मूल गणराज्य की शुरुआत: संविधान, राष्ट्रपति और मंत्रिमंडल
भारतीय संविधान का प्रवर्तन 26 जनवरी 1950 को हुआ और इसी से राजनीतिक स्वतंत्रता को गणराज्य की संवैधानिक व्यवस्था मिली। संविधान सभा ने 26 नवंबर 1949 को संविधान अपनाया था, पर शासन की वास्तविक शुरुआत तब हुई जब डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने प्रथम राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली। राष्ट्र निर्माण केवल सीमा बनाने का काम नहीं था; इसके लिए वैध केंद्र, अधिकार-युक्त नागरिक, संसदीय उत्तरदायित्व और संघीय संस्थाएँ भी जरूरी थीं। 1951-52 के पहले आम चुनाव ने सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार को व्यवहार में उतारा। प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने 15 अगस्त 1947 से 27 मई 1964 तक नए गणराज्य को मंत्रिमंडलीय नेतृत्व दिया और लंबे समय तक विदेश नीति भी संभाली। राजस्थान में यह परिवर्तन पूर्व रियासतों के निर्वाचित संस्थाओं में आने से दिखा। जयपुर, जोधपुर, बीकानेर और छोटी रियासतें अब संधि-आधारित राजसत्ता के बजाय समान नागरिकता के ढाँचे में आईं। राष्ट्रपति, संसद, उच्चतम न्यायालय, चुनाव आयोग और मंत्रिपरिषद ने अलग-अलग पर जुड़े संस्थागत आधार दिए। राजस्थान की शुरुआती राजनीति में जागीरदारों, किसानों, नगर व्यापारियों और जनजातीय समुदायों को एक ही नागरिक व्यवस्था में लाना पड़ा।
