मुख्य बिंदु

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    पारिस्थितिक परिवर्तन को जलवायु दबाव, भूमि क्षरण, जैव विविधता हानि, आर्द्रभूमि स्वरूप, वन आवरण, प्रदूषण और आपदा जोखिम से समझा जाता है।

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    पेरिस समझौता, यूएनसीसीडी, कुनमिंग-मॉन्ट्रियल रूपरेखा, सेंदाई रूपरेखा और रामसर अभिसमय वैश्विक संदर्भ बनाते हैं।

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    भारतीय विधि पर्यावरण, वन, वन्यजीव, जैव विविधता और जल अधिनियमों के जरिए पारिस्थितिक नियंत्रण देती है।

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    राजस्थान के उदाहरणों में अरावली क्षरण, थार मरुस्थलीकरण, ताप तनाव, जल कमी और आर्द्रभूमि दबाव जुड़ते हैं।

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    बार-बार आने वाले तथ्य वायु गुणवत्ता सूचकांक, अम्ल वर्षा गैसों, सुपोषण, जैविक-अजैविक घटकों, कार्बन पदचिह्न और हरितगृह गैसों से जुड़ते हैं।

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    आईपीसीसी एआर6, आईएसएफआर 2023 और वैश्विक प्रवाल विरंजन घटना अमूर्त परिवर्तन को तिथि और आंकड़े में बदलते हैं।

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    पुनर्स्थापन केवल वृक्षारोपण नहीं है; इसमें क्षरित भूमि, आर्द्रभूमि स्वरूप, जैव विविधता रजिस्टर और जोखिम-संवेदनशील योजना शामिल हैं।

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    मजबूत उत्तर चालक, लक्षण, विधिक साधन, निगरानी संकेतक और राजस्थान के क्षेत्रीय उदाहरण अलग-अलग रखता है।

जलवायु दबाव और पेरिस आधार

पर्यावरणीय परिवर्तन तब शुरू होता है जब जलवायु दबाव तापमान, वर्षा, सूखे की आवृत्ति और पारिस्थितिकी तनाव को बदल देता है। पेरिस समझौता, जिसे 2015-12-12 को अपनाया गया, वैश्विक जलवायु नीति का प्रमुख आधार है। यह तापमान-लक्ष्य को राष्ट्रीय निर्धारित योगदानों के चक्र से जोड़ता है। 2 डिग्री सेल्सियस से काफी नीचे रहने का लक्ष्य और 1.5 डिग्री तक सीमित रखने का प्रयास, पारिस्थितिक परिवर्तन को केवल मौसम-कथा नहीं रहने देते। वे उसे शमन और अनुकूलन से मापने योग्य बनाते हैं।

जलवायु प्रभावों पर आईपीसीसी एआर6 संश्लेषण रिपोर्ट 2023 में अंतिम रूप से आई। यह भौतिक विज्ञान, प्रभाव, अनुकूलन और शमन के निष्कर्षों को साथ रखती है। इसी से स्पष्ट होता है कि ताप-लहर, सूखा, भारी वर्षा और समुद्र-स्तर जोखिम केवल पर्यावरणीय मुद्दे नहीं, बल्कि आर्थिक मुद्दे भी हैं। राजस्थान में यह दबाव पश्चिमी जिलों की अधिक गर्मी, बाड़मेर-जैसलमेर के आसपास चरागाह तनाव और जयपुर, जोधपुर तथा बीकानेर में बढ़ती जल-मांग के रूप में दिखाई देता है।

जलवायु दबाव सामान्य पर्यावरणीय अवधारणाओं को भी बदल देता है। कार्बन पदचिह्न उन हरितगृह गैसों को बताता है जो मानव गतिविधि से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ी होती हैं। अम्ल वर्षा सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड को मृदा तथा जल रसायन से जोड़ती है। अनवीकरणीय संसाधन जीवाश्म ईंधनों को जैव-भंडार या सूर्य-प्रकाश से अलग करते हैं। कारण-श्रृंखला साफ है: हरितगृह गैसें ऊष्मन बढ़ाती हैं; ऊष्मन आवास, जल और फसल तनाव को बदलता है; प्रतिक्रिया में पेरिस योगदान, राज्य अनुकूलन योजनाएँ, नवीकरणीय ऊर्जा और जल-संरक्षण उपाय आते हैं।

शमन और अनुकूलन को अलग रखना चाहिए। शमन स्वच्छ ऊर्जा, दक्षता और भूमि-उपयोग विकल्पों से भविष्य का दबाव घटाता है। अनुकूलन पहले से तय नुकसान से लोगों, फसलों, जलाशयों और आवासों की रक्षा करता है। पश्चिमी राजस्थान दोनों पक्षों को साथ दिखाता है। नवीकरणीय ऊर्जा उत्सर्जन घटा सकती है, पर उन्हीं शुष्क जिलों को सूखा-योजना, ताप-आश्रय, जल-बजट और चरागाह पारिस्थितिकी की सुरक्षा भी चाहिए। यह दोहरा पाठ जलवायु परिवर्तन को केवल तापमान या केवल आपदा-राहत तक सीमित होने से रोकता है।

संभावित RAS प्रश्न

PYQ रुझान और 2026 पाठ्यक्रम विश्लेषण पर आधारित

1 1M कौन-सा वैश्विक समझौता अपनाने की तिथि, मुख्य व्यवस्था और पारिस्थितिक परिवर्तन की भूमिका को सही जोड़ता है? 1 अंक · 0 शब्द

आदर्श उत्तर

पेरिस समझौता 12 दिसंबर 2015 को अपनाया गया और तापमान लक्ष्य से जुड़े एनडीसी चक्र पर काम करता है। रामसर 1971 का आर्द्रभूमि अभिसमय है, यूएनसीसीडी 1994 का मरुस्थलीकरण अभिसमय है और सेंदाई 2015 की आपदा जोखिम रूपरेखा है; इसलिए बाकी विकल्प वास्तविक संस्थाओं को गलत क्षेत्र में रखते हैं।