मूल वन आवरण और वनस्पति ढाँचा
राजस्थान की प्राकृतिक वनस्पति शुष्कता, अरावली विभाजक और पूर्व-पश्चिम नमी अंतर से बनती है। राजस्थान वन आवरण (आईएसएफआर 2023) राज्य में 16,548.21 वर्ग किमी वन आवरण दर्ज करता है: 223.20 वर्ग किमी अति सघन वन, 4,237.41 वर्ग किमी मध्यम सघन वन और 12,087.60 वर्ग किमी खुला वन। झाड़ी क्षेत्र अलग से 5,476.75 वर्ग किमी है, इसलिए वन आवरण, वृक्ष आवरण और झाड़ी क्षेत्र को एक ही आँकड़ा नहीं माना जा सकता। जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर और चूरू जैसे पश्चिमी जिलों में सूखा, चराई और हवा के कटाव को सहने वाली काँटेदार वनस्पति, घास और झाड़ियाँ मिलती हैं। खेजड़ी, रोहिड़ा, बेर, केर, फोग, थोर और लाना इसी शुष्क पारिस्थितिकी की शब्दावली हैं। पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी राजस्थान में वर्षा, पथरीली ढाल और जल उपलब्धता बढ़ने से शुष्क पर्णपाती तथा मिश्रित पर्णपाती वन मिलते हैं। सिरोही का माउंट आबू छोटा किंतु महत्त्वपूर्ण उप-उष्णकटिबंधीय पहाड़ी वन क्षेत्र है। अरावली केवल स्थलरूप नहीं, बल्कि वनस्पति सीमा, जल-विभाजक और प्रजाति-गमन गलियारा भी है। कम वन प्रतिशत के कारण खुले वन, ग्राम-चारागाह, ओरन, घासभूमि, आर्द्रभूमि और झाड़ी क्षेत्र भी पारिस्थितिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण हैं। उदयपुर, सिरोही और प्रतापगढ़ में पहाड़ी ढाल और अपेक्षाकृत अधिक वर्षा सहारा देती है, जबकि चूरू, हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर में मरु मैदान और खेती प्रमुख रहती है। केवल घने वन गिनने वाली दृष्टि मरु राष्ट्रीय उद्यान के गोडावण आवास, ताल छापर के कृष्णसार घास-मैदान और सांभर के पक्षी आवास को छोड़ देती है।
