मूल नीति-श्रृंखला के रूप में कृषि विकास
भारत में कृषि विकास उत्पादकता, आय, मूल्य, जोखिम और बाजार संस्थाओं की जुड़ी हुई श्रृंखला है। कृषि और संबद्ध गतिविधियाँ अब भी 46.1 प्रतिशत कार्यबल को रोजगार देती हैं, इसलिए कृषि नीति का सामाजिक वजन उसके राष्ट्रीय आय हिस्से से अधिक है। फसल अर्थव्यवस्था में राज्यीय भिन्नता भी गहरी है: राजस्थान के 10 कृषि-जलवायु क्षेत्र बाजरा, सरसों, चना, जीरा, ग्वार और पशुपालन आय को राज्य नीति के केंद्र में रखते हैं। 24 फरवरी 2019 को आरंभ प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) पात्र भूमिधारी किसान परिवारों को प्रति वर्ष 6000 रुपये तीन 2000 रुपये किस्तों में देती है। यह मूल्य खरीद, बीमा या इनपुट सब्सिडी से अलग आय-आधार बनाती है। जयपुर या नागौर के किसान के लिए यह अंतरण फसल चयन तय नहीं करता, पर बीज, उर्वरक, डीजल और मजदूरी भुगतान से पहले नकदी दबाव घटाता है। इसलिए कृषि विकास दो परतों में चलता है। पहली परत बीज, सिंचाई, मिट्टी पोषण और विस्तार से उत्पादन बढ़ाती है। दूसरी परत एमएसपी, बीमा, भंडारण, बाजार पहुंच और अंतरण से शुद्ध आय बचाती है। कोई भी परत कमजोर हो तो कृषि संकट रह सकता है। इसी कारण यह विषय हरित क्रांति, एमएसपी, पीएम-किसान, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई), ई-नाम, एफपीओ और प्राकृतिक खेती को साथ पढ़ता है।
