मूल शोध-वित्त ढांचा: एएनआरएफ, एसईआरबी और एसटीआईपी
अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन अधिनियम, 2023 भारत के सार्वजनिक शोध-वित्त ढांचे में विज्ञान एवं इंजीनियरिंग अनुसंधान बोर्ड अधिनियम, 2008 के बाद सबसे बड़ा संस्थागत परिवर्तन है। कैबिनेट से स्वीकृत राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन विधेयक में 2023-28 के लिए 50,000 करोड़ रुपये का अनुमानित परिव्यय था। अधिनियम बनने के बाद एएनआरएफ विश्वविद्यालयों, प्रयोगशालाओं और मंत्रालयों में रणनीतिक दिशा, शोध-प्रोत्साहन और उद्योग-अकादमिक सहयोग का शीर्ष निकाय बना। इसकी शासी संरचना महत्त्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री पदेन अध्यक्ष हैं। केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री तथा शिक्षा मंत्री पदेन उपाध्यक्ष हैं। प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार कार्यान्वयन-श्रृंखला में आते हैं। पुराना एसईआरबी मॉडल विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत बाह्य शोध परियोजनाओं को वित्त देता था। एएनआरएफ नवाचार, उद्यमिता और अनुप्रयुक्त शोध तक दायरा बढ़ाता है। नीति का मुख्य बिंदु यह है कि एएनआरएफ केवल बदला हुआ अनुदान बोर्ड नहीं है। यह प्रतिस्पर्धी शोध अनुदान, उच्चस्तरीय प्रयोगशालाओं, उद्योग भागीदारी, राज्य विश्वविद्यालयों और स्वच्छ ऊर्जा, सेमीकंडक्टर, स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी तथा डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना जैसे रणनीतिक क्षेत्रों को जोड़ता है। इसकी वित्तीय सोच जवाबदेही भी बदलती है। सार्वजनिक धन, निजी योगदान, सहकर्मी समीक्षा, विषयगत प्राथमिकताएं और राष्ट्रीय प्रयोगशालाएं पेटेंट, प्रोटोटाइप, डेटा प्लेटफॉर्म, प्रशिक्षित शोधकर्ता और लागू की जा सकने वाली तकनीक जैसे परिणामों से जुड़नी चाहिए। इससे जयपुर, जोधपुर, कोटा और उदयपुर के छोटे विश्वविद्यालय भी उसी राष्ट्रीय शोध नेटवर्क का हिस्सा बनते हैं जो पहले केंद्रीय संस्थानों और महानगरीय प्रयोगशालाओं तक सीमित लगता था। विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार नीति 2020 का मसौदा इसकी नीति-पृष्ठभूमि देता है। इसे 1958 के वैज्ञानिक नीति संकल्प, 1983 के प्रौद्योगिकी नीति वक्तव्य, 2003 की विज्ञान और प्रौद्योगिकी नीति तथा 2013 की विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार नीति के बाद भारत की पांचवीं राष्ट्रीय विज्ञान-प्रौद्योगिकी-नवाचार नीति मसौदा कहा गया। राजस्थान में यही संरचना राज्य स्तर पर डीओआईटीसी राजस्थान से दिखती है। यह 1987 के कंप्यूटर विभाग से विकसित होकर 2002 में सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग बना और राज्य विभागों के लिए आईटी नीति, ई-शासन, वेबसाइट, मानक और सूचना-संचार अवसंरचना का समन्वय करता है।
