मूल नील का संगम, डेल्टा और नियंत्रण
श्वेत नील और नीली नील वाला नील नदी तंत्र इस बात का स्पष्ट उदाहरण है कि किसी लंबी नदी की पहचान उसके संगम-भूगोल से बनती है। श्वेत नील अधिक लंबी और अपेक्षाकृत स्थिर स्रोत-रेखा को विक्टोरिया झील क्षेत्र, युगांडा और दक्षिण सूडान से लाता है। नीली नील इथियोपिया के उच्चभूमि क्षेत्र से निकलती है, मौसमी बाढ़ और गाद का बड़ा भाग लाती है और सूडान के खार्तूम में श्वेत नील से मिलती है। इसके बाद संयुक्त नील मिस्र से होकर भूमध्य सागर तक जाती है और डेल्टा बनाती है, जहाँ महीन जलोढ़, सिंचाई और बस्ती लंबे समय से जुड़े रहे हैं। 1970 में पूर्ण हुआ असवान उच्च बांध नासेर झील में जल रोककर बाढ़ नियंत्रण, बारहमासी सिंचाई और जलविद्युत को सहारा देता है। इसी नियंत्रण से नीचे की ओर ताजी गाद का वार्षिक फैलाव घटा, इसलिए नील प्राकृतिक धारा के साथ प्रबंधित जल-अर्थव्यवस्था भी है। विक्टोरिया झील और श्वेत नील स्रोत क्षेत्र यह दिखाते हैं कि झील नदी-तंत्र का भाग हो सकती है, अंतिम मुहाना नहीं। राजस्थान में लूनी अरावली के पास उठती है और कच्छ के रण की ओर मंद पड़ती है; वह नील जैसी आर्द्र जलोढ़ घाटी नहीं बनाती। सांभर झील भी अंतर्देशीय लवणीय बेसिन है, इसलिए वह समुद्र-निकासी वाली नदी से अलग बंद-बेसिन तर्क में आती है।
