मूल औद्योगिक क्षेत्रों का स्थानिक तर्क
औद्योगिक क्षेत्र कारखानों की यादृच्छिक सूची नहीं, बल्कि जुड़े हुए स्थानिक कारकों से बनी सघनता है। मुंबई-पुणे औद्योगिक क्षेत्र कपास वाले पृष्ठप्रदेश, मुंबई बंदरगाह, वित्त, आयातित मशीनरी, रेल संपर्क और मुंबई-ठाणे-पुणे अक्ष के औद्योगिक फैलाव से बना। हुगली औद्योगिक क्षेत्र नदी-बंदरगाह, पृष्ठप्रदेश से रेल संपर्क, जूट प्रसंस्करण, दामोदर कोयला क्षेत्रों और पूर्वी भारत के श्रम पर टिका। छोटानागपुर खनिज औद्योगिक क्षेत्र कोयला, लौह अयस्क, जल, रेल और पठारी खनिज आधार से बढ़ा। राजस्थान में भीलवाड़ा वस्त्र, सीमेंट पट्टियाँ, पत्थर उद्योग और गलियारा-संबद्ध औद्योगिक क्षेत्र तटीय नहीं हैं, फिर भी कच्चा माल, बाजार मार्ग, शक्ति और राज्य औद्योगिक क्षेत्रों से क्लस्टर बनाते हैं। काली कपासी मिट्टी और पश्चिमी वस्त्र उद्योग का स्थान कपास-वस्त्र का आधार बताते हैं, जबकि छोटानागपुर लाल-लेटराइट खनिज पट्टी इस्पात और भारी इंजीनियरिंग का आधार देती है। राष्ट्रीय ढाँचे में पश्चिमी कपास-बंदरगाह पट्टी, पूर्वी नदी-जूट पट्टी, खनिज-इस्पात पट्टी, दक्षिणी गलियारा-बंदरगाह पट्टी, उत्तरी बाजार क्लस्टर और राजस्थान के लॉजिस्टिक्स-आधारित नोड आते हैं। बिजली, सड़क, पाइपलाइन, बंदरगाह और कुशल सेवाएँ बढ़ने पर पुराने कच्चा-माल प्रतिबंध घटते हैं। राजस्थान का सूखा औद्योगिक भूगोल इसी ढाँचे में गलियारा और बाजार-आधारित पक्ष से बेहतर समझ आता है।
