मूल राष्ट्रपति: पद, निर्वाचन और मतमूल्य
अनुच्छेद 52 — भारत का राष्ट्रपति संघ कार्यपालिका की आरंभिक रेखा है: भारत में एक राष्ट्रपति होगा। पाठ में यह पद केवल प्रतीकात्मक नहीं है; अनुच्छेद 53 संघ की कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में रखता है, पर आगे के अनुच्छेद उसे संसदीय मंत्रिमंडल से चलाते हैं। अनुच्छेद 54 — राष्ट्रपति का निर्वाचन विशेष निर्वाचक मंडल बनाता है: संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्य और राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य इसमें भाग लेते हैं, और संवैधानिक स्पष्टीकरण अनुच्छेद 54 तथा 55 के लिए दिल्ली और पुडुचेरी को राज्य इकाई की तरह मानता है। नामित सदस्य इस निर्वाचन में मत नहीं देते। इसलिए राजस्थान के निर्वाचित विधायक राष्ट्रपति निर्वाचन में महत्त्व रखते हैं, जबकि संसद के नामित सदस्य नहीं। अनुच्छेद 55 — निर्वाचन की रीति एवं मतमूल्य समानता का सूत्र देता है। विधायक मतमूल्य राज्य की जनसंख्या और निर्वाचित विधायकों की संख्या से जुड़ता है, जबकि सांसद मतमूल्य इस तरह समायोजित होता है कि संसद और राज्य संतुलित रहें। अनुच्छेद में जनसंख्या स्पष्टीकरण बाद के जनगणना-स्थिरता शब्दों से प्रभावित है, इसलिए सूत्र और जनसंख्या आधार साथ पढ़े जाते हैं। इसलिए राजस्थान के विधायक का मतमूल्य छोटे राज्य के विधायक जैसा नहीं होता। निर्वाचन आनुपातिक प्रतिनिधित्व, एकल संक्रमणीय मत और गुप्त मतदान से होता है। इससे केवल संसदीय बहुमत द्वारा पद पर कब्ज़ा नहीं होता, क्योंकि राज्य विधानसभाएँ भी आवश्यक भाग हैं। राष्ट्रपति का जनादेश प्रत्यक्ष लोकप्रिय नहीं, अप्रत्यक्ष, भारित और संघीय है।
