मुख्य बिंदु

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    2024 की नीति में राजस्थान सीसा, जस्ता, वोलास्टोनाइट, सेलेनाइट, कैल्साइट और जिप्सम का एकमात्र उत्पादक है।

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    अरावली-दिल्ली वलित पट्टी सीसा-जस्ता-चांदी और खेतड़ी तांबा संकेंद्रण को समझाती है।

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    बाड़मेर-सांचौर और जैसलमेर बेसिन खनिज मानचित्र में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस जोड़ते हैं।

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    मकराना, राजसमंद और किशनगढ़ संगमरमर की खान-प्रसंस्करण-बाजार श्रृंखला बनाते हैं।

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    झामरकोटड़ा रॉक फॉस्फेट और जिप्सम उर्वरक तथा सीमेंट-इनपुट परत को आधार देते हैं।

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    राजस्थान खनिज नीति 2024 खनिज भूगोल को नीलामी, निर्मित रेत, राजस्व और सामरिक खनिजों से जोड़ती है।

खनिज राज्य और भूवैज्ञानिक आधार

राजस्थान का खनिज भूगोल पहले पैमाने से समझ आता है। राज्य का क्षेत्रफल 342,239 वर्ग किमी है, जो भारत के क्षेत्रफल का लगभग दसवाँ हिस्सा है। अरावली पर्वतमाला इसे दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व तक काटती है। प्राचीन वलित पट्टी, पश्चिमी मरुस्थलीय बेसिन, लवणीय अवसाद और अवसादी शैल-क्रम मिलकर धात्विक, अधात्विक, ईंधन और भवन-पत्थर संसाधनों का दुर्लभ मिश्रण बनाते हैं। खान और भूविज्ञान विभाग राजस्थान को खनिजों की विविधता के आधार पर सबसे समृद्ध राज्य बताता है और लगभग 57 खनिजों के उत्पादन का उल्लेख करता है।

राजस्थान की खनिज-एकाधिकार स्थिति सीसा, जस्ता, वोलास्टोनाइट, सेलेनाइट और कई औद्योगिक खनिजों में दिखाई देती है। राजस्थान खनिज नीति 2024 भी राज्य को सीसा, जस्ता, वोलास्टोनाइट, सेलेनाइट, कैल्साइट और जिप्सम का देश में एकमात्र उत्पादक बताती है। इसलिए राज्य का खनिज मानचित्र किसी एक पट्टी में सीमित नहीं है। उदयपुर-राजसमंद-भीलवाड़ा सीसा-जस्ता, रॉक फॉस्फेट और संगमरमर क्षेत्र बनाते हैं। झुंझुनूं-सीकर-अलवर खेतड़ी तांबा क्षेत्र से जुड़े हैं। नागौर-अजमेर-राजसमंद संगमरमर, चूना पत्थर और नमक को जोड़ते हैं। बाड़मेर और जैसलमेर हाइड्रोकार्बन, लिग्नाइट और प्राकृतिक गैस की परत जोड़ते हैं।

खनिज वितरण उच्चावच, शैल-संरचना, बेसिन-गहराई और परिवहन पहुँच का अनुसरण करता है। उदयपुर की कठोर शैल पट्टी भूमिगत धातु खानों को आधार देती है। पश्चिमी बेसिन तेल, गैस और लिग्नाइट से जुड़े हैं। सांभर, डीडवाना और पचपदरा जैसी लवणीय झीलें बंद जलनिकास और वाष्पीकरण से बनती हैं। यही कारण है कि एक जिला कई खनिज-परतों में आ सकता है। उदयपुर जस्ता और फॉस्फेट से, नागौर संगमरमर, नमक और चूना पत्थर से, और बाड़मेर पेट्रोलियम, लिग्नाइट तथा रिफाइनरी गतिविधि से जुड़ता है।

पश्चिमी भाग की शुष्कता केवल पृष्ठभूमि नहीं है। यही नमक, जिप्सम और लिग्नाइट वाले क्षेत्रों को अधिक नम दक्षिण-पूर्वी धातु और पत्थर पट्टियों से अलग करती है। इसके विपरीत मध्य अरावली जिलों में कठोर क्रिस्टलीय चट्टानें, पुराना खनिजीकरण और अधिक खदान-घनत्व मिलता है। इसी विरोध से राजस्थान का खनिज क्षेत्रीकरण बनता है। पूर्ण मानचित्र-पठन में खनिज, जिला, भूवैज्ञानिक परिस्थिति और आर्थिक उपयोग को साथ पढ़ना पड़ता है।

संभावित RAS प्रश्न

PYQ रुझान और 2026 पाठ्यक्रम विश्लेषण पर आधारित

1 1M 2024 की राज्य नीति के ढांचे में राजस्थान की एकमात्र-उत्पादक खनिज पहचान किस समूह से सबसे सही दिखती है? 1 अंक · 0 शब्द

आदर्श उत्तर

ख सही है क्योंकि 2024 की नीति इन्हीं खनिजों को राजस्थान के देश में एकमात्र उत्पादक खनिजों के रूप में रखती है। क ओडिशा और मध्य भारत के पैटर्न मिलाता है, ग अभ्रक और तटीय निक्षेपों की ओर जाता है, और घ हीरा तथा तटीय रेत जैसे असंबद्ध विषय जोड़ता है।