6. लोक संगीत, लोक नृत्य, लोक कथाएँ, लोकगाथाएँ — पूर्ण नोट्स
Folk Music, Folk Dances, Folk Stories, Folk Loresपूरा पढ़ने के लिए मुफ़्त में साइन अप करें
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मूल मुख्य बिंदु
- 1
- राजस्थान का कालबेलिया नृत्य 2010 में यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में अंकित हुआ
- यह केवल कालबेलिया (सपेरा) समुदाय की महिलाओं द्वारा प्रस्तुत किया जाता है
- किसी अन्य समुदाय द्वारा यह नृत्य नहीं किया जाता
- 2
- रावणहत्था एक दो-तारी वाद्य है जो 5,000+ वर्ष प्राचीन माना जाता है
- परम्परागत रूप से भोपा समुदाय द्वारा पाबूजी की फड़ गाथा के साथ बजाया जाता है
- इसमें नारियल के खोल का अनुनादक और घोड़े के बालों का धनुष होता है
- 3
- पश्चिमी राजस्थान के लंगा और मांगणियार समुदाय वंशानुगत पेशेवर संगीतकार रहे हैं
- 400 वर्षों से अधिक समय से राजपूत और मुस्लिम भूस्वामियों के आश्रित रहे हैं
- बैठक परम्परा में प्रस्तुति देते हैं
- 4
- माण्ड राजस्थान का शास्त्रीय-लोक राग है जो जयपुर और बीकानेर की माण्ड गायिकाओं से जुड़ा है
- "केसरिया बालम" सर्वाधिक प्रतीकात्मक माण्ड रचना है
- यह राजस्थान का अनौपचारिक सांस्कृतिक गान माना जाता है
- 5
- घूमर राजस्थान का राज्य लोक नृत्य है जिसे सभी जातियों की महिलाएँ शुभ अवसरों पर करती हैं
- 'घूमना' (वृत्तीय चक्कर) और ओढ़नी संचालन इसकी पहचान है
- 2023 में राजस्थान सरकार ने इसे आधिकारिक राज्य नृत्य घोषित किया
- 6
- राजस्थान में पाँच लोकदेवता महाकाव्य परम्पराएँ हैं — पाबूजी, देवनारायण, रामदेवजी, गोगाजी और तेजाजी
- प्रत्येक की अपनी प्रस्तुत समुदाय, वाद्य और क्षेत्रीय आधार है
- ये राजस्थान की जीवित मौखिक विरासत हैं
- 7
- देवनारायण महाकाव्य 10 लाख से अधिक शब्दों के साथ विश्व की सक्रिय प्रस्तुत परम्पराओं में सबसे लंबे मौखिक महाकाव्यों में से एक है
- भोपा-भोपी जोड़ी जंतर और फड़ के साथ प्रस्तुत करती है
- 2013 में यूनेस्को की अमूर्त विरासत सूची में सम्मिलित किया गया
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- कमायचा 12 तारों का स्पाइक लूट है जो विशेष रूप से मांगणियार संगीतकारों द्वारा बजाया जाता है
- सकार खान मांगणियार को 2012 में पद्म श्री मिला
- 2025 तक केवल 15 से कम सक्रिय उस्ताद वादक शेष हैं
- 9
- किशनगढ़ (अजमेर) का चारी नृत्य गुर्जर समुदाय की महिलाओं द्वारा प्रस्तुत किया जाता है
- सिर पर जलते मिट्टी के घड़े (चारी) संतुलित करते हुए नृत्य किया जाता है
- किशनगढ़ तहसील की GI-टैग लोक परम्परा के रूप में मान्यता प्राप्त
- 10
- तेरहताली नृत्य कामड़ समुदाय (नागौर और पाली) की महिलाओं द्वारा प्रस्तुत किया जाता है
- शरीर पर बँधी 13 मंजीरों के साथ — 9 दाएँ घुटने पर, 2 बाएँ पर, 1 प्रत्येक हाथ पर
- रामदेवजी के भजन गाते हुए प्रस्तुत किया जाता है
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- अलगोजा एक दोहरी बाँसुरी है जो एक साथ नाक और मुँह से बजाई जाती है
- बाँसवाड़ा, डूँगरपुर और प्रतापगढ़ के भील और मेघवाल समुदायों से जुड़ी है
- भील जनजाति संगीत का अभिन्न अंग है
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- मोरचंग लोहे या काँसे की जबड़े की वीणा है जो मांगणियार और जोगी संगीत में प्रयुक्त होती है
- राजस्थान भारत में मोरचंग वादन का प्रमुख केंद्र है
- बाड़मेर मोरचंग महोत्सव (2017 से वार्षिक) इसे वैश्विक दर्शकों तक पहुँचाता है
- 13
- राजस्थान घूमर महोत्सव 2025 नवम्बर 2025 में राज्य के सभी 7 संभागीय मुख्यालयों पर एक साथ आयोजित हुआ
- जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, कोटा, अजमेर, भरतपुर, बीकानेर में एक साथ आयोजन हुआ
- यह राज्य सरकार की लोक कला संवर्धन पहल का हिस्सा था
संभावित संभावित RAS प्रश्न
PYQ रुझान और 2026 पाठ्यक्रम विश्लेषण पर आधारित
1 5M कालबेलिया नृत्य और उसकी यूनेस्को मान्यता पर एक टिप्पणी लिखिए।
आदर्श उत्तर
कालबेलिया नृत्य 2010 में यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में अंकित हुआ। यह पाली, अजमेर और चित्तौड़गढ़ जिलों की कालबेलिया (सपेरा) समुदाय की महिलाओं द्वारा प्रस्तुत किया जाता है। सर्पिल शरीर-गति, तेज चक्कर और कोबरा की हरकत की नकल इसकी विशेषता है। काले कशीदाकारी घागरे और शीशे के काम वाली पोशाक पहचान है। गुलाबो सपेरा इसकी अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि हैं।
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