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पेरिस समझौता: विस्तृत विवरण
2.1 प्रमुख प्रावधान
तापमान लक्ष्य (अनुच्छेद 2)
यह समझौता पूर्व-औद्योगिक स्तरों से वैश्विक औसत तापमान वृद्धि को 2°C से काफी नीचे रखने, और 1.5°C तक सीमित करने के प्रयास करने की प्रतिबद्धता करता है — एक सीमा जिसके लिए 2050 तक वैश्विक शुद्ध शून्य CO₂ उत्सर्जन आवश्यक है।
NDCs — पेरिस समझौते का हृदय
- प्रत्येक पक्षकार अपना राष्ट्रीय निर्धारित योगदान प्रस्तुत करता है
- NDC में शमन घटक अनिवार्य; अनुकूलन घटक अनुशंसित
- हर 5 वर्ष में प्रस्तुत/अद्यतन करना आवश्यक और क्रमशः अधिक महत्वाकांक्षी होना चाहिए ("उच्चतम संभव महत्वाकांक्षा")
- NDCs सार्वजनिक और ट्रैक किए जाते हैं, पर न्यायिक रूप से लागू करने योग्य नहीं
वैश्विक जायजा (अनुच्छेद 14)
- हर 5 वर्ष में सामूहिक प्रगति का व्यापक मूल्यांकन
- पहला वैश्विक जायजा COP28 दुबई (2023) में पूरा: वर्तमान NDCs से 2100 तक ~2.7°C — लक्ष्यों से काफी ऊपर
- प्रत्येक वैश्विक जायजे का परिणाम महत्वाकांक्षा बढ़ाने के लिए अगले NDC चक्र में जाता है
वित्त (अनुच्छेद 9)
विकसित देश विकासशील देशों को वित्तीय संसाधन "प्रदान करेंगे"। मूल $100 बिलियन प्रति वर्ष वचन (कोपेनहेगन 2009, पेरिस में पुनः पुष्ट) पहली बार 2022 में पूरा हुआ (~$116 बिलियन)। NCQG COP29 बाकू (2024) में सहमत — 2035 तक विकसित से विकासशील देशों को $300 बिलियन/वर्ष, और सभी स्रोतों से $1.3 ट्रिलियन।
हानि और क्षति (अनुच्छेद 8)
- मानता है कि कुछ जलवायु प्रभाव अनुकूलन क्षमता से परे हैं — "सीमाओं से परे" हानियाँ
- समुद्र स्तर वृद्धि का सामना करने वाले छोटे द्वीप राज्य और सूखाग्रस्त देश प्रभावित
- सैंटियागो नेटवर्क (COP25): हानि और क्षति के लिए तकनीकी सहायता
- COP27 (2022) में हानि और क्षति कोष बनाया गया; COP28 (2023) में विश्व बैंक की अंतरिम मेजबानी में चालू; प्रारंभिक वचन: $475 मिलियन
प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और क्षमता निर्माण
- UNFCCC के तहत प्रौद्योगिकी तंत्र: CTCN (जलवायु प्रौद्योगिकी केंद्र और नेटवर्क)
- Green Climate Fund (GCF) — मुख्य बहुपक्षीय कोष; $10+ बिलियन पूंजीकृत
2.2 पेरिस समझौता वार्ता में भारत की स्थिति
भारत ने CBDR-RC सिद्धांत पर जोर देते हुए पेरिस वार्ता में केंद्रीय भूमिका निभाई। भारत के 2022 अद्यतन NDC में शामिल हैं: 2030 तक गैर-जीवाश्म ईंधन से 50% बिजली; GDP की उत्सर्जन तीव्रता में 45% कमी; 500 GW गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता; और 2070 तक शुद्ध शून्य।
