मूल व्यापार से विजय तक बंगाल का पहला सेतु
23 जून 1757 का प्लासी का युद्ध कंपनी शासन में पहला निर्णायक राजनीतिक मोड़ है, क्योंकि रॉबर्ट क्लाइव ने बंगाल में सिराजुद्दौला को हराया और मीर जाफर को आश्रित नवाब बनाया गया। प्लासी ने रातोंरात नियमित साम्राज्य नहीं बनाया, पर इसने ईस्ट इंडिया कंपनी को बंगाल की राजस्व-संबंधी राजनीति पर प्रभाव दिया और निजी व्यापार, सैन्य दबाव तथा दरबारी षड्यंत्र को एक साथ चला दिया। इसलिए प्लासी का युद्ध बंगाल के खजाने, फोर्ट विलियम के हित और तटीय कारखानों से अंदरूनी सत्ता तक के बदलाव से जुड़ा है। राजस्थान में बाद में अजमेर और मारवाड़ में कंपनी एजेंटों का अनुभव भी यही ढाँचा दिखाता है: व्यापारिक शक्ति प्रत्यक्ष शासक बनने से पहले राजनीतिक निर्णायक बनी।
22 अक्टूबर 1764 का बक्सर का युद्ध बंगाल की स्थिति को और मजबूत करता है। कंपनी की सेना ने बंगाल के मीर क़ासिम, अवध के शुजाउद्दौला और मुगल सम्राट शाह आलम द्वितीय को हराया; इसके परिणामस्वरूप 1765 में बंगाल, बिहार और उड़ीसा में कंपनी को दीवानी अधिकार मिले। बक्सर केवल युद्ध-सूची का नाम नहीं है, क्योंकि इसने ऐसी संस्था को वैधानिक राजस्व अधिकार दिया जो अभी भी स्वयं को व्यापारिक निकाय बताती थी। यही राजस्व-तर्क बाद में राजपूताना में खिराज, ऋण और राजनीतिक एजेंसी के रूप में पहुँचा, और राजस्थान की आउवा तथा बिजोलिया स्मृतियाँ इसी कंपनी-राज्य की दुनिया में विकसित हुईं।
