मूल राजस्थान इतिहास में स्रोत किसे मानें
राजस्थान इतिहास के स्रोत केवल पुस्तकों की सूची नहीं हैं; वे प्रमाणों की परतदार व्यवस्था हैं। पत्थर का अभिलेख उत्कीर्णन के समय की तिथि, दाता, शासक, भाषा, धार्मिक सूत्र या लोक-निर्माण बताता है। दुर्ग, मंदिर, तालाब, सिक्का, मूर्ति और खुदाई से मिला अवशेष ऐसा भौतिक प्रमाण देते हैं जिसे दरबारी प्रशंसा में नहीं बदला जा सकता। ख्यात, रासो, वचनिका, वंशावली और डिंगल काव्य कुल-स्मृति, युद्ध-नाम, वंश-क्रम और स्थानीय राजनीतिक भाषा बचाते हैं। अभिलेखीय रिकॉर्ड फरमान, परवाने, पट्टे, राजस्व पत्र, चिट्ठियां और रियासती प्रशासनिक फाइलें जोड़ते हैं। बप्पा रावल और प्रारंभिक गुहिल मेवाड़, मेवाड़ के राणा कुम्भा, मारवाड़ के राव जोधा और बाद का मेवाड़-मारवाड़ युद्ध-क्रम इन चार स्रोत-परिवारों को साथ पढ़ने पर स्पष्ट होता है। राजस्थान राज्य अभिलेखागार, बीकानेर 1955 में स्थापित हुआ और बिखरे रियासती कागजों को शोध योग्य रिकॉर्ड-श्रृंखला बनाता है। इसलिए यह विषय सभी युगों में फैला है: आरंभिक धार्मिक अभिलेख, मध्यकालीन ख्यात और दुर्ग, औपनिवेशिक संकलन तथा आधुनिक अभिलेखागार एक ही शृंखला में आते हैं। स्रोत-मानचित्र प्रश्न से शुरू होता है: कालक्रम के लिए तिथि-बद्ध अभिलेख, स्थल के लिए भौतिक अवशेष, कुल-स्मृति के लिए ख्यात-रासो और प्रशासन के लिए अभिलेखागार अधिक उपयुक्त होते हैं।
