मूल कौशल ढांचा और मंत्रालय आधार
भारत का कौशल-विकास ढांचा पहले एक समर्पित प्रशासनिक आधार से शुरू होता है। कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) 9 नवंबर 2014 को पूरे देश में कौशल-विकास प्रयासों के समन्वय के लिए स्थापित किया गया। इसके साथ राष्ट्रीय कौशल विकास निगम, सेक्टर कौशल परिषदें, प्रशिक्षण प्रदाता, जन शिक्षण संस्थान, औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान और शिक्षुता पोर्टल कार्यान्वयन तंत्र बनाते हैं। कौशल भारत मिशन + प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई) 15 जुलाई 2015 से इस व्यवस्था का प्रमुख सार्वजनिक चेहरा बना। पीएमकेवीवाई 1.0 शुरुआती अल्पकालिक प्रशिक्षण और प्रमाणन चरण था; पीएमकेवीवाई 2.0 को 2016-20 के लिए रु. 12,000 करोड़ व्यय-आधार और एक करोड़ युवाओं के लक्ष्य के साथ स्वीकृति मिली; पीएमकेवीवाई 3.0 2020-21 में चला; पीएमकेवीवाई 4.0 अब पीएम-एनएपीएस और जन शिक्षण संस्थान के साथ पुनर्गठित कौशल भारत कार्यक्रम में समाहित है। मुख्य सुधार यह है कि रु. 12,000 करोड़ वर्तमान पीएमकेवीवाई 4.0 का नहीं, बल्कि पीएमकेवीवाई 2.0 का आंकड़ा है। राजस्थान संबंध स्पष्ट है: जयपुर का विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय, जो 2017 के अधिनियम संख्या 6 से राजस्थान आईएलडी कौशल विश्वविद्यालय के रूप में बना, पूरे राजस्थान के कौशल-शिक्षा संस्थानों को संबद्ध कर सकता है। मजबूत कौशल व्यवस्था नामांकन, प्रमाणपत्र, मांग और टिकाऊ नियुक्ति चारों जोखिम देखती है। राजस्थान का विश्वविद्यालय मार्ग स्थानीय पाठ्यक्रम और जिला-कौशल अंतर को जल्दी पहचान सकता है।
