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दैनिक समसामयिकी
Ministry of Defence via PIB 1 मई 2026 governance

रक्षा मंत्रालय ने कहा कि अनुग्रह नारायण दास ने 1 मई 2026 को रक्षा लेखा महानियंत्रक का पदभार संभाला

रक्षा मंत्रालय ने कहा कि भारतीय रक्षा लेखा सेवा के 1991 बैच के अधिकारी अनुग्रह नारायण दास ने 1 मई 2026 को रक्षा लेखा महानियंत्रक का पदभार संभाला। उनकी पृष्ठभूमि में रक्षा वित्तीय प्रबंधन, खरीद नीति, लेखा-परीक्षा निगरानी, बजट और व्यय निगरानी में तीन दशक से अधिक का अनुभव है, साथ ही रक्षा मंत्रालय, सेना मुख्यालय और रक्षा लेखा महानियंत्रक मुख्यालय में सेवा तथा सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन का अनुभव शामिल है।

Ministry of Defence via PIB आधिकारिक

pib.gov.in

RAS के लिए मुख्य बिंदु

  • अनुग्रह नारायण दास ने 1 मई 2026 से रक्षा लेखा महानियंत्रक का पदभार संभाला।
  • वे भारतीय रक्षा लेखा सेवा के 1991 बैच के अधिकारी हैं और तीन दशक से अधिक का अनुभव रखते हैं।
  • उनका अनुभव रक्षा वित्तीय प्रबंधन, खरीद नीति, लेखा-परीक्षा और निगरानी तंत्र, बजट तथा व्यय निगरानी से जुड़ा है।
  • वे उत्कल विश्वविद्यालय, भुवनेश्वर और ल्युब्लियाना विश्वविद्यालय के आईसीपीई के पूर्व छात्र हैं।
  • उन्होंने आईआईएम बेंगलुरु और ड्यूक विश्वविद्यालय सहित संस्थानों से उन्नत प्रशिक्षण प्राप्त किया।
  • उन्होंने रक्षा मंत्रालय, सेवा मुख्यालयों और क्षेत्रीय संरचनाओं में काम किया है, जिनमें सेना मुख्यालय और रक्षा लेखा महानियंत्रक मुख्यालय शामिल हैं।

रक्षा मंत्रालय ने 1 मई 2026 को बताया कि श्री अनुग्रह नारायण दास ने उसी तारीख से रक्षा लेखा महानियंत्रक का पदभार संभाल लिया। वे भारतीय रक्षा लेखा सेवा के 1991 बैच के अधिकारी हैं और रक्षा वित्तीय प्रबंधन तथा सार्वजनिक सेवा में तीन दशक से अधिक का अनुभव रखते हैं। यह नियुक्ति शासन के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि रक्षा लेखा बजट, व्यय निगरानी, लेखा-परीक्षा समर्थन और वित्तीय सलाह को केंद्र सरकार के सबसे बड़े सामरिक क्षेत्रों में से एक से जोड़ता है।

विज्ञप्ति में दर्ज है कि श्री दास उत्कल विश्वविद्यालय, भुवनेश्वर और ल्युब्लियाना विश्वविद्यालय के आईसीपीई के पूर्व छात्र हैं। इसमें आईआईएम बेंगलुरु और ड्यूक विश्वविद्यालय सहित संस्थानों से उन्नत प्रशिक्षण का भी उल्लेख है। मंत्रालय ने उनके करियर में खरीद नीति, लेखा-परीक्षा और निगरानी तंत्र, बजट तथा व्यय निगरानी से जुड़ी पहलों का उल्लेख किया। ये क्षेत्र सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन के केंद्र में हैं क्योंकि खरीद और बजट नियंत्रण यह तय करते हैं कि स्वीकृत रक्षा खर्च समय पर, जवाबदेह और नियमों के अनुरूप हो।

श्री दास ने रक्षा मंत्रालय, सेवा मुख्यालयों और क्षेत्रीय संरचनाओं में काम किया है। उनकी प्रमुख नियुक्तियों में जल संसाधन मंत्रालय में निदेशक, रक्षा मंत्रालय में अतिरिक्त वित्तीय सलाहकार और संयुक्त सचिव, सेना मुख्यालय में प्रधान एकीकृत वित्तीय सलाहकार तथा रक्षा लेखा महानियंत्रक मुख्यालय में विशेष रक्षा लेखा महानियंत्रक शामिल हैं। यह क्रम नीति, मुख्यालय और परिचालन वित्तीय-प्रशासनिक व्यवस्थाओं में अनुभव दिखाता है।

परीक्षा के उद्देश्य से यह घटना केवल कार्मिक परिवर्तन नहीं है। यह रक्षा प्रशासन में विशेषज्ञ सिविल सेवाओं के संस्थागत महत्व को रेखांकित करती है। रक्षा लेखा संगठन लेखांकन, लेखा-परीक्षा से जुड़े निगरानी कार्य, वित्तीय सलाह और व्यय निगरानी के माध्यम से सार्वजनिक धन के अनुशासित उपयोग को सहारा देता है। इसलिए रक्षा लेखा महानियंत्रक स्तर पर नेतृत्व परिवर्तन का प्रभाव खरीद शासन, बजट क्रियान्वयन और रक्षा वित्तीय प्रणालियों में पारदर्शिता पर पड़ता है।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1 1 मई 2026 को रक्षा लेखा महानियंत्रक का पदभार किसने संभाला?

श्री अनुग्रह नारायण दास ने रक्षा लेखा महानियंत्रक का पदभार संभाला।

2 अनुग्रह नारायण दास किस सेवा से संबंधित हैं?

वे भारतीय रक्षा लेखा सेवा के 1991 बैच के अधिकारी हैं।

3 उनके अनुभव के प्रमुख क्षेत्र कौन से हैं?

उनका अनुभव रक्षा वित्तीय प्रबंधन, खरीद नीति, लेखा-परीक्षा और निगरानी तंत्र, बजट तथा व्यय निगरानी में है।

4 उन्होंने रक्षा प्रशासन में कौन से प्रमुख पद संभाले हैं?

उन्होंने रक्षा मंत्रालय में अतिरिक्त वित्तीय सलाहकार और संयुक्त सचिव, सेना मुख्यालय में प्रधान एकीकृत वित्तीय सलाहकार तथा विशेष रक्षा लेखा महानियंत्रक के रूप में सेवा दी है।

5 यह पद शासन के लिए क्यों प्रासंगिक है?

यह रक्षा लेखांकन, वित्तीय सलाह, व्यय निगरानी और सार्वजनिक धन की जवाबदेही के लिए केंद्रीय महत्व रखता है।

पाठ्यक्रम विषय

Subjects

लोक प्रशासनआंतरिक सुरक्षा