मूल क्षेत्रीय पहचान के रूप में कृषि प्रणालियां
कृषि का रूप तब बदलता है जब जलवायु, मिट्टी, श्रम, पूंजी और बाजार की दूरी साथ-साथ बदलती हैं। सघन निर्वाह कृषि घनी आबादी वाले मानसूनी क्षेत्रों में मिलती है, जहां धान, गेहूं या मोटे अनाज स्थानीय खाद्य सुरक्षा से जुड़े रहते हैं। वाणिज्यिक अनाज कृषि विस्तृत समशीतोष्ण घासभूमियों में विकसित होती है, जहां खेत बड़े होते हैं और मशीनें बहुत सा श्रम बदल देती हैं। मिश्रित कृषि में फसल, चारा और पशुपालन एक साथ चलते हैं। दुग्ध कृषि शहरों के पास फलती है, क्योंकि दूध को रोज देखभाल, शीतलन और तेज परिवहन चाहिए। भूमध्यसागरीय कृषि में सर्दियों की वर्षा और शुष्क गर्मी जैतून, अंगूर और साइट्रस को अलग पहचान देती है। उष्णकटिबंधीय बागान कृषि चाय, कॉफी, कोको, रबर, ऑयल पाम, गन्ना या केला जैसे एक निर्यात फसल पर केंद्रित रहती है। स्वामित्व और तकनीक भी महत्त्वपूर्ण हैं: निर्वाह खेत छोटे और परिवार-आधारित हो सकते हैं, जबकि वाणिज्यिक कृषि को ऋण, मशीन, भंडारण और परिवहन चाहिए। जलमग्न डेल्टा, सूखी भूमि और बागान क्षेत्रों के जोखिम भी अलग होते हैं। थार शुष्कभूमि कृषि तुलना राजस्थान में बाजरा, ग्वार, मोठ और सरसों को अनिश्चित वर्षा से जोड़ती है। इंदिरा गांधी नहर क्षेत्र सिंचाई जोड़ता है, पर उसका तर्क धान डेल्टा या यूरोपीय दुग्ध पट्टी से अलग रहता है।
