8. जनजातियाँ एवं उनकी परंपराएँ — पूर्ण नोट्स
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मूल मुख्य बिंदु
- 1
- अनुसूचित जनजातियाँ राजस्थान की जनसंख्या का 13.48% हैं
- जनगणना 2011: 92.38 लाख व्यक्ति
- संख्या के आधार पर राजस्थान सभी राज्यों में 6वें स्थान पर है
- 2
- भील राजस्थान की सबसे बड़ी जनजाति है — राज्य की ST जनसंख्या का 39%
- भील क्षेत्र: बाँसवाड़ा, डूँगरपुर, उदयपुर में केंद्रित
- मीणा दूसरी सबसे बड़ी जनजाति (26%) — पूर्वी राजस्थान में
- 3
- सहरिया (बारां जिला) राजस्थान की एकमात्र PVTG है
- राष्ट्रीय स्तर पर 75 PVTGs में से एक
- पूर्व-कृषि अर्थव्यवस्था, कम साक्षरता और ठहरी जनसंख्या इसकी विशेषताएँ हैं
- 4
- बेणेश्वर मेला माघ पूर्णिमा (जनवरी–फरवरी), डूँगरपुर में लगता है
- राजस्थान का सबसे बड़ा जनजातीय मेला — 3–5 लाख भील और गरासिया भाग लेते हैं
- सोम, माही और जाखम नदियों के संगम पर — इसे "आदिवासी कुम्भ" कहते हैं
- 5
- नाता प्रथा भील व मीणा जनजातियों में प्रचलित पुनर्विवाह/विवाह-विच्छेद की परम्परा है
- महिला "नाता मूल्य" चुकाकर दूसरे पुरुष के साथ रह सकती है
- सामुदायिक बैठक में घोषणा होती है; नाता संतान वैध मानी जाती है
- 6
- दापा प्रथा भील जनजाति में प्रचलित वधू-मूल्य की परम्परा है
- वर-पक्ष वधू-पक्ष को धनराशि देता है — मुख्यधारा दहेज के विपरीत
- गरासिया जनजाति में भी प्रचलित है
- 7
- गवरी भील जनजाति का वार्षिक लोक नाट्य है — 40 दिनों तक (अगस्त–सितंबर) प्रस्तुत
- रक्षाबंधन के बाद शिव पुराण के प्रसंग अभिनीत किए जाते हैं
- अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की उम्मीदवार घोषित है
- 8
- अनुच्छेद 342 राष्ट्रपति को अनुसूचित जनजातियों की अधिसूचना का अधिकार देता है
- पाँचवीं अनुसूची जनजाति सलाहकार परिषद (TAC) और अनुसूचित क्षेत्रों का प्रावधान करती है
- PESA अधिनियम 1996 अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को शक्तियाँ प्रदान करता है
- 9
- वन भूमि पर काबिज जनजातियों को व्यक्तिगत एवं सामुदायिक वन अधिकार प्रदान करता है
- कट-ऑफ तारीख: 13 दिसंबर 2005 से पहले का कब्जा
- IFR: प्रति परिवार 4 हेक्टेयर तक
- 10
- जनजाति उपयोजना (TSP) को अब अनुसूचित जनजाति घटक (STC) कहते हैं
- सामान्य क्षेत्रों से ST जनसंख्या के अनुपात में धनराशि अनिवार्य
- 2024–25 में राजस्थान का TSP आवंटन: लगभग ₹18,000 करोड़
- 11
- गरासिया जनजाति की छोड़ प्रथा (पत्नी-छोड़ रिवाज) और मोरम प्रथा (परीक्षण विवाह) विशिष्ट हैं
- जनगणना 2011: राजस्थान में लगभग 3.09 लाख गरासिया
- सिरोही, आबू रोड, पाली और उदयपुर में केंद्रित
- 12
- TRIFED (स्थापना 1987) आदिवासी आर्थिक सशक्तीकरण की मुख्य संस्थागत व्यवस्था है
- वन धन विकास केंद्र (VDVKs) 2018–19 में लघु वन उपज विपणन के लिए शुरू हुए
- राजस्थान में मार्च 2025 तक 88 VDVKs संचालित हैं
- 13
- बिश्नोई समुदाय (OBC, ST नहीं) 1730 ई. से खेजड़ी वृक्ष और वन्यजीव संरक्षण का प्रतीक है
- 363 बिश्नोई शहीदों का बलिदान (जोधपुर, 1730) विश्व का पहला संगठित पर्यावरण आंदोलन है
- राजस्थान में जनजाति-पर्यावरण संबंध के लिए प्रासंगिक
- 14
- राजस्थान में बाँसवाड़ा और डूँगरपुर पूर्ण अनुसूचित क्षेत्र हैं
- उदयपुर, सिरोही, राजसमंद, प्रतापगढ़ और बारां में पाँचवीं अनुसूची के तहत आंशिक अनुसूचित क्षेत्र
- सभी अनुसूचित क्षेत्रों में PESA प्रावधान लागू होते हैं
संभावित संभावित RAS प्रश्न
PYQ रुझान और 2026 पाठ्यक्रम विश्लेषण पर आधारित
1 5M भील जनजाति पर एक टिप्पणी लिखिए — उनकी जनसंख्या, वितरण और विशिष्ट परम्पराएँ।
आदर्श उत्तर
भील राजस्थान की सबसे बड़ी अनुसूचित जनजाति है जो राज्य की ST जनसंख्या का 39% है (जनगणना 2011)। बाँसवाड़ा, डूंगरपुर, उदयपुर और राजसमंद में केंद्रित ये राजस्थान के मूल वन-निवासी समुदाय हैं। प्रमुख परम्पराएँ: दापा प्रथा (वधू-मूल्य), नाता प्रथा (रीति पुनर्विवाह), गवरी (रक्षाबंधन के बाद 40 दिन शिव लोक-नाट्य), और गैर (होली पर डंडा नृत्य)। राणा पूंजा के नेतृत्व में भील सेना ने हल्दीघाटी (1576 ई.) में महाराणा प्रताप का साथ दिया।
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