278. राज्य आयोग एवं निकाय
State Commissions & Bodiesमूल मुख्य बिंदु
- 1
राजस्थान के राज्य निकाय संवैधानिक आयोग, वैधानिक अधिकार आयोग, लोकपाल संस्था और स्थानीय शासन संस्थाओं में बंटते हैं।
- 2
राजस्थान लोक सेवा आयोग 22 दिसंबर 1949 से कार्यरत है और अनुच्छेद 315 से संवैधानिक दर्जा पाता है।
- 3
राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग अनुच्छेद 243ट और 243यक को पंचायत तथा नगरपालिका चुनावों से जोड़ता है।
- 4
राजस्थान सूचना आयोग, सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के अधीन द्वितीय अपील और शिकायतों का निर्णय करता है।
- 5
राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग, महिला आयोग और बाल अधिकार आयोग अधिकार-संबंधी कानूनों को शिकायत मंच में बदलते हैं।
- 6
राजस्थान लोकायुक्त 1973 के राज्य कानून के अधीन लोकपाल संस्था है और उसका क्षेत्राधिकार उसी कानून से सीमित होता है।
- 7
अनुच्छेद 243झ और अनुच्छेद 243म
- 8
2011, 2012 और 2012 के राज्य कानून सेवा-प्रदान, सुनवाई और उपापन में समयबद्ध जवाबदेही बनाते हैं।
मूल लोक सेवा आयोग: संवैधानिक भर्ती आयोग
राजस्थान लोक सेवा आयोग राज्य सेवाओं के लिए भर्ती और परामर्श देने वाला प्रमुख संवैधानिक निकाय है। इसका अस्तित्व 22 दिसंबर 1949 को शुरू हुआ और अजमेर मुख्यालय इसे जयपुर सचिवालय के किसी विभाग से अलग राजस्थान-विशिष्ट संस्था बनाता है। अनुच्छेद 315 संघ और प्रत्येक राज्य के लिए लोक सेवा आयोग की व्यवस्था करता है। अनुच्छेद 316 अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति तथा अवधि से जुड़ता है, जबकि अनुच्छेद 320 भर्ती, पदोन्नति, सेवा-नियम और अनुशासनात्मक मामलों में परामर्श की भूमिका बताता है। राजस्थान प्रशासन में आयोग प्रतियोगी परीक्षाओं, विभागीय पदोन्नति, राज्य सेवा में कार्यरत व्यक्ति से जुड़े दंडात्मक मामलों और राज्यपाल को दी जाने वाली वार्षिक रिपोर्ट से जुड़ता है। यह न्यायालय या विभाग नहीं है; यह संवैधानिक सलाहकारी निकाय है जिसकी सिफारिश नियुक्ति और सेवा प्रशासन को प्रभावित करती है, पर अंतिम आदेश सक्षम शासन प्राधिकारी जारी करता है। आयोग की स्वतंत्रता संस्थागत है, निरपेक्ष नहीं। अध्यक्ष और सदस्य राज्यपाल द्वारा नियुक्त होते हैं, हटाने की प्रक्रिया संवैधानिक सुरक्षा से बंधती है और वार्षिक प्रतिवेदन राज्यपाल के सामने रखकर विधायी जवाबदेही बनती है। अनुच्छेद 316 राज्य आयोग के सदस्य के लिए 6 वर्ष या 62 वर्ष की बाहरी सीमा देता है; अनुच्छेद 317 हटाने और निलंबन को उच्चतम न्यायालय की जांच-राह से जोड़ता है; अनुच्छेद 319 बाद के पद-लाभ को सीमित करता है और अनुच्छेद 323 प्रतिवेदन को राज्यपाल के माध्यम से विधानमंडल के सामने रखता है। सेवा मामलों में नियम कुछ अपवाद बना सकते हैं, पर मूल ढांचा भर्ती परामर्श को दैनिक मंत्री-नियंत्रण से अलग रखता है। आयोग भर्ती-नियमों और विभागीय रिक्तियों के बीच भी खड़ा है: विभाग मांग भेजते हैं, आयोग चयन पद्धति बनाता है और अंतिम नियुक्ति आदेश शासन-मार्ग से लौटते हैं। इससे राज्य सेवाओं में पक्षपात का जोखिम घटता है।
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संभावित संभावित RAS प्रश्न
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1 MCQ 1949 में अजमेर से शुरू हुई राज्य भर्ती संस्था का संवैधानिक आधार कौन सा प्रावधान देता है?
व्याख्या
अनुच्छेद 315 संघ और प्रत्येक राज्य के लिए लोक सेवा आयोग का संवैधानिक स्रोत है, इसलिए यह राजस्थान लोक सेवा आयोग से मेल खाता है। अनुच्छेद 243K स्थानीय निकाय चुनावों से, अनुच्छेद 243I पंचायत वित्त से और अनुच्छेद 280 केंद्रीय वित्त आयोग से जुड़ता है।
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