मूल भारतीय संरक्षण क्षेत्रों का विधिक मानचित्र
भारत की संरक्षण-क्षेत्र व्यवस्था पहले विधिक वर्गों पर और उसके बाद पारिस्थितिकी लेबलों पर आधारित है। वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के संरक्षण क्षेत्र वर्ग राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव अभयारण्य, संरक्षण आरक्षित क्षेत्र और सामुदायिक आरक्षित क्षेत्र को शामिल करते हैं; राष्ट्रीय उद्यान में सामान्य मानवीय गतिविधि तभी हो सकती है जब मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक अधिनियम के अंतर्गत अनुमति दे। भारतीय वन्यजीव संस्थान के राष्ट्रीय वन्यजीव डेटाबेस में भारत में 106 राष्ट्रीय उद्यान दिए गए हैं, इसलिए विधिक वर्ग और वर्तमान राष्ट्रीय सूची साथ-साथ समझे जाते हैं। वन्यजीव (संरक्षण) संशोधन अधिनियम, 2002 से संरक्षण आरक्षित क्षेत्र और सामुदायिक आरक्षित क्षेत्र जोड़े गए ताकि स्थापित संरक्षण क्षेत्रों के बफर, संपर्क और प्रवास गलियारे बचाए जा सकें। राजस्थान में यह अंतर स्पष्ट है: भरतपुर स्थित केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान राष्ट्रीय उद्यान और विश्व धरोहर आर्द्रभूमि दोनों है, जबकि सरिस्का और रणथंभौर के आसपास समुदाय-आधारित गलियारे महत्त्वपूर्ण हैं क्योंकि वन्यजीव आवाजाही अधिसूचित सीमा पर नहीं रुकती।
