प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाले केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 5 मई 2026 को सर्वोच्च न्यायालय न्यायाधीश संख्या संशोधन विधेयक 2026 को संसद में प्रस्तुत करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। यह विधेयक सर्वोच्च न्यायालय न्यायाधीश संख्या अधिनियम 1956 में संशोधन करेगा और भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या वर्तमान 33 से बढ़ाकर 37 करेगा। मंत्रिमंडल ने इसका प्रमुख प्रभाव सर्वोच्च न्यायालय की दक्षता और प्रभावशीलता में सुधार बताया, जिसका उद्देश्य शीघ्र न्याय सुनिश्चित करना है। न्यायाधीशों के वेतन, सहायक कर्मचारियों और अन्य सुविधाओं पर व्यय भारत की संचित निधि से पूरा किया जाएगा। विज्ञप्ति में इस प्रस्ताव का संवैधानिक और विधायी संदर्भ भी दिया गया। संविधान का अनुच्छेद 124(1) सर्वोच्च न्यायालय में भारत के मुख्य न्यायाधीश और, जब तक संसद कानून द्वारा बड़ी संख्या निर्धारित न करे, सात से अधिक अन्य न्यायाधीश न होने का प्रावधान करता है। संसद ने सर्वोच्च न्यायालय न्यायाधीश संख्या अधिनियम 1956 बनाया, जिसकी धारा 2 ने भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर न्यायाधीशों की अधिकतम संख्या 10 तय की। 1960 के संशोधन से संख्या 13 और 1977 के संशोधन से 17 की गई, हालांकि 1979 के अंत तक कार्यरत संख्या 15 रखी गई थी और बाद में भारत के मुख्य न्यायाधीश के अनुरोध पर यह प्रतिबंध हटाया गया। बाद के संशोधनों ने 1986 में स्वीकृत संख्या 17 से 25 और 2008 में 25 से 30 की। अंतिम वृद्धि 2019 के संशोधन से हुई थी, जिसने भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर संख्या 30 से 33 की। इसलिए 2026 का प्रस्ताव न्यायालय के संस्थागत कार्यभार और न्याय तक पहुंच की जरूरतों को पूरा करने के लिए क्षमता को समय-समय पर समायोजित करने में संसद की भूमिका को आगे बढ़ाता है।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 5 मई 2026 को सर्वोच्च न्यायालय न्यायाधीश संख्या संशोधन विधेयक को मंजूरी दी, जिससे भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर स्वीकृत न्यायाधीशों की संख्या 33 से 37 हो सके
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 5 मई 2026 को सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीश संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 को मंजूरी दी। इसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या 33 से बढ़ाकर 37 करने का प्रस्ताव है। विज्ञप्ति में इस बदलाव को शीघ्र न्याय, कार्यकुशलता और अनुच्छेद 124(1) के तहत कानून द्वारा अधिक संख्या तय करने की संसद की शक्ति से जोड़ा गया है।
मुख्य तथ्य
- केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सर्वोच्च न्यायालय न्यायाधीश संख्या संशोधन विधेयक 2026 को संसद में प्रस्तुत करने को मंजूरी दी।
- विधेयक भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर सर्वोच्च न्यायालय न्यायाधीश संख्या 33 से 37 करने का प्रस्ताव करता है।
- घोषित प्रभाव सर्वोच्च न्यायालय का अधिक दक्ष और प्रभावी कामकाज तथा शीघ्र न्याय है।
- वेतन और संबंधित व्यय भारत की संचित निधि से पूरा किया जाएगा।
- अनुच्छेद 124(1) संसद को कानून द्वारा सर्वोच्च न्यायालय न्यायाधीशों की बड़ी संख्या निर्धारित करने की अनुमति देता है।
- पूर्व वृद्धि 1960, 1977, 1986, 2008 और 2019 के संशोधनों से हुई थी।
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सर्वोच्च न्यायालय न्यायाधीश संख्या संशोधन विधेयक 2026 में भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर न्यायाधीशों की कितनी संख्या प्रस्तावित है?
विधेयक भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर स्वीकृत संख्या 33 से 37 न्यायाधीश करने का प्रस्ताव करता है। 33 वर्तमान संख्या है, जबकि 30 और 40 वर्ष 2026 के प्रस्ताव नहीं हैं।
स्रोत: Cabinet
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
5 मई 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने क्या मंजूरी दी?
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सर्वोच्च न्यायालय न्यायाधीश संख्या संशोधन विधेयक 2026 को संसद में पेश करने की मंजूरी दी।
विधेयक में क्या बदलाव प्रस्तावित है?
इसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 करने का प्रस्ताव है।
न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने का घोषित प्रभाव क्या है?
विज्ञप्ति के अनुसार इससे सर्वोच्च न्यायालय और बेहतर तथा तेज़ी से काम कर सकेगा और जल्दी न्याय मिल सकेगा।
व्यय कहां से पूरा किया जाएगा?
न्यायाधीशों के वेतन, सहायक कर्मचारियों और सुविधाओं का व्यय भारत की संचित निधि से पूरा किया जाएगा।
पृष्ठभूमि में कौन सा संवैधानिक प्रावधान है?
अनुच्छेद 124(1) इसकी संवैधानिक पृष्ठभूमि है; यह संसद को कानून द्वारा सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की अधिक संख्या निर्धारित करने की अनुमति देता है।
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