मूल वृद्धि मापन और अर्थव्यवस्था की रैंक
आर्थिक वृद्धि की शुरुआत उत्पादन-मापन से होती है, नारे से नहीं। वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद कीमतों के बदलाव को हटाकर बताता है कि उत्पादन सच में बढ़ा या नहीं; नाममात्र सकल घरेलू उत्पाद उत्पादन और कीमत, दोनों को लेकर वैश्विक आकार की तुलना में काम आता है। सकल राष्ट्रीय आय विदेश से शुद्ध कारक आय जोड़ती या घटाती है, जबकि शुद्ध राष्ट्रीय आय और प्रति व्यक्ति आय कल्याण-क्षमता समझाते हैं। इसलिए रैंक बताते समय आधार स्पष्ट होना चाहिए: भारत — सकल घरेलू उत्पाद के नाममात्र मूल्य पर विश्व की पाँचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था डॉलर-आधारित नाममात्र रैंक है, जबकि क्रय-शक्ति समता में भारत पहले से ऊपर रहा है।
बजट 2023-24 के भाषण ने यह आधार तय किया कि भारतीय अर्थव्यवस्था नौ वर्षों में 10वें से 5वें स्थान पर पहुँची और प्रति व्यक्ति आय 1.97 लाख रुपये से अधिक हो गई। इसका अर्थ यह नहीं कि हर परिवार पाँचवें स्थान जितना समृद्ध है; अर्थ यह है कि बाजार-मूल्य पर कुल उत्पादन उस रैंक तक पहुँचा। बाद में भारत — विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था (आईएमएफ डब्ल्यूईओ अप्रैल 2025) का आधार जापान को नाममात्र सकल घरेलू उत्पाद में पार करने की अपेक्षा रहा। 2025 के अंत तक आधिकारिक सामग्री भारत को लगभग 4.18 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था के साथ चौथा स्थान बताने लगी थी।
राजस्थान इस रैंक को राज्य-स्तर पर ठोस बनाता है। फलोदी जिले का भड़ला सौर पार्क 2,245 मेगावाट क्षमता के साथ उत्पादन, निवेश और स्वच्छ ऊर्जा क्षमता में योगदान देता है। इसलिए राष्ट्रीय रैंक का प्रश्न राजस्थान के सौर पार्क, सीमेंट पट्टी और सेवा गतिविधि से भी जुड़ता है।
