शती ई.पू.–3री शती ई.)

    • तमिल में भारत का सबसे प्राचीन धर्मनिरपेक्ष साहित्य
    • आठ संकलन (एट्टुतोकई) — प्रेम काव्य (अकम): भू-दृश्य आधारित तिनई वर्गीकरण
    • दस इडिल्स (पट्टुप्पाट्टु) — वीर काव्य (पुरम): युद्ध, मृत्यु, राजत्व
    • तोलकाप्पियम (लगभग 3री ई.पू.) — किसी भी भारतीय भाषा का सबसे प्राचीन व्याकरण
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    हिंदुस्तानी और कर्नाटक संगीत

    • दो शास्त्रीय परंपराएँ — दोनों प्राचीन राग-ताल प्रणाली पर आधारित
    • हिंदुस्तानी: 13वीं शती के बाद फारसी-भारतीय संश्लेषण; अमीर खुसरो को ख्याल, तबला, सितार का श्रेय
    • कर्नाटक: वैदिक जड़ों के करीब; "त्रिमूर्ति" द्वारा संहिताबद्ध — त्यागराज, मुथुस्वामी दीक्षितर, श्यामा शास्त्री (18वीं–19वीं शती)
    • प्रमुख हिंदुस्तानी घराने: आगरा, ग्वालियर, जयपुर, किराना, पटियाला
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    औपनिवेशिक काल का साहित्य

    • बंगाली पुनर्जागरण: बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय — आनंदमठ (1882), "वंदे मातरम" का स्रोत
    • रवींद्रनाथ टैगोर — गीतांजलि के लिए 1913 में नोबेल पुरस्कार; प्रथम एशियाई नोबेल विजेता
    • टैगोर ने जन गण मन (राष्ट्रगान) और आमार सोनार बांग्ला (बांग्लादेश का राष्ट्रगान) भी लिखे
    • उर्दू साहित्य: मिर्जा गालिब (1797–1869) और अल्लामा इकबाल (1877–1938)
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    भक्ति साहित्य परंपरा (12वीं–17वीं शती)

    • सारे भारत में लोकभाषा साहित्य — भक्ति को लोकतांत्रिक बनाया
    • प्रमुख कवि: मीराबाई (राजस्थानी), कबीर (हिंदी/अवधी), सूरदास (ब्रजभाषा), तुलसीदास (रामचरितमानस, 1574–77, अवधी)
    • दक्षिण: नामदेव एवं तुकाराम (मराठी), पुरंदरदास (कन्नड़), आलवारों का नालयिर दिव्य प्रबंधम (तमिल)
    • लोकभाषा भक्ति अभिव्यक्ति के माध्यम से जातिगत पदानुक्रम को चुनौती दी
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    इंडो-इस्लामी स्थापत्य

    • प्रमुख नवाचार: नुकीले मेहराब, सच्चे मेहराब (कोर्बेलिंग की जगह), वास्तविक गुंबद, मीनारें
    • चूना-प्लास्टर का व्यापक उपयोग — भारतीय निर्माण शैली में संरचनात्मक क्रांति
    • कुतुब मीनार परिसर (1193 ई., दिल्ली सल्तनत) से लोदी मकबरों तक विकास
    • 16वीं–17वीं शती की मुगल उत्कृष्टताओं में परिणति

संभावित RAS प्रश्न

PYQ रुझान और 2026 पाठ्यक्रम विश्लेषण पर आधारित

1 5M सारनाथ सिंह-शीर्ष पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए और इसके महत्व को बताइए। 5 अंक · 50 शब्द

आदर्श उत्तर

सारनाथ सिंह स्तंभ शीर्ष (लगभग 250 ई.पू.), अशोक के शासनकाल में निर्मित, में चुनार बलुआ पत्थर पर "मौर्य पॉलिश" तकनीक से घड़े चार पीठ-से-पीठ जुड़े सिंह हैं, जो घंटाकार आधार पर बने हैं। इस आधार पर चार पशु और एक धम्म चक्र उत्कीर्ण हैं। यह शीर्ष साम्राज्यिक धर्म और अखिल-भारतीय संप्रभुता का प्रतीक था। भारत ने 1950 में इसे राष्ट्रीय प्रतीक के रूप में अपनाया। इसके आधार का धम्म चक्र भारत के राष्ट्रीय ध्वज पर अंकित है।

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