मूल तंत्र का आधार: साधन, लागत, धरातल और नोड
परिवहन तंत्र उन लिंक और नोडों का पैटर्न है जिनसे लोग, कच्चा माल, ऊर्जा और तैयार वस्तुएँ चलती हैं। लिंक में समुद्री मार्ग, रेल पटरियाँ, नहर, नदी, वायु गलियारे, सड़क और पाइपलाइन आते हैं; नोड में बंदरगाह, जंक्शन, लॉक, दर्रा, टर्मिनल, औद्योगिक क्षेत्र और बाजार आते हैं। भारी और कम मूल्य वाले माल के लिए जल परिवहन उपयोगी है क्योंकि महासागर में मार्ग निर्माण नहीं करना पड़ता। रेलमार्ग वहाँ भारी अंतर्देशीय माल ढुलाई करते हैं जहाँ सतत पटरी और खिंचाव उपलब्ध हो। वायु परिवहन पर्वत, हिम क्षेत्र और मरुस्थल की बाधा पार करता है, पर अधिक महँगा रहता है। पाइपलाइन द्रव और गैस को बार-बार लदान के बिना ले जाती हैं। इसी ढाँचे से उत्तर अटलांटिक समुद्री मार्ग, स्वेज नहर मार्ग, पनामा नहर मार्ग, रूर से रॉटरडैम तक राइन जलमार्ग, ट्रांस-साइबेरियन रेलमार्ग और कनाडियन पैसिफिक रेलमार्ग समझे जाते हैं। अच्छे तंत्र में विकल्प भी रहता है: स्वेज बाधित हो तो जहाज केप ऑफ गुड होप से जा सकते हैं और यात्री रेल भीड़भाड़ में अलग माल पटरी भारी माल संभाल सकती है। तंत्र की घनता आर्थिक गुरुत्व से भी बनती है: उद्योग दोतरफा माल, कृषि मौसमी भारी माल और ऊर्जा बेसिन सतत प्रवाह देते हैं। राजस्थान में यही तर्क पश्चिमी समर्पित माल गलियारे में दिखता है, जहाँ रेवाड़ी, फुलेरा, अजमेर, मारवाड़ और पालनपुर मिलकर माल धुरी बनाते हैं।
