4. 19वीं-20वीं शताब्दी: 1857 का विद्रोह, किसान एवं जनजातीय आंदोलन, राजनीतिक जागृति, एकीकरण — पूर्ण नोट्स
19th-20th Century: 1857 Revolt, Peasant and Tribal Movements, Political Awakening, Integrationपूरा पढ़ने के लिए मुफ़्त में साइन अप करें
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मूल मुख्य बिंदु
- 1
राजपूताना में प्रथम सैनिक विद्रोह
- नसीराबाद में: 28 मई 1857
- इसके बाद नीमच: 3 जून 1857
- फिर एरिनपुरा: 21 अगस्त 1857
- कोटा टुकड़ी का विद्रोह: अक्टूबर 1857
- 2
राजपूताना के शासक — अंग्रेजों के प्रति वफादारी
- जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, बीकानेर: 1817–18 की सहायक संधियों के कारण वफादार रहे
- स्वयं की भाड़े की सेनाओं ने विद्रोह किया जबकि शासकों ने दमन में सहयोग दिया
- 3
आऊवा के ठाकुर कुशाल सिंह — 1857 प्रतिरोध
- राजपूताना में एकमात्र महत्त्वपूर्ण सशस्त्र प्रतिरोध का नेतृत्व
- चेतवास का युद्ध: 8 सितम्बर 1857 — विद्रोहियों की विजय
- ब्रिटिश पोलिटिकल एजेंट कैप्टन मेसन मारे गए
- पकड़े जाने के बाद मुकदमा चला, किंतु सबूत न होने से बरी हुए
- 4
बिजोलिया किसान आंदोलन
- अवधि: 1897–1941 — भारत का सबसे लंबा किसान आंदोलन
- स्थान: बिजोलिया जागीर, वर्तमान भीलवाड़ा जिला (मेवाड़)
- विजय सिंह पथिक ने 1916 से 84 अवैध लागतों का दस्तावेजीकरण किया
- तीन चरण: साधु सीताराम दास → विजय सिंह पथिक → मानिक्य लाल वर्मा
- 5
बेगूँ किसान आंदोलन
- अवधि: 1921–23 | स्थान: चित्तौड़गढ़ जिला (मेवाड़)
- नेता: रामनारायण चौधरी (विजय सिंह पथिक नहीं)
- गोमेंडा गोलीकांड: 13 जुलाई 1923 — रूपाजी और कृपाजी शहीद हुए
- 6
गोविंद गुरु और भील आंदोलन
- सम्प सभा की स्थापना: 1883
- बाँसवाड़ा और डूंगरपुर में भील सुधार-प्रतिरोध आंदोलन चलाया
- मानगढ़ पहाड़ी नरसंहार: 17 नवम्बर 1913 — लगभग 1,500 आदिवासी मारे गए
- "आदिवासी जलियाँवाला बाग" कहा जाता है
- 7
मोतीलाल तेजावत और एकी आंदोलन
- प्रारंभ: 1921, उदयपुर, डूंगरपुर और बाँसवाड़ा के भीलों में
- 21 सूत्री घोषणापत्र: माताजी की अरज
- प्रमुख माँगें: बेगार और जंगल-कर की समाप्ति
- 8
प्रजा मंडल
- जयपुर में प्रारंभ: 1931
- 1939 तक 8 रियासतों में फैले
- जमनालाल बजाज ने जयपुर प्रजा मंडल के प्रारंभिक चरण को वित्त पोषित किया
- रियासतों में उत्तरदायी शासन की माँग की
- 9
जयपुर प्रजा मंडल और भारत छोड़ो आंदोलन (1942)
- भारत छोड़ो आंदोलन (अगस्त 1942) के प्रति सतर्क रुख अपनाया
- प्रत्यक्ष कार्रवाई की बजाय उत्तरदायी शासन वार्ता को प्राथमिकता दी
- "जीवन कुटी" रचनात्मक कार्यक्रम शुरू किया
- राष्ट्रवादी नेताओं ने आलोचना की
- 10
राजपूताना का एकीकरण — छह चरण
- 22 देशी रियासतें भारत में एकीकृत: 18 मार्च 1948 – 1 नवम्बर 1956
- चरण 1 (मत्स्य संघ): 18 मार्च 1948
- चरण 4 (वृहत् राजस्थान): 30 मार्च 1949 को उद्घाटन
- 11
सिरोही का विलय — आबू की जटिलता
- सिरोही राजस्थान में विलीन: 26 जनवरी 1950
- आबू और देलवाड़ा तहसीलें बम्बई को दी गईं
- राज्य पुनर्गठन अधिनियम 1956: आबू बम्बई में, शेष सिरोही राजस्थान में
- 12
अजमेर-मेरवाड़ा का विलय — वर्तमान स्वरूप
- स्थिति: मुख्य आयुक्त प्रांत (देशी रियासत नहीं)
- राजस्थान में विलय: 1 नवम्बर 1956, राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 के तहत
- राजस्थान को वर्तमान स्वरूप प्राप्त: 342,239 वर्ग किमी
- 13
हीरालाल शास्त्री और प्रीवी पर्स उन्मूलन
- हीरालाल शास्त्री: राजस्थान के प्रथम मुख्यमंत्री — 7 अप्रैल 1949
- प्रीवी पर्स मूल संविधान के अनुच्छेद 291 के तहत गारंटीकृत
- समाप्त: 26वें संवैधानिक संशोधन, 1971 द्वारा
संभावित संभावित RAS प्रश्न
PYQ रुझान और 2026 पाठ्यक्रम विश्लेषण पर आधारित
1 5M राजपूताना के शासक 1857 के विद्रोह में अंग्रेजों के प्रति वफादार क्यों रहे?
आदर्श उत्तर
राजपूताना के शासकों ने 1817–18 में सहायक संधियाँ की थीं, जिनके तहत उन्होंने सैन्य स्वायत्तता के बदले ब्रिटिश संरक्षण प्राप्त किया। वे किसान-सैनिक गठबंधन से भयभीत थे और उत्तराधिकार की ब्रिटिश गारंटी को महत्त्व देते थे। जयपुर, जोधपुर, उदयपुर और बीकानेर के शासकों ने विद्रोह दमन में सक्रिय सहयोग दिया।
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