मूल गणना ढांचा और प्रजाति संतुलन
20वीं पशुधन गणना 2019 राजस्थान के लिए इस विषय का सांख्यिकीय आधार देती है। इसी गणना में राज्य का कुल पशुधन 5,68,00,945 है। आधिकारिक उत्तर के अनुसार राजस्थान में गोवंश 1,39,37,630, भैंस 1,36,93,316, बकरियां 2,08,40,203, भेड़ 79,03,857 और अन्य पशु 4,25,939 हैं। इससे स्पष्ट है कि राजस्थान केवल गोवंश प्रधान राज्य नहीं है; वह छोटे पशुधन का भी बड़ा क्षेत्र है। बकरियों की संख्या गोवंश और भैंस, दोनों से अलग-अलग अधिक है। भेड़ों की संख्या भी इतनी बड़ी है कि ऊन, मौसमी प्रव्रजन और चारे के दबाव को प्रभावित करती है। यही आंकड़ा क्षेत्रीय भिन्नता समझाता है। बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर और जोधपुर जैसे पश्चिमी जिले ऊंट, भेड़ और कठोर जलवायु सहने वाली बकरी प्रणालियों से जुड़े हैं। अलवर, भरतपुर, जयपुर और श्रीगंगानगर जैसे उत्तर-पूर्वी तथा पूर्वी क्षेत्र दुग्ध गोवंश और भैंस में अधिक दिखाई देते हैं। उदयपुर, सिरोही और डूंगरपुर जैसे दक्षिणी जिलों में बकरी, स्थानीय कुक्कुट और आदिवासी घरेलू पशुपालन प्रमुख संबंध बनाते हैं। राजस्थान की शुष्क और अर्ध-शुष्क जलवायु पशुधन का महत्व घटाती नहीं, बल्कि बढ़ाती है। पशु कम चरागाह, फसल-अवशेष और सामुदायिक भूमि को दूध, ऊन, मांस, खाद और श्रम-मूल्य में बदलते हैं। झुंड की बनावट जोखिम-प्रबंधन भी बताती है। छोटे पशु सूखे के बाद जल्दी संभलते हैं, बड़े दुधारू पशुओं को स्थिर चारा और पानी चाहिए, और ऊंट विरल आबादी वाले मरुस्थलीय क्षेत्र में गतिशीलता से जुड़े रहते हैं। इसलिए यह गणना-संकेत केवल सूखी संख्या नहीं है। यह नस्ल-स्थान, पशु मेले, पशु चिकित्सा संस्थान, दुग्ध सहकारी और पशु-स्वास्थ्य व्यय का आधार-मानचित्र है। 21वीं पशुधन गणना का राष्ट्रीय कार्य 2024 में शुरू हुआ, पर इस नोट में राज्य की प्रजाति-वार संख्या के लिए 20वीं पशुधन गणना 2019 की तालिका ही आधिकारिक आधार है।
