7. मेले एवं त्योहार
Fairs and Festivalsमूल मुख्य बिंदु
- 1
- राजस्थान में प्रतिवर्ष 1,000 से अधिक मेले आयोजित होते हैं
- इन्हें धार्मिक, जनजातीय, पशु और मौसमी — चार श्रेणियों में विभाजित किया जाता है
- 2
- पुष्कर मेला विश्व का सबसे बड़ा ऊँट मेला है, जो प्रतिवर्ष कार्तिक में 5 दिनों तक लगता है
- 2019 में 20,000 से अधिक पशुओं का व्यापार हुआ
- UNESCO अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची के लिए दावेदार
- 3
- गणगौर राजस्थान का सर्वप्रमुख महिला पर्व है
- होली से चैत्र शुक्ल तृतीया तक 18 दिन मनाया जाता है
- इस स्वरूप में यह पर्व अन्य किसी भारतीय राज्य में नहीं मनाया जाता
- 4
- बेणेश्वर मेला राजस्थान का सबसे बड़ा जनजातीय मेला है
- डूंगरपुर में तीन नदियों के संगम पर माघ में लगता है
- इसे "जनजातियों का कुंभ" कहते हैं; 4–5 लाख भील आदिवासी सम्मिलित होते हैं
- 5
- रामदेवरा मेला जैसलमेर में भाद्र शुक्ल 2–11 को रामदेवजी की समाधि पर लगता है
- रामदेवजी को हिंदू "राम पीर" और मुस्लिम "रामसा पीर" दोनों मानते हैं
- यह हिंदू-मुस्लिम सांप्रदायिक सद्भाव का प्रमुख प्रतीक है
- 6
- नागौर मेला एशिया का दूसरा सबसे बड़ा पशु मेला है, जो माघ में 4 दिनों तक चलता है
- बैल, घोड़े, ऊँट के साथ-साथ पीतल के बर्तन और वस्त्र व्यापार के लिए भी प्रसिद्ध
- राज्य स्तरीय मेले का सरकारी दर्जा प्राप्त
- 7
- अजमेर उर्स ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती (मृत्यु 1236 ई.) की पुण्य-तिथि पर रज्जब माह में 6 दिनों तक मनाया जाता है
- 810वें उर्स (2026) में 3–4 लाख श्रद्धालु, अंतरराष्ट्रीय सूफी भक्त सम्मिलित
- प्रधानमंत्री परम्परागत रूप से राष्ट्रीय चादर भेजते हैं
- 8
- तीज श्रावण शुक्ल तृतीया को मानसूनी उत्सव के रूप में मनाई जाती है
- जयपुर में 1778 ई. में महाराजा सवाई प्रताप सिंह द्वारा तीज जुलूस की परम्परा प्रारम्भ की गई
- RTDC द्वारा राज्य स्तरीय धरोहर आयोजन के रूप में प्रमोट किया जाता है
- 9
- गोगामेडी मेला हनुमानगढ़ में भाद्र शुक्ल नवमी को लगता है
- उत्तरी राजस्थान का सबसे बड़ा मेला; प्रतिवर्ष 5–6 लाख श्रद्धालु
- गोगाजी रामदेवजी के बाद राजस्थान के सर्वाधिक पूजित लोकदेवता हैं
- 10
- कैला देवी मेला करौली में चैत्र में त्रिकूट पहाड़ियों पर लगता है
- राजस्थान, MP और UP से 15–20 लाख श्रद्धालु आते हैं
- उपस्थिति के हिसाब से राजस्थान का सबसे बड़ा मेला
- 11
- मकर संक्रांति 14 जनवरी को राजस्थान का पतंगबाजी पर्व है
- जयपुर का अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव 1989 से आयोजित हो रहा है
- राजस्थान भारत के कुल पतंग उत्पादन का 25–30% हिस्सा तैयार करता है
- 12
- तिलवाड़ा मेला बाड़मेर में लूनी नदी तट पर माघ में लगता है
- राजस्थान का तीसरा सबसे बड़ा पशु मेला; मलिनाथ नस्ल के पशुओं के लिए प्रसिद्ध
- इसी स्थान पर मध्यपाषाण काल का पुरातात्विक स्थल भी है (देखें विषय #1)
- 13
- राजस्थान मेला एवं उत्सव नीति 2015 के अंतर्गत मेलों को राष्ट्रीय, राज्य, जिला और स्थानीय स्तर में वर्गीकृत किया गया
- पर्यटन विभाग अंतरराष्ट्रीय प्रमोशन के लिए 5 "सिग्नेचर इवेंट" आयोजित करता है
- इनमें पुष्कर मेला और जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल सम्मिलित हैं
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संभावित संभावित RAS प्रश्न
PYQ रुझान और 2026 पाठ्यक्रम विश्लेषण पर आधारित
1 5M पुष्कर मेले का वर्णन कीजिए और एक सांस्कृतिक एवं धार्मिक आयोजन के रूप में इसके महत्त्व की व्याख्या कीजिए।
आदर्श उत्तर
पुष्कर मेला (अजमेर) विश्व का सबसे बड़ा ऊँट मेला है, जो प्रतिवर्ष कार्तिक पूर्णिमा के आसपास पाँच दिनों तक लगता है। 2019 में 20,000 से अधिक पशुओं का व्यापार हुआ। धार्मिक रूप से यह पुष्कर सरोवर (ब्रह्माजी का एकमात्र मंदिर) में कार्तिक पूर्णिमा स्नान के साथ संपन्न होता है। पशु व्यापार, लोक प्रदर्शन और धार्मिक तीर्थयात्रा का यह संगम राजस्थान का सर्वाधिक अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल है।
~50 words • 5 marks
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