मूल दक्षिण-पश्चिम मानसून का आगमन और शाखाएँ
केरल पर दक्षिण-पश्चिम मानसून का आगमन भारत के वर्षा ऋतु का परिचालन आरंभ है, कोई स्थिर ऐतिहासिक घटना नहीं। भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्यतः 1 जून के आसपास केरल पहुँचता है और झोंकों में उत्तर की ओर बढ़ते हुए लगभग मध्य जुलाई तक पूरे देश को ढकता है। आगमन घोषित करने के लिए केरल और आसपास के 14 स्टेशनों की वर्षा, पवन क्षेत्र और दक्षिण-पूर्व अरब सागर के दीर्घतरंग विकिरण को देखा जाता है। इसके बाद अरब सागर शाखा पश्चिमी घाट से टकराकर पवनाभिमुख भाग में भारी वर्षा देती है, जबकि बंगाल की खाड़ी शाखा उत्तर-पूर्व में जाकर गंगा मैदान की ओर मुड़ती है। राजस्थान में इसका प्रभाव अप्रत्यक्ष है: सौराष्ट्र और कच्छ से गुजरती अरब सागर धारा पश्चिमी राजस्थान तक कमजोर हो जाती है और उत्तरी मैदानों में वर्षा पूर्व से पश्चिम घटती है।
