इस्पात मंत्रालय का वित्त वर्ष 2025-26 का वर्षांत प्रदर्शन प्रतिवेदन 7 मई 2026 को रेखांकित किया गया, जिसमें कच्चे इस्पात उत्पादन में 10.7 प्रतिशत वृद्धि, तैयार इस्पात निर्यात में 35.8 प्रतिशत बढ़ोतरी और आयात में 46.5 प्रतिशत गिरावट दिखाई गई
7 मई 2026 को रेखांकित इस्पात मंत्रालय के वित्त वर्ष 2025-26 के वर्षांत आंकड़े दिखाते हैं कि तैयार इस्पात उत्पादन 160.9 मिलियन टन (9.7 प्रतिशत अधिक), कच्चे इस्पात में 10.7 प्रतिशत वृद्धि, निर्यात में 35.8 प्रतिशत बढ़ोतरी और आयात में 46.5 प्रतिशत गिरावट हुई, जिससे भारत पुनः शुद्ध इस्पात निर्यातक बना।
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RAS के लिए मुख्य बिंदु
- वित्त वर्ष 2025-26 में तैयार इस्पात उत्पादन 160.9 मिलियन टन रहा, जो साल-दर-साल 9.7 प्रतिशत की वृद्धि है
- कच्चे इस्पात उत्पादन में साल-दर-साल 10.7 प्रतिशत की वृद्धि होकर लगभग 168.4 मिलियन टन तक पहुंचा
- तैयार इस्पात निर्यात साल-दर-साल 35.8 प्रतिशत बढ़ा और आयात 46.5 प्रतिशत घटा; भारत ने पुनः शुद्ध इस्पात निर्यातक का दर्जा प्राप्त किया
- मार्च 2026 में शीर्ष निर्यात गंतव्य वियतनाम, बेल्जियम और ताइवान रहे, जो मिलकर कुल तैयार इस्पात निर्यात के 50 प्रतिशत से अधिक का हिस्सा थे
- स्थापित क्षमता लगभग 220 MTPA, 2030 तक 300 MTPA के राष्ट्रीय इस्पात नीति लक्ष्य की दिशा में कायम; 31 मार्च 2026 तक हरित इस्पात वर्गीकरण के तहत 90 उत्पादक प्रमाणित
इस्पात मंत्रालय का वित्त वर्ष 2025-26 का वर्षांत प्रदर्शन सारांश, जिसे 7 मई 2026 को नीति वार्ताओं में प्रमुखता से रेखांकित किया गया, दर्शाता है कि भारत ने वर्ष के दौरान 160.9 मिलियन टन तैयार इस्पात का उत्पादन किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 9.7 प्रतिशत की वृद्धि है, जबकि कच्चे इस्पात उत्पादन में साल-दर-साल 10.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी होकर लगभग 168.4 मिलियन टन तक पहुंचा। तैयार इस्पात के निर्यात में पिछले वर्ष की तुलना में 35.8 प्रतिशत की उछाल आई, जिससे भारत को पुनः शुद्ध-निर्यातक का दर्जा प्राप्त हुआ, जबकि आयात में 46.5 प्रतिशत की तीव्र गिरावट आई। केवल मार्च 2026 में इस्पात उत्पादन मार्च 2025 की तुलना में 2.2 प्रतिशत बढ़ा, और पूरे वित्त वर्ष का संचयी सूचकांक 9.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज करता है। मार्च 2026 में भारत के तैयार इस्पात के शीर्ष निर्यात गंतव्य वियतनाम, बेल्जियम और ताइवान रहे, जो मिलकर कुल तैयार इस्पात निर्यात के 50 प्रतिशत से अधिक का हिस्सा थे। भारत की स्थापित इस्पात क्षमता लगभग 220 मिलियन टन प्रति वर्ष पर बनी हुई है और 2030 तक 300 मिलियन टन प्रति वर्ष के राष्ट्रीय इस्पात नीति लक्ष्य की दिशा में कायम है। हरित इस्पात के क्षेत्र में 31 मार्च 2026 तक 90 उत्पादकों को हरित इस्पात वर्गीकरण के तहत प्रमाणित किया गया, और टाटा स्टील ने लुधियाना में 3,200 करोड़ रुपये की 0.75 मिलियन टन प्रति वर्ष क्षमता वाला स्क्रैप-आधारित विद्युत आर्क भट्टी हरित इस्पात संयंत्र चालू किया, जो पंजाब में अपनी तरह का पहला है। प्रमुख कंपनियों SAIL, टाटा स्टील, JSW स्टील, JSPL और AMNS ने क्षमता विस्तार जारी रखा, यद्यपि लौह अयस्क और कोकिंग कोयले की बढ़ती लागत मार्जिन पर दबाव डाल रही है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1 वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का तैयार इस्पात उत्पादन कितना रहा?
भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में 160.9 मिलियन टन तैयार इस्पात का उत्पादन किया, जो इस्पात मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार साल-दर-साल 9.7 प्रतिशत की वृद्धि है।
2 वित्त वर्ष 2025-26 में तैयार इस्पात के निर्यात और आयात में कितना बदलाव हुआ?
तैयार इस्पात के निर्यात में 35.8 प्रतिशत की उछाल आई जबकि आयात में 46.5 प्रतिशत की गिरावट हुई, जिससे भारत को पुनः शुद्ध इस्पात निर्यातक का दर्जा मिला।
3 राष्ट्रीय इस्पात नीति का 2030 के लिए क्षमता लक्ष्य क्या है?
राष्ट्रीय इस्पात नीति 2030 तक 300 मिलियन टन प्रति वर्ष की स्थापित इस्पात क्षमता का लक्ष्य रखती है; वर्तमान स्थापित क्षमता लगभग 220 MTPA है।
4 भारत हरित इस्पात पर कैसे आगे बढ़ रहा है?
31 मार्च 2026 तक हरित इस्पात वर्गीकरण के तहत 90 उत्पादक प्रमाणित किए गए और टाटा स्टील ने लुधियाना में 0.75 MTPA की स्क्रैप-आधारित विद्युत आर्क भट्टी हरित इस्पात संयंत्र चालू की, जो पंजाब का पहला ऐसा संयंत्र है।
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