ISRO ने 13 मार्च 2026 को बताया कि नेविगेशन उपग्रह आईआरएनएसएस-1एफ पर लगी परमाणु घड़ी ने काम करना बंद कर दिया। यह उपग्रह मार्च 2016 में लॉन्च हुआ था और 10 मार्च 2026 को अपनी निर्धारित 10 साल की मिशन अवधि पूरी कर चुका था। घड़ी बंद होने के बाद भी उपग्रह कक्षा में रहेगा और सामाजिक उपयोगों के लिए एकतरफा प्रसारण संदेश सेवाएं देता रहेगा, लेकिन नेविगेशन में उसका योगदान प्रभावित माना जाएगा।

नाविक भारत की क्षेत्रीय उपग्रह नेविगेशन प्रणाली है। परीक्षा में इसका महत्व इसलिए है कि यह उपग्रह नेविगेशन, समय-सेवा और भारत के स्वदेशी अंतरिक्ष कार्यक्रम को एक मौजूदा घटना से जोड़ता है। ISRO के प्रकाशन के अनुसार नाविक को भारत और उसके आसपास 1500 किलोमीटर तक के क्षेत्र में स्थिति-निर्धारण, नेविगेशन और समय सेवा देने के लिए डिजाइन किया गया है। प्राथमिक सेवा क्षेत्र में उपयोगकर्ताओं के लिए 7 नाविक उपग्रह उपलब्ध रहना प्रणाली की डिजाइन का हिस्सा है।

परमाणु घड़ी उपग्रह नेविगेशन की मुख्य तकनीक है, क्योंकि रिसीवर अपनी स्थिति निकालने के लिए बहुत सटीक समय संकेतों पर निर्भर करता है। इसलिए आईआरएनएसएस-1एफ की घड़ी विफलता से यह सीख मिलती है कि किसी उपग्रह समूह की विश्वसनीयता केवल उपग्रह संख्या से नहीं, बल्कि भरोसेमंद समय-संकेत और जमीनी तंत्र के संचालन से भी तय होती है। परीक्षा की दृष्टि से इस घटना से प्रारंभिक परीक्षा में आईआरएनएसएस-1एफ, नाविक, 7 उपग्रह, 13 मार्च 2026 और परमाणु घड़ियों की भूमिका पूछी जा सकती है। स्टैटिक जीके में इसे उपग्रह नेविगेशन, स्वदेशी अंतरिक्ष कार्यक्रम और समय-निर्धारण तकनीक से जोड़कर पढ़ना चाहिए।