मूल हड़प्पा फ्रेम: कालक्रम, खोज और राजस्थान विस्तार
सिंधु या हड़प्पा सभ्यता को एक ही नगर नहीं, बल्कि लंबे सांस्कृतिक क्रम के रूप में पढ़ना चाहिए। NCERT इसे पूर्व-हड़प्पा 6000-2600 ईसा पूर्व, परिपक्व हड़प्पा 2600-1900 ईसा पूर्व और उत्तर-हड़प्पा 1900-1300 ईसा पूर्व में बाँटता है। परिपक्व चरण में नियोजित नगर, पक्की-कच्ची ईंटें, मुहरें, बाट, मनके, ताँबा-कांसा उपकरण और अफगानिस्तान, बलूचिस्तान, राजस्थान, गुजरात तथा यमुना क्षेत्र तक फैली बसावटें दिखती हैं। हड़प्पा (दयाराम साहनी द्वारा उत्खनन, 1921) प्रकार-स्थल बना क्योंकि सभ्यता सबसे पहले रावी नदी के पास पंजाब क्षेत्र में यहीं पहचानी गई। मोहनजोदड़ो (आर.डी. बनर्जी द्वारा उत्खनन, 1922) अगले वर्ष सिंध में सिंधु नदी के किनारे सामने आया। इन खोजों ने प्राचीन भारतीय कालक्रम में पाठ्य परंपरा से पहले का नगरीय कांस्य युग स्थापित किया। इसी जाल में कालीबंगा (हनुमानगढ़, राजस्थान) भी आता है, जो घग्घर पर स्थित है और पूर्व-हड़प्पा तथा हड़प्पा दोनों स्तर दिखाता है। आहड़-बनास संस्कृति (मेवाड़, राजस्थान) पड़ोसी ताम्रपाषाण तुलना देती है, जहाँ काले-लाल मृद्भांड, ताँबे की वस्तुएँ और आहड़, गिलुंड, बालाथल, ओजियाना जैसे स्थल मिलते हैं। मुख्य निष्कर्ष यह है कि हड़प्पा संस्कृति केवल नदी-घाटी तक सीमित नहीं थी; ईंट-मानक, बाट और मुहरें अलग-अलग पर्यावरणों में दोहराती हैं। स्थल-मानचित्र, संग्रहालय-वस्तु और नदी-नाम साथ पढ़ने से प्रत्येक विशेषता का पर्यावरणीय अर्थ स्पष्ट होता है। राजस्थान इतिहास के लिए राज्य उत्तर-पश्चिमी प्रागैतिहासिक क्षेत्र का भाग है, सिंधु नगरों के बाद की टिप्पणी नहीं।
