मूल वैश्विक पर्यावरण शासन: 1972 से 1992
मानव पर्यावरण पर स्टॉकहोम सम्मेलन 5 जून 1972 को शुरू हुआ और पर्यावरणीय क्षति को केवल स्थानीय असुविधा से निकालकर अंतरराष्ट्रीय शासन का विषय बन गया। इससे स्टॉकहोम घोषणा, मानव पर्यावरण के लिए कार्य-योजना और वह संस्थागत संदर्भ निकला जिससे यूएनईपी बना। 5 जून की तिथि विश्व पर्यावरण दिवस से जुड़ती है, इसलिए यह घटना संधि-क्रम, पर्यावरण चेतना और संस्था-निर्माण तीनों को जोड़ती है। रियो पृथ्वी शिखर सम्मेलन 1992 ने इस ढाँचे को विकास से जोड़ा। रियो डी जेनेरो में सरकारों ने पर्यावरण, विकास, एजेंडा 21, यूएनएफसीसीसी की जलवायु प्रक्रिया और सीबीडी की जैव विविधता प्रक्रिया को साथ रखा। यह क्रम इसलिए महत्त्वपूर्ण है कि वायु प्रदूषण, खतरनाक अपशिष्ट, जैव विविधता क्षरण और जलवायु परिवर्तन अलग-अलग मुद्दे नहीं रहते। राजस्थान में सांभर झील का पर्यावरणीय दबाव इस क्रम को जमीन देता है। यह लवणीय आर्द्रभूमि कोई जलवायु संधि नहीं है, फिर भी पक्षी मृत्यु, जल-दबाव और निकासी का दबाव दिखाते हैं कि वैश्विक सिद्धांतों को स्थानीय प्रवर्तन चाहिए। राज्य संदर्भ में सांभर झील, अरावली और जयपुर का शहरी कचरा इसी शासन-तर्क के राजस्थान उदाहरण हैं। मुख्य विचार पैमाना है। स्टॉकहोम रोकथाम, राज्य उत्तरदायित्व और सहयोग जैसे सिद्धांत देता है; रियो सहयोग को सतत विकास उपकरणों में बदलता है; स्थानीय एजेंसियाँ उन्हीं उपकरणों को अनुमति, मानक और बहाली आदेश में बदलती हैं। इसी से घोषणा जमीनी नियम बनती है। यही क्रम पुरानी और नई समस्याओं को भी अलग करता है: पहले प्रदूषण, स्वच्छता और संसाधन क्षय थे; बाद में जलवायु, जैव विविधता, आनुवंशिक संसाधन, खतरनाक व्यापार और जीवन-शैली जुड़े।
