भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 6.05 गीगावाट पवन ऊर्जा जोड़ी, कुल पवन क्षमता 56 गीगावाट के पार
भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 6.05 गीगावाट पवन ऊर्जा क्षमता जोड़ी, जो अब तक की सबसे बड़ी वार्षिक वृद्धि है। कुल पवन क्षमता 56 गीगावाट के पार हो गई है और यह 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म लक्ष्य के करीब ले गई है। गुजरात, तमिलनाडु, कर्नाटक और महाराष्ट्र ने वृद्धि में अग्रणी भूमिका निभाई।
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RAS के लिए मुख्य बिंदु
- वित्त वर्ष 2025-26 में पवन ऊर्जा वृद्धि: 6.05 गीगावाट, भारत के इतिहास की सबसे अधिक
- पिछला रिकॉर्ड वित्त वर्ष 2016-17 में 5.5 गीगावाट था; वित्त वर्ष 2025-26 वित्त वर्ष 2024-25 से 46 प्रतिशत अधिक है
- भारत की कुल स्थापित पवन क्षमता 56 गीगावाट के पार
- गुजरात, तमिलनाडु, कर्नाटक और महाराष्ट्र अग्रणी योगदानकर्ता रहे
- एनडीसी के तहत 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित विद्युत क्षमता लक्ष्य में सहायक
- नीतिगत समर्थन में जून 2028 तक आईएसटीएस छूट, रियायती सीमा शुल्क और पृथक विंड आरसीओ शामिल हैं
नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) और प्रेस सूचना ब्यूरो द्वारा अप्रैल 2026 के प्रारंभ में जारी आँकड़ों के अनुसार, भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान अब तक की सबसे अधिक वार्षिक पवन ऊर्जा क्षमता वृद्धि 6.05 गीगावाट दर्ज की है। यह उपलब्धि वित्त वर्ष 2016-17 में जोड़ी गई 5.5 गीगावाट के पिछले रिकॉर्ड को पार करती है और वित्त वर्ष 2024-25 की तुलना में लगभग 46 प्रतिशत अधिक है। इस उपलब्धि के साथ भारत की कुल स्थापित पवन ऊर्जा क्षमता अब 56 गीगावाट के पार चली गई है, जिससे भारत चीन, संयुक्त राज्य अमेरिका और जर्मनी के बाद विश्व का चौथा सबसे बड़ा पवन ऊर्जा बाजार बना हुआ है। यह उपलब्धि पेरिस समझौते के तहत देश की राष्ट्रीय निर्धारित योगदान (एनडीसी) के अनुरूप 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित विद्युत क्षमता के लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देती है। गुजरात, तमिलनाडु, कर्नाटक और महाराष्ट्र जैसे राज्यों ने नई क्षमता वृद्धि में मुख्य योगदान दिया है, जिसे पवन-सौर हाइब्रिड परियोजनाओं की बढ़ती पाइपलाइन और हरित ऊर्जा ओपन एक्सेस नियमों के प्रगतिशील क्रियान्वयन का समर्थन प्राप्त है। सरकार ने पवन टरबाइन विनिर्माण में प्रयुक्त कुछ घटकों और कच्चे माल पर रियायती सीमा शुल्क, जून 2028 तक चालू की जाने वाली परियोजनाओं के लिए अंतर-राज्यीय पारेषण प्रणाली (आईएसटीएस) शुल्क में श्रेणीबद्ध छूट, प्रतिस्पर्धी टैरिफ बोली प्रक्रिया, तथा पृथक पवन नवीकरणीय खपत दायित्व (आरसीओ) ढाँचे के माध्यम से इस क्षेत्र को समर्थन दिया है जिसमें वितरण कंपनियों को न्यूनतम निर्धारित हिस्सा पवन बिजली से खरीदना होता है। एमएनआरई ने पवन टरबाइन घटकों के घरेलू विनिर्माण की बढ़ती हिस्सेदारी को भी रेखांकित किया, जो स्वच्छ ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में भारत की आत्मनिर्भर भारत आकांक्षाओं को बल देती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1 वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने कितनी पवन ऊर्जा क्षमता जोड़ी है?
भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 6.05 गीगावाट पवन ऊर्जा क्षमता जोड़ी, जो उसकी अब तक की सबसे अधिक वार्षिक वृद्धि है।
2 भारत की कुल पवन ऊर्जा क्षमता अब कितनी है?
कुल स्थापित पवन ऊर्जा क्षमता अब 56 गीगावाट के पार चली गई है।
3 किन राज्यों ने क्षमता वृद्धि का नेतृत्व किया?
गुजरात, तमिलनाडु, कर्नाटक और महाराष्ट्र मुख्य योगदानकर्ता रहे।
4 यह भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं में कैसे मदद करता है?
यह पेरिस समझौते के तहत भारत के एनडीसी के अनुरूप 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित विद्युत क्षमता के लक्ष्य में सहायक है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण
RAS मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न एवं आदर्श उत्तर
प्रश्न: वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की 6.05 गीगावाट पवन ऊर्जा क्षमता वृद्धि की समीक्षा कीजिए तथा अद्यतन राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान के तहत 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन लक्ष्य प्राप्ति में इसके योगदान का विश्लेषण कीजिए।
उत्तर (50 शब्द):
भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 6.05 गीगावाट पवन क्षमता जोड़ी, वित्त वर्ष 2016-17 के 5.5 गीगावाट को पार किया तथा वित्त वर्ष 2024-25 की तुलना 46 प्रतिशत अधिक। कुल पवन क्षमता 56 गीगावाट पार, भारत चीन, अमेरिका, जर्मनी के बाद विश्व में चौथे स्थान पर। गुजरात, तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र अग्रणी।
संबंधित पूर्व वर्ष प्रश्न
संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क कन्वेंशन (UNFCCC) को भारत द्वारा प्रस्तुत अद्यतन राष्ट्रीय निर्धारित योगदान (NDC) की संक्षेप में विवेचना कीजिए।
संबंध: दोनों प्रत्यक्ष रूप से भारत के राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान तथा पेरिस समझौते के तहत 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म लक्ष्य पर केंद्रित हैं।
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