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राजव्यवस्था, शासन एवं समसामयिकी

परिचय: शीत युद्ध और उसका अंत

शीत युद्ध के बाद का विश्व: अमेरिकी वर्चस्व, बहुध्रुवीयता एवं वैश्विक आतंकवाद

पेपर III · इकाई 1 अनुभाग 2 / 11 0 PYQ 26 मिनट

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परिचय: शीत युद्ध और उसका अंत

शीत युद्ध (1947–1991) ने लगभग आधी सदी तक अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था को परिभाषित किया। यह United States-नेतृत्व वाले पश्चिमी गुट और Soviet Union-नेतृत्व वाले पूर्वी गुट के बीच द्विध्रुवीय टकराव था। इस संघर्ष की विशेषताएं थीं — वैचारिक प्रतिद्वंद्विता (उदार लोकतंत्र बनाम मार्क्सवाद-लेनिनवाद), परमाणु निरोध (पारस्परिक सुनिश्चित विनाश — MAD), एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका में प्रॉक्सी युद्ध, तथा अत्यधिक संसाधन खपत करने वाली हथियारों की होड़।

शीत युद्ध के प्रमुख मील-पत्थर

  • 1947: Truman Doctrine और Marshall Plan — अमेरिकी रोकथाम नीति शुरू
  • 1949: NATO की स्थापना; China की साम्यवादी क्रांति (PRC की स्थापना)
  • 1950–53: Korean War — पहला प्रमुख प्रॉक्सी संघर्ष
  • 1962: Cuban Missile Crisis — परमाणु युद्ध के सबसे निकट का क्षण
  • 1979: Afghanistan में Soviet आक्रमण — Soviet पतन की शुरुआत
  • 1985: Mikhail Gorbachev ने ग्लासनोस्त (खुलापन) और पेरेस्त्रोइका (पुनर्संरचना) लागू किए
  • 1989: Berlin Wall का पतन (9 नवम्बर 1989) — शीत युद्ध का प्रतीकात्मक अंत
  • 1991: USSR का विघटन — 15 उत्तराधिकारी राज्य; Russia को UNSC में Soviet सीट विरासत में मिली

शीत युद्ध में India की स्थिति

India गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) का सह-संस्थापक था — Egypt के Nasser और Yugoslavia के Tito के साथ (Bandung सम्मेलन, 1955; Belgrade, 1961)। India ने दोनों गुटों से सहायता और हथियार प्राप्त करते हुए रणनीतिक लचीलापन बनाए रखा। हालांकि, 1971 के India-Soviet मैत्री, शांति एवं सहयोग संधि के बाद यह Soviet Union की ओर झुक गया।