270. राजस्थान के प्रमुख व्यक्तित्व
Leading Personalities of Rajasthanमूल मुख्य बिंदु
- 1
राजस्थान के व्यक्तित्वों का इतिहास केवल नाम-सूची नहीं है; इसमें शासन, दुर्ग, युद्ध-तिथियाँ, उत्तराधिकार, संत, लेखक और 1947 के बाद के पद जुड़ते हैं।
- 2
मेवाड़ की परंपरा में बप्पा रावल और प्रारंभिक गुहिल मेवाड़ से शुरुआत होती है और कुम्भा, सांगा तथा प्रताप से प्रतिरोध की रेखा बनती है।
- 3
मारवाड़ में राव जोधा, मेहरानगढ़, राव मालदेव, सम्मेल, जसवंत सिंह की उत्तराधिकार समस्या, अजीत सिंह और दुर्गादास राठौड़ जुड़े रहते हैं।
- 4
नारी-बलिदान की स्मृति पन्ना धाय और उदय सिंह द्वितीय तथा हाड़ी रानी का बलिदान जैसी घटनाओं से ठोस बनती है।
- 5
मीरा बाई, विजयदान देथा और रूमा देवी जैसे नाम इस विषय को राजसत्ता से आगे भक्ति, लोक-साहित्य और आजीविका तक ले जाते हैं।
मूल प्रारंभिक मेवाड़: बप्पा रावल और गुहिल परंपरा
बप्पा रावल और प्रारंभिक गुहिल मेवाड़ राजस्थान के शासक-व्यक्तित्वों की आरंभिक स्मृति हैं। 734 की तिथि मेवाड़ क्षेत्र में बप्पा रावल गुहिलोट से जुड़ती है। चित्तौड़ या चित्तौड़गढ़ बाद की ऐतिहासिक स्मृति में पुरानी राजधानी के रूप में सामने आता है। इस बिंदु को आधुनिक उदयपुर जिले से शुरू करके नहीं समझना चाहिए। मेवाड़ पहले ऐसी वंश-परंपरा के रूप में आता है जिसने अरावली पहाड़ियों, चित्तौड़, एकलिंगजी भक्ति और राजपूत राजनीतिक वैधता को एक स्थायी कथा में बांधा। ब्रिटानिका का विवरण गुहिलों को मेवाड़ के आसपास रखता है जब उन्होंने 940 में स्वतंत्रता का दावा किया, जबकि त्रेक्कानी 734 की बप्पा रावल परंपरा को सुरक्षित रखता है। दोनों संदर्भ साथ रखने चाहिए। 734 वंश-आरंभ का आधार है और 940 मेवाड़ में गुहिलों की बाद की स्वतंत्र शक्ति का सुदृढ़ीकरण है। इसलिए बप्पा रावल को अकेली जीवनी की तरह नहीं, बल्कि संस्थापक स्मृति की तरह पढ़ना अधिक सुरक्षित है। इस विषय में उनका महत्व यह है कि वे वह वंशावली-पथ खोलते हैं जिसमें राणा कुम्भा, राणा सांगा, उदय सिंह द्वितीय और महाराणा प्रताप जैसे बाद के व्यक्तित्व समझे जाते हैं। चित्तौड़, नागदा, एकलिंगजी और गुहिल-सिसोदिया उत्तराधिकार को जुड़े हुए स्थानों और संस्थाओं की तरह देखना चाहिए। सावधान ऐतिहासिक वाक्य यही है कि बप्पा रावल प्रारंभिक गुहिल मेवाड़ परंपरा से जुड़े हैं और मेवाड़-घराने के 8वीं सदी के उदय से संबद्ध हैं। दूरस्थ अभियानों पर बहुत मजबूत दावे स्रोत-सहयोग के बिना नहीं बढ़ाने चाहिए। राजस्थान में यह पहला आधार बताता है कि शासक का नाम केवल सेनापति के रूप में नहीं आता। वह वंश, दुर्ग, देवस्थान और प्रजा के रक्षक के रूप में भी याद किया जाता है।
पूरा पढ़ने के लिए मुफ़्त में साइन अप करें
सभी अनुभाग, संभावित प्रश्न और त्वरित पुनरावृत्ति तालिका पाएं।
संभावित संभावित RAS प्रश्न
PYQ रुझान और 2026 पाठ्यक्रम विश्लेषण पर आधारित
1 MCQ 8वीं शताब्दी में मेवाड़ की आरंभिक वंश-स्मृति किस व्यक्तित्व से सबसे निकट जुड़ती है?
व्याख्या
बप्पा रावल प्रारंभिक गुहिल-मेवाड़ स्मृति और 734 की परंपरा से जुड़े हैं। राव जोधा 1459 के जोधपुर से, दुर्गादास 17वीं शताब्दी के मारवाड़ उत्तराधिकार संघर्ष से और सवाई मान सिंह द्वितीय 1949 के एकीकरण चरण से जुड़े हैं।
सभी अनुभाग, संभावित प्रश्न और त्वरित पुनरावृत्ति तालिका पाएं।
