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दैनिक समसामयिकी
DD News (Prasar Bharati) 25 दिसंबर 2025 international

भारत ने 25 दिसंबर 2025 को किम्बर्ली प्रक्रिया का उप-अध्यक्ष पद ग्रहण किया; 2026 में वैश्विक हीरा प्रमाणन निकाय की अध्यक्षता कर रहा है

भारत 25 दिसंबर 2025 को किम्बर्ली प्रक्रिया प्रमाणन योजना का उप-अध्यक्ष बना और 1 जनवरी 2026 से अध्यक्षता कर रहा है — यह उसकी तीसरी अध्यक्षता है। यह योजना 60 से अधिक प्रतिभागियों और वैश्विक कच्चे हीरे के व्यापार के 99 प्रतिशत को कवर करती है; भारत डिजिटल प्रमाणन, पता लगाने की क्षमता और पारदर्शिता पर ज़ोर देगा।

DD News (Prasar Bharati) आधिकारिक

ddnews.gov.in

RAS के लिए मुख्य बिंदु

  • भारत ने 25 दिसंबर 2025 को किम्बर्ली प्रक्रिया प्रमाणन योजना का उप-अध्यक्ष पद ग्रहण किया
  • भारत 1 जनवरी 2026 से अध्यक्षता संभाल रहा है — KP नेतृत्व में तीसरी बार
  • KPCS 1 जनवरी 2003 से चालू; 60 से अधिक प्रतिभागी तथा वैश्विक कच्चे हीरे के व्यापार का 99 प्रतिशत कवर
  • भारत की चार प्राथमिकताएँ: शासन/अनुपालन, डिजिटल प्रमाणन/पता लगाना, डेटा-आधारित निगरानी से पारदर्शिता, संघर्ष-मुक्त हीरों में उपभोक्ता विश्वास
  • पीयूष गोयल ने निर्णय का स्वागत किया; भारत विश्व का सबसे बड़ा हीरा कटिंग और पॉलिशिंग केंद्र है

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की घोषणा के अनुसार, भारत ने 25 दिसंबर 2025 को किम्बर्ली प्रक्रिया प्रमाणन योजना (KPCS) का उप-अध्यक्ष पद औपचारिक रूप से ग्रहण कर लिया है और 1 जनवरी 2026 से अध्यक्षता कर रहा है। यह तीसरा अवसर है जब भारत को इस वैश्विक पहल के नेतृत्व की ज़िम्मेदारी सौंपी गई है, जो ज़िम्मेदार हीरा व्यापार शासन में देश के बढ़ते कद को रेखांकित करता है।

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि भारत का चयन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की अखंडता, पारदर्शिता और ज़िम्मेदार व्यापार-प्रथाओं के प्रति प्रतिबद्धता पर वैश्विक समुदाय के विश्वास को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि भारत अपनी अध्यक्षता का उपयोग KPCS को एक सुदृढ़, भविष्य-उन्मुख और प्रौद्योगिकी-संचालित ढाँचे के रूप में मज़बूत करने के लिए करेगा, जो वर्तमान वास्तविकताओं के अनुरूप हो।

किम्बर्ली प्रक्रिया एक त्रिपक्षीय व्यवस्था है जिसमें सरकारें, अंतरराष्ट्रीय हीरा उद्योग और नागरिक समाज शामिल हैं; यह संयुक्त राष्ट्र संकल्प के तहत स्थापित की गई। यह योजना 1 जनवरी 2003 से चालू है और इसमें 60 से अधिक प्रतिभागी हैं — यूरोपीय संघ और उसके सदस्य राज्यों को एक प्रतिभागी के रूप में गिना जाता है — जो वैश्विक कच्चे हीरे के व्यापार का 99 प्रतिशत से अधिक हिस्सा कवर करते हैं।

अपनी अध्यक्षता के दौरान भारत ने चार प्राथमिकताएँ तय की हैं — शासन और अनुपालन को मज़बूत करना, डिजिटल प्रमाणन तथा पता लगाने की क्षमता को आगे बढ़ाना, डेटा-आधारित निगरानी से पारदर्शिता बढ़ाना, और संघर्ष-मुक्त हीरों में उपभोक्ता विश्वास निर्मित करना। भारत विश्व का सबसे बड़ा कटिंग और पॉलिशिंग केंद्र है, जिससे यह नेतृत्व भूमिका वैश्विक हीरा आपूर्ति शृंखला तथा भारत के रत्न एवं आभूषण क्षेत्र के लगभग दस लाख कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण है; इसके प्रमुख हब गुजरात के सूरत सहित कई राज्य हैं।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1 भारत किम्बर्ली प्रक्रिया की अध्यक्षता कब ग्रहण करता है?

भारत ने 25 दिसंबर 2025 को उप-अध्यक्ष पद ग्रहण किया और 1 जनवरी 2026 से अध्यक्षता संभाल रहा है।

2 किम्बर्ली प्रक्रिया प्रमाणन योजना क्या है?

यह सरकारों, हीरा उद्योग और नागरिक समाज की त्रिपक्षीय व्यवस्था है जिसे संघर्ष हीरों के व्यापार को रोकने हेतु संयुक्त राष्ट्र संकल्प के तहत स्थापित किया गया, जो 1 जनवरी 2003 से चालू है।

3 किम्बर्ली प्रक्रिया में कितने प्रतिभागी हैं?

KPCS में 60 से अधिक प्रतिभागी हैं (यूरोपीय संघ और सदस्य राज्यों को एक के रूप में गिना जाता है), जो वैश्विक कच्चे हीरे के व्यापार का 99 प्रतिशत से अधिक कवर करते हैं।

4 अध्यक्ष के रूप में भारत की प्राथमिकताएँ क्या हैं?

चार प्राथमिकताएँ: शासन और अनुपालन सुदृढ़ करना, डिजिटल प्रमाणन एवं पता लगाने की क्षमता बढ़ाना, डेटा-आधारित निगरानी से पारदर्शिता बढ़ाना, और संघर्ष-मुक्त हीरों में उपभोक्ता विश्वास निर्मित करना।

Mains दृष्टिकोण

RAS Mains के लिए अभ्यास प्रश्न एवं आदर्श उत्तर

प्रश्न: किम्बर्ली प्रक्रिया की भारतीय अध्यक्षता का मूल्यांकन।

उत्तर (50 शब्द):
भारत ने 25 दिसंबर 2025 को किम्बर्ली प्रक्रिया प्रमाणन योजना का उप-अध्यक्ष ग्रहण किया तथा 1 जनवरी 2026 से अध्यक्षता करेगा — तीसरी अध्यक्षता। 2003 से क्रियाशील केपीसीएस 60 से अधिक प्रतिभागियों एवं कच्चे हीरे के 99 प्रतिशत व्यापार को कवर करती। प्राथमिकताएं डिजिटल प्रमाणन, अनुरेखण, पारदर्शिता, उपभोक्ता विश्वास; सूरत केंद्र लाभार्थी।

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