मुख्य बिंदु

  1. 1

    राजस्थान की जलवायु अरावली दिशा, कमजोर मानसून, मरुस्थलीय शुष्कता और बड़े तापमान प्रसार से नियंत्रित होती है।

  2. 2

    पश्चिमी राजस्थान गर्म मरुस्थलीय से अर्ध-शुष्क है, जबकि दक्षिण-पूर्वी जिले अधिक आर्द्र हैं।

  3. 3

    कोपेन और थॉर्नथ्वेट वर्गीकरण अलग-अलग पद्धतियों से राजस्थान के उसी पूर्व-पश्चिम आर्द्रता-ढाल को समझाते हैं। कोपेन में बी-डब्ल्यू-एच-डब्ल्यू, बी-एस-एच-डब्ल्यू, सी-डब्ल्यू-जी और ए-डब्ल्यू जैसे जलवायु कोड पश्चिमी गर्म मरुस्थलीय क्षेत्र से दक्षिण-पूर्वी आर्द्र जेबों तक का क्रम दिखाते हैं।

  4. 4

    फलोदी का 51.0 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड, चूरू का तापमान प्रसार और लू गर्मी को स्टेशन-आधारित तथ्य बनाते हैं।

  5. 5

    मावठ पश्चिमी विक्षोभ से शीतकालीन वर्षा है और रबी गेहूं, सरसों तथा चने के लिए महत्त्वपूर्ण है।

  6. 6

    अरब सागर और बंगाल की खाड़ी दोनों शाखाएं राजस्थान को प्रभावित करती हैं, पर कमजोर होकर आती हैं।

  7. 7

    समवर्षा रेखाएं, वर्षा अनिश्चितता और सूखा-प्रवण क्षेत्र पश्चिमी जिलों की संवेदनशीलता समझाते हैं।

  8. 8

    तौक्ते 2021 और राज्य जलवायु परिवर्तन कार्य योजना जलवायु भूगोल को आपदा अनुकूलन से जोड़ते हैं।

अरावली वृष्टि-छाया संरचना

पश्चिमी राजस्थान पर अरावली का वृष्टि-छाया प्रभाव राज्य की जलवायु का संरचनात्मक आधार है। अरावली का रुझान मोटे तौर पर दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व है और यह दक्षिण-पश्चिम मानसून की अरब सागर शाखा के लगभग समानांतर रहती है, इसलिए अधिकांश राजस्थान में तीव्र पवनाभिमुख उठान नहीं बनता। गुजरात से भीतर आते हुए नमी कमजोर होती जाती है और पश्चिमी जिले शुष्क रहते हैं, जबकि दक्षिण तथा दक्षिण-पूर्व में स्थानीय स्थलरूप और मानसूनी संकेन्द्रण से अधिक वर्षा मिलती है। जैसलमेर, बाड़मेर और बीकानेर गर्म शुष्क भाग हैं; उदयपुर, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, कोटा और झालावाड़ अधिक आर्द्र किनारा दिखाते हैं। यह केवल पश्चिम मरुस्थल और पूर्व आर्द्र का सरल नियम नहीं है। अरावली अक्ष, बालू टीले, समुद्र से दूरी और मानसून की धड़कन मिलकर ढाल बनाते हैं। 50 सेमी समवर्षा रेखा व्यावहारिक विभाजक की तरह अरावली के साथ चलती है: इसके पश्चिम में वर्षा प्रायः 50 सेमी से कम और पूर्व-दक्षिण-पूर्व में 50-100 सेमी या अधिक होती है। जलवायु उत्तर में अरावली दिशा, मानसून व्यवहार, वर्षा ढाल और थार शुष्कता साथ आने चाहिए। यही संरचना बसावट और जल भंडारण को भी प्रभावित करती है। पश्चिमी गांव टांकों, बेरियों और गहरे भूजल पर अधिक निर्भर रहते हैं, जबकि दक्षिण-पूर्व अधिक वनस्पति और मौसमी धाराओं को सहारा देता है।

संभावित RAS प्रश्न

PYQ रुझान और 2026 पाठ्यक्रम विश्लेषण पर आधारित

1 1M राजस्थान के मुख्य स्थलरूप अक्ष के पश्चिम में लगातार शुष्कता किस भौतिक नियंत्रण से सबसे अच्छी समझ आती है? 1 अंक · 0 शब्द

आदर्श उत्तर

ख सही है क्योंकि अरावली दिशा अरब सागर शाखा के लिए तीव्र पर्वतीय उठान नहीं बनाती और पश्चिमी जिले शुष्क रहते हैं। ख शीतकालीन वर्षा है, ग 2021 की दुर्लभ चरम घटना है, और घ स्थानीय ऊंचाई अपवाद है।