11 मार्च 2026 को प्रकाशित यह अपडेट प्रत्यक्ष विदेशी निवेश नीति में एक सीमित लेकिन परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण बदलाव से जुड़ा है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत की प्रत्यक्ष विदेशी निवेश नीति में संशोधन को मंजूरी दी, जिसके तहत भारत से स्थल-सीमा साझा करने वाले देशों की संस्थाओं को स्वचालित मार्ग से 10% तक लाभकारी स्वामित्व वाला गैर-नियंत्रक निवेश करने की अनुमति दी गई। इसका अर्थ है कि निवेश की सीमा और प्रकृति ऐसी रखी गई है कि निवेशक कंपनी पर नियंत्रण हासिल न कर सके।
यह बदलाव 2020 की पाबंदियों में ढील देता है। 2020 की व्यवस्था में भारत से स्थल-सीमा साझा करने वाले देशों से आने वाले सभी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के लिए सरकारी मंजूरी लेना जरूरी था। अब 10% तक के गैर-नियंत्रक निवेश को स्वचालित मार्ग से अनुमति देकर निवेश प्रवाह को कुछ हद तक आसान किया गया है, लेकिन शत्रुतापूर्ण अधिग्रहण के खिलाफ सुरक्षा उपाय बनाए रखे गए हैं। इसलिए यह निर्णय निवेश को आसान बनाने और आर्थिक सुरक्षा के बीच संतुलन का उदाहरण है।
RAS और UPSC जैसी परीक्षाओं में यह मुद्दा भारतीय अर्थव्यवस्था और भारतीय संविधान एवं शासन, दोनों से जुड़ता है। प्रारंभिक परीक्षा में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश, स्वचालित मार्ग, सरकारी मंजूरी मार्ग, लाभकारी स्वामित्व और 2020 की पाबंदियों जैसे तथ्य पूछे जा सकते हैं। मुख्य परीक्षा में इसे निवेश नीति, राष्ट्रीय आर्थिक सुरक्षा, स्थल-सीमा साझा करने वाले देशों से पूंजी प्रवाह और सरकार की नियामकीय भूमिका के संदर्भ में समझना उपयोगी है। स्टैटिक जीके से इसका लिंक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश नीति, कार्यपालिका के निर्णय, आर्थिक उदारीकरण और अधिग्रहण-नियंत्रण से बनता है।
