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राजव्यवस्था, शासन एवं समसामयिकी

संभावित प्रश्न एवं आदर्श उत्तर

शीत युद्ध के बाद का विश्व: अमेरिकी वर्चस्व, बहुध्रुवीयता एवं वैश्विक आतंकवाद

पेपर III · इकाई 1 अनुभाग 9 / 11 0 PYQ 26 मिनट

सार्वजनिक अनुभाग पूर्वावलोकन

संभावित प्रश्न एवं आदर्श उत्तर

प्र.1 (5 अंक — 50 शब्द): "एकध्रुवीय विश्व" से क्या आशय है? यह कब और क्यों उभरा?

उत्तर (HI): एकध्रुवीय विश्व में एक प्रभुत्वशाली शक्ति अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था को नियंत्रित करती है। 25 दिसम्बर 1991 को USSR के विघटन के बाद अमेरिका एकमात्र महाशक्ति बनने पर यह उभरा। Charles Krauthammer ने इसे "एकध्रुवीय क्षण" कहा। अमेरिकी प्रभुत्व अतुलनीय सैन्य शक्ति, डॉलर-आधारित वैश्विक अर्थव्यवस्था, NATO विस्तार और IMF तथा World Bank जैसी अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं के नियंत्रण पर टिका था।


प्र.2 (5 अंक — 50 शब्द): 9/11 आतंकी हमलों और उनके वैश्विक प्रभाव पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखें।

उत्तर (HI): 11 सितम्बर 2001 को al-Qaeda आतंकियों ने US में चार विमान अपहृत किए, World Trade Center और Pentagon हमलों में 2,977 लोग मारे गए। परिणाम: NATO ने पहली बार अनुच्छेद 5 लागू किया; US ने Afghanistan (2001) और Iraq (2003) में आक्रमण किया; UNSC Resolution 1373 ने वैश्विक आतंकवाद-रोधी सहयोग अनिवार्य किया; निगरानी शक्तियां विश्वव्यापी रूप से बढ़ाई गईं; FATF ने आतंक-वित्तपोषण नियंत्रण मजबूत किए।


प्र.3 (5 अंक — 50 शब्द): बहुध्रुवीयता क्या है? आज के विश्व में प्रमुख शक्ति केंद्रों के नाम बताइए।

उत्तर (HI): बहुध्रुवीयता उस अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था को कहते हैं जिसमें कई लगभग समकक्ष शक्ति केंद्र हों — एकध्रुवीय (एक) या द्विध्रुवीय (दो) के विपरीत। आज के प्रमुख शक्ति केंद्र: United States (सैन्य और प्रौद्योगिकी), China (विनिर्माण, BRI, आर्थिक भार), European Union (मानक शक्ति), Russia (परमाणु और ऊर्जा), India (सबसे तेज बढ़ती अर्थव्यवस्था, Global South आवाज), और उभरती क्षेत्रीय शक्तियां जैसे Brazil, Saudi Arabia और Turkey।


प्र.4 (10 अंक — 150 शब्द): China के वैश्विक शक्ति के रूप में उभार और अमेरिकी वर्चस्व को उसकी चुनौती का मूल्यांकन करें।

उत्तर (HI): China का एक विकासशील देश से संभावित महाशक्ति तक का उभार 21वीं सदी की परिभाषित भू-राजनीतिक कहानी है। इसकी आर्थिक यात्रा — GDP $1.2 ट्रिलियन (2000) से $17.8 ट्रिलियन (2023) — SEZs, निर्यात-नेतृत्व विनिर्माण, WTO सदस्यता (2001) और विशाल बुनियादी ढांचा निवेश से प्रेरित थी।

सैन्य आयाम: China ने PLA को आधुनिक बनाया, विमानवाहक पोत लॉन्च किए, हाइपरसोनिक मिसाइलें तैनात कीं और South China Sea का सैन्यीकरण किया, जिससे पड़ोसियों और US में सुरक्षा चिंताएं बढ़ीं।

कूटनीतिक चुनौती: BRI (2013) 140+ देशों में फैला है, पश्चिमी-नेतृत्व विकास के विकल्प के रूप में बुनियादी ढांचा वित्त प्रदान करता है। Asian Infrastructure Investment Bank (AIIB, 2016) World Bank से प्रतिस्पर्धा करता है। BRICS विस्तार (2024: 10 सदस्य) China को बहुपक्षीय मंच देता है।

China की शक्ति की सीमाएं: जनसांख्यिकीय गिरावट (वृद्ध होती जनसंख्या, एक-बच्चा नीति के बाद सिकुड़ती कार्यबल), रियल एस्टेट संकट (Evergrande पतन), धीमी वृद्धि (2023: 5.2%), और COVID-19 उत्पत्ति और Taiwan खतरों पर कूटनीतिक अलगाव China के उभार को बाधित करते हैं। US-नेतृत्व सेमीकंडक्टर निर्यात नियंत्रण (CHIPS Act, 2022) China के प्रौद्योगिकी अंतर को लक्षित करते हैं।

निष्कर्ष: China-US प्रतिद्वंद्विता 21वीं सदी की भू-राजनीति को परिभाषित करती है — "Thucydides Trap" (Graham Allison), "नया शीत युद्ध" या "महाशक्ति प्रतिस्पर्धा" कहते हैं। आर्थिक अन्योन्याश्रयता ($575 बिलियन द्विपक्षीय व्यापार) के कारण पूर्ण सैन्य टकराव असम्भव है, पर Taiwan, South China Sea और प्रौद्योगिकी वर्चस्व पर रणनीतिक प्रतिस्पर्धा तीव्र होगी।


प्र.5 (5 अंक — 50 शब्द): भारत की विदेश नीति में "रणनीतिक स्वायत्तता" की अवधारणा समझाइए।

उत्तर (HI): रणनीतिक स्वायत्तता का अर्थ है कि India बिना बाध्यकारी गठबंधन प्रतिबद्धताओं के सभी प्रमुख शक्तियों से संलग्न होते हुए स्वतंत्र विदेश नीति बनाए। 1991 के बाद India ने कड़ी गुटनिरपेक्षता को रणनीतिक स्वायत्तता से प्रतिस्थापित किया — QUAD (US, Australia, Japan के साथ) में शामिल होते हुए Russian S-400 मिसाइलें खरीदीं, Russia के Ukraine आक्रमण की निंदा वाले UN वोटों में परहेज बरता, और Iran तथा Israel दोनों से मजबूत सम्बंध बनाए रखे।


प्र.6 (10 अंक — 150 शब्द): शीत युद्धोत्तर काल में वैश्विक सुरक्षा की प्रमुख चुनौतियों पर चर्चा करें।

उत्तर (HI): शीत युद्धोत्तर विश्व में संरचित द्विध्रुवीय निरोध के स्थान पर छह प्रमुख चुनौतियों वाला जटिल, बहुआयामी सुरक्षा वातावरण बना।

1. आतंकवाद: Al-Qaeda के 9/11 हमलों (2001) ने गैर-राज्य कर्ताओं की सामूहिक हिंसा क्षमता प्रदर्शित की। ISIS की खिलाफत (2014–19) और मध्य Asia में ISIS-K का जारी खतरा दर्शाता है कि आतंकवाद एक वैश्विक, वैचारिक-चालित घटना में रूपांतरित हो गया है जिसे पारम्परिक सैन्य शक्ति पूरी तरह नहीं हरा सकती।

2. परमाणु प्रसार: NPT की विश्वसनीयता कमजोर है — North Korea परमाणु शक्ति बना (परीक्षण 2006); Iran की परमाणु महत्त्वाकांक्षाएं अनसुलझी; India, Pakistan और Israel NPT में शामिल नहीं। परमाणु आतंकवाद का जोखिम (विखंडनीय सामग्री की चोरी) एक और परत जोड़ता है।

3. साइबर युद्ध: Stuxnet (2010), Russian चुनाव हस्तक्षेप (2016), SolarWinds (2020) और Chinese APT अभियान दर्शाते हैं कि राज्य साइबरस्पेस को हथियार बना रहे हैं। महत्त्वपूर्ण बुनियादी ढांचा — बिजली ग्रिड, वित्तीय प्रणालियां, अस्पताल — असुरक्षित है।

4. क्षेत्रीय संघर्ष और राज्य नाजुकता: Syria (500,000+ मृत), Yemen, Libya और Sudan में गृह युद्ध; Russia-Ukraine युद्ध (2022–वर्तमान) क्षेत्रों को अस्थिर करते और शरणार्थी संकट उत्पन्न करते हैं।

5. जलवायु सुरक्षा: जलवायु परिवर्तन "खतरा गुणक" के रूप में — संसाधन संघर्ष, जलवायु शरणार्थी और जलवायु-संवेदनशील देशों में राज्य नाजुकता मध्यम अवधि के सुरक्षा जोखिम हैं।

6. प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष: हाइपरसोनिक मिसाइलें, स्वायत्त हथियार (Lethal Autonomous Weapon Systems — LAWS), और निम्न पृथ्वी कक्षा में प्रतिस्पर्धी उपग्रह नक्षत्र पर्याप्त शस्त्र नियंत्रण ढांचे के बिना नई निरोध चुनौतियां बनाते हैं।

India की प्रतिक्रिया: India इन्हें NIA (आतंकवाद), साइबर एजेंसियों, बहुपक्षीय मंचों (FATF, UNSC सदस्यता) और रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखते हुए रणनीतिक भागीदारियों से संबोधित करता है।