मूल निर्देशांक, पैमाना और आकृति
राजस्थान भारत के उत्तर-पश्चिमी कोने में स्थित है, पर उसका आंतरिक मानचित्र केवल मरुस्थल नहीं है। आधिकारिक सामग्री में इसका अक्षांशीय विस्तार लगभग 23°03' से 30°12' उत्तरी अक्षांश तक मिलता है। देशांतरीय विस्तार लगभग 69°29' से 78°17' पूर्वी देशांतर तक है; कई भूगोल सारणियाँ पश्चिमी देशांतर को 69°30' पूर्व लिखती हैं। दक्षिण से उत्तर तक फैलाव बांसवाड़ा पट्टी से गंगानगर तक जाता है। पश्चिम से पूर्व तक यह जैसलमेर के मरुस्थलीय छोर से धौलपुर-चम्बल क्षेत्र तक पहुँचता है।
उत्तर-दक्षिण दूरी लगभग 826 किमी और पूर्व-पश्चिम दूरी लगभग 869 किमी है। इसलिए राज्य की जलवायु अक्षांश और धरातल, दोनों से बदलती है। बांसवाड़ा के पास कर्क रेखा राजस्थान को दक्षिणी उष्ण कटिबंधीय स्पर्श देती है, जबकि उत्तरी जिलों में महाद्वीपीय और शुष्क प्रभाव अधिक दिखाई देता है। कुल क्षेत्रफल 342,239 वर्ग किमी है, जो भारत के भौगोलिक क्षेत्र का लगभग 10.41% है। 2000 में मध्य प्रदेश के विभाजन के बाद राजस्थान क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत का सबसे बड़ा राज्य बना।
यही बड़ा क्षेत्र भू-आकृतिक विविधता को समझने की कुंजी है। जैसलमेर और बाड़मेर रेतीले टिब्बों तथा लवणीय अवसादों का क्षेत्र दिखाते हैं। सिरोही और उदयपुर ऊँची दक्षिण-पश्चिमी अरावली से जुड़े हैं। जयपुर, दौसा और भरतपुर पूर्वी जलोढ़ मैदान के निकट आते हैं। कोटा, बूंदी, बारां और झालावाड़ दक्षिण-पूर्वी पठार और नदी-घाटियों से संबद्ध हैं।
निर्देशांक केवल आरंभिक सूचना नहीं हैं। वर्षा, मिट्टी, अपवाह, सीमा-जिले और फसल-पट्टियों के प्रश्न इन्हीं पर टिके रहते हैं। देशांतरीय फैलाव नहर-आधारित उत्तर-पश्चिम और चम्बल-बनास पूर्व के अंतर को समझाता है। अक्षांशीय फैलाव बांसवाड़ा-डूंगरपुर को गंगानगर-हनुमानगढ़ से अलग बनाता है। क्षेत्रफल की संख्या राज्यों की तुलना भी तय करती है। राजस्थान महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश से बड़ा है, पर जनसंख्या-वितरण समान नहीं है। शुष्कता, उच्चावच और जल-सुलभता इसे अलग-अलग पट्टियों में बाँट देते हैं। इसलिए थार मरुस्थल, आबू-सिरोही उच्चभूमि, बनास मैदान और चम्बल बीहड़ एक ही राज्य के भीतर मिलते हैं। इस विषय में विस्तार सजावटी तथ्य नहीं, बल्कि हर स्थलरूप, नदी, सीमा और जिला-स्थिति का आधार-मानचित्र है।
