केंद्रीय बंदरगाह, नौवहन एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने 4 मार्च 2026 को असम में ब्रह्मपुत्र नदी के तटों पर चार नदीय प्रकाशस्तंभों की आधारशिला रखी, जिससे देश में पहली बार किसी अंतर्देशीय जलमार्ग पर प्रकाशस्तंभों से जुड़ी अवसंरचना स्थापित हो रही है। यह समारोह गुवाहाटी के लाचित घाट पर हुआ और इसका संयुक्त आयोजन प्रकाशस्तंभ एवं दीपपोत महानिदेशालय (डीजीएलएल) तथा भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (आईडब्ल्यूएआई) ने किया। चार स्थल हैं: डिब्रूगढ़ ज़िले का बोगीबील, कामरूप (मेट्रो) ज़िले का पांडु, नगाँव ज़िले का सिलघाट — ये तीनों नदी के दक्षिणी तट पर हैं — तथा विश्वनाथ ज़िले का विश्वनाथ घाट, जो उत्तरी तट पर एकमात्र स्थल है। ये स्थान ब्रह्मपुत्र के रणनीतिक बिंदुओं पर स्थित हैं, जिसे राष्ट्रीय जलमार्ग-2 घोषित किया गया है। प्रत्येक प्रकाशस्तंभ सौर ऊर्जा से संचालित होगा और नौवहन में मदद करने वाले उपकरणों से सुसज्जित होगा, जिससे माल एवं यात्री जहाज़ों की चौबीसों घंटे सुरक्षित आवाजाही संभव होगी, साथ ही मौसम अवलोकन सेंसर भी लगे होंगे। परियोजना का कुल परिव्यय लगभग 84 करोड़ रुपये है और प्रत्येक प्रकाशस्तंभ को भू-तकनीकी जाँच, स्थलाकृतिक सर्वेक्षण एवं विस्तृत डिज़ाइन के बाद अनुबंध दिए जाने से 24 माह के भीतर पूर्ण करने का लक्ष्य है। संरचनाओं में संग्रहालय, एम्फीथिएटर एवं दर्शक दीर्घा जैसी पर्यटन सुविधाएँ भी शामिल होंगी, जिससे पूर्वोत्तर में प्रकाशस्तंभ पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। यह पहल राष्ट्रीय जलमार्ग-2 पर माल एवं यात्री यातायात की सतत वृद्धि में मदद करेगी, जो पूर्वोत्तर के लिए कम-उत्सर्जन कनेक्टिविटी के रूप में अंतर्देशीय जल परिवहन के विस्तार के लिए सरकार के प्रयास का केंद्रीय हिस्सा है।
सर्बानंद सोनोवाल ने ब्रह्मपुत्र राष्ट्रीय जलमार्ग-2 पर भारत के पहले नदीय प्रकाशस्तंभों की आधारशिला रखी
सर्बानंद सोनोवाल ने 4 मार्च 2026 को ब्रह्मपुत्र पर राष्ट्रीय जलमार्ग-2 के बोगीबील, पांडु, सिलघाट और विश्वनाथ घाट पर चार नदीय प्रकाशस्तंभों की आधारशिला 84 करोड़ रुपये के परिव्यय से रखी — किसी अंतर्देशीय जलमार्ग पर भारत की ऐसी पहली अवसंरचना।
मुख्य तथ्य
- केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने 4 मार्च 2026 को गुवाहाटी के लाचित घाट पर ब्रह्मपुत्र (राष्ट्रीय जलमार्ग-2) पर चार नदीय प्रकाशस्तंभों की आधारशिला रखी — यह किसी अंतर्देशीय जलमार्ग पर भारत की पहली प्रकाशस्तंभ अवसंरचना है।
- चार स्थल हैं: दक्षिणी तट पर बोगीबील (डिब्रूगढ़), पांडु (कामरूप मेट्रो), सिलघाट (नगाँव) और उत्तरी तट पर विश्वनाथ घाट (विश्वनाथ)
- कुल परियोजना परिव्यय 84 करोड़ रुपये है; प्रत्येक प्रकाशस्तंभ सौर ऊर्जा से संचालित होगा, नौवहन सहायक उपकरण एवं मौसम सेंसर से सुसज्जित होगा तथा चौबीसों घंटे जहाज़ों की सुरक्षित आवाजाही संभव बनाएगा
- प्रकाशस्तंभ एवं दीपपोत महानिदेशालय (डीजीएलएल) तथा भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (आईडब्ल्यूएआई) का संयुक्त आयोजन; हर प्रकाशस्तंभ को अनुबंध के बाद 24 माह में पूरा करने का लक्ष्य
- संरचनाओं में पर्यटन सुविधाएँ जैसे संग्रहालय, एम्फीथिएटर एवं दर्शक दीर्घा शामिल होंगी, जो पूर्वोत्तर में प्रकाशस्तंभ पर्यटन को बढ़ावा देंगी
मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: अंतर्देशीय जल परिवहन एवं पूर्वोत्तर कनेक्टिविटी के लिए राष्ट्रीय जलमार्ग-2 पर भारत के पहले नदीय प्रकाशस्तंभों के महत्त्व का परीक्षण कीजिए।
उत्तर (50 शब्द):
4 मार्च 2026 को सर्बानंद सोनोवाल ने ब्रह्मपुत्र राष्ट्रीय जलमार्ग-2 के बोगीबील, पांडु, सिलघाट एवं विश्वनाथ घाट पर चार सौर-संचालित नदीय प्रकाशस्तंभों की आधारशिला 84 करोड़ रुपये परिव्यय से रखी। नौवहन सहायता उपकरणों एवं मौसम सेंसर से युक्त ये प्रकाशस्तंभ चौबीसों घंटे माल और यात्रियों की आवाजाही तथा 24 माह में कम उत्सर्जन वाली पूर्वोत्तर कनेक्टिविटी सुनिश्चित करेंगे।
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5 मार्च 2026 को केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने भारत के पहले नदी प्रकाशस्तंभों की आधारशिला किस राष्ट्रीय जलमार्ग पर रखी?
चार नदीय प्रकाशस्तंभ — बोगीबील, पांडु, सिलघाट और विश्वनाथ घाट पर — ब्रह्मपुत्र के किनारे बन रहे हैं, जिसे राष्ट्रीय जलमार्ग-2 (एनडब्ल्यू-2) घोषित किया गया है। एनडब्ल्यू-1 गंगा है, एनडब्ल्यू-3 केरल में पश्चिमी तट नहर है और एनडब्ल्यू-5 ओडिशा में महानदी-ब्राह्मणी है।
स्रोत: PIB
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
ब्रह्मपुत्र प्रकाशस्तंभ परियोजना को भारत में पहली क्यों बताया जा रहा है?
यह पहली बार है जब देश में किसी अंतर्देशीय जलमार्ग पर प्रकाशस्तंभ अवसंरचना स्थापित की जाएगी। इससे पहले भारत में प्रकाशस्तंभ समुद्री तटों पर बनाए गए हैं; ब्रह्मपुत्र पर चार प्रकाशस्तंभ पहली नदीय तैनाती हैं, जो राष्ट्रीय जलमार्ग-2 पर स्थित हैं।
इस परियोजना को कौन-सी एजेंसियाँ संयुक्त रूप से क्रियान्वित कर रही हैं?
बंदरगाह, नौवहन एवं जलमार्ग मंत्रालय के अधीन प्रकाशस्तंभ एवं दीपपोत महानिदेशालय (डीजीएलएल) और भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (आईडब्ल्यूएआई) मिलकर यह परियोजना चला रहे हैं।
चार प्रकाशस्तंभ स्थल कौन-से हैं?
चार स्थल हैं: डिब्रूगढ़ ज़िले का बोगीबील, कामरूप (मेट्रो) ज़िले का पांडु, नगाँव ज़िले का सिलघाट — ये दक्षिणी तट पर हैं — और विश्वनाथ ज़िले का विश्वनाथ घाट, जो ब्रह्मपुत्र के उत्तरी तट पर है।
प्रकाशस्तंभ नौवहन के साथ-साथ पर्यटन को कैसे बढ़ावा देंगे?
प्रत्येक प्रकाशस्तंभ में चौबीसों घंटे काम करने वाले नौवहन सहायक उपकरण और मौसम अवलोकन सेंसर होंगे। इनके अलावा संग्रहालय, एम्फीथिएटर और दर्शक दीर्घा जैसी पर्यटन सुविधाएँ भी होंगी, जिससे पूर्वोत्तर में प्रकाशस्तंभ पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
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