मूल वैधता, संभावना और व्याख्या
इस विषय में तर्क के तीन अलग समर्थन-मानक हैं। निगमनात्मक तर्क देखता है कि दिए गए आधारवाक्यों से निष्कर्ष अनिवार्य रूप से निकलता है या नहीं। यदि सभी खिलाड़ी अनुशासित हैं और सभी अनुशासित लोग समय-सारणी मानते हैं, तो सभी खिलाड़ी समय-सारणी मानते हैं; परिणाम रूप पर निर्भर है, खेल की स्थानीय लोकप्रियता पर नहीं। आगमनात्मक तर्क बार-बार देखे गए मामलों से संभाव्य नियम बनाता है। राजस्थान की किसी नगर हेल्पलाइन में धूल-आंधी के बाद समान शिकायतें आती हैं, तो अगले तूफान पर वैसी शिकायतों की संभावना कही जा सकती है, पर निष्कर्ष अपवाद के लिए खुला रहता है। अपहरणात्मक तर्क प्रेक्षणों से उपलब्ध सर्वोत्तम व्याख्या चुनता है। जयपुर कार्यालय में सर्वर खराबी के बाद जल-बिल शिकायतें बढ़ें और बिल-तिथियां उसी अवधि में हों, तो सर्वर खराबी संभाव्य व्याख्या है, गारंटी नहीं।
पहला अनुशासन उत्तर-मानक को अलग रखना है। निगमन दिए हुए आधारों के भीतर वैधता और निश्चितता देखता है; आगमन शक्ति, आवृत्ति और प्रतिरूप-नियमितता देखता है; अपहरण व्याख्यात्मक मेल, सरलता और तथ्यों की व्यापकता देखता है। आरएएस तर्क प्रश्न साधारण भाषा में यह अंतर छिपा सकता है। कोटा विद्यालय परिपत्र निष्कर्ष पूछ सकता है, बीकानेर परिवहन सूचना मान्यता पूछ सकती है, और बाड़मेर जल-आपूर्ति शिकायत कार्यवाही-मार्ग पूछ सकती है। प्रसंग बदलता है, पर तार्किक काम तभी बदलता है जब प्रश्न अनुसरण, मजबूती, मान्यता, व्याख्या या कार्रवाई पूछता है।
सर्व-कुछ-नहीं कथन वाला न्याय प्रतिरूप सबसे स्पष्ट आरंभ है, क्योंकि यह सत्य-संरक्षित रूप सिखाता है। सर्व, कुछ और नहीं वर्ग-संबंध नियंत्रित करते हैं। सर्व अ ब हैं, तो हर अ ब में रहेगा; कुछ अ ब हैं, तो कम से कम एक साझा क्षेत्र बनेगा; कोई अ ब नहीं, तो साझा क्षेत्र निषिद्ध है। यही संबंध आरेख, वाक्य और निष्कर्ष से जांचा जाता है। जो निष्कर्ष हर संभव वृत्त-व्यवस्था में सत्य है, वही अनुसरण करता है।
